प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन आज नोएडा में सैमसंग की मोबाइल फैक्ट्री का उद्घाटन करेंगे. यह दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री होगी.
आज दुनिया की सबसे बड़ी मोबाइल फैक्ट्री लगा रही सैमसंग का शुरुआती दौर में इस कारोबार से कोई नाता नहीं था. लेकिन जब वह इसमें उतरी तो उसने क्वालिटी पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया.
सैमसंग ने 1995 में जब अपना पहला मोबाइल फोन लाया, तो कंपनी के चेयरमैन ली
कुन-ही ने कुछ मोबाइल फोन नये साल के तोहफे के तौर पर बांटे. लेकिन
जिन्हें फोन इस्तेमाल के लिए दिया गया था, उन्होंने बताया कि फोन काम नहीं
कर रहे हैं.
इस फीडबैक के बाद ली दक्षिण कोरिया स्थित कंपनी के प्लांट पर एक दिन अचानक पहुंचे. यहां उन्होंने इन्वेंटरी में पड़े लाखों मोबाइल फोन का एक ढेर लगाया और उसे आग के हवाले कर दिया.
उन्होंने यह कदम दुनिया को ये बताना के लिए उठाया कि उनकी कंपनी क्वालिटी उत्पाद बनाने पर फोकस करती है.
नूडल बेचा करती थी कंपनी:
सैमसंग की शुरुआत बायुंग-चुल ली ने 1938 में की थी. कंपनी ने अपने कारोबार की शुरुआत खाद्य निर्यातक के तौर पर की. इस दौरान यह नूडल बनाने का सामान, आटा और मछली का निर्यात चीन समेत अन्य देशों में करती थी.
इसके बाद सैमसंग ने दूसरे कारोबार में भी हाथ आजमाया. 1950 और 1960 के बीच कंपनी जीवन बीमा और टेक्सटाइल्स के क्षेत्र में भी उतरी. 1969 में शुरू हुई सैमसंग इलेक्ट्रोनिक्स. यह यूनिट ज्यादातर टीवी ही बनाती थी. कंपनी का पहला ब्लैक एंड व्हाइट टीवी 1970 में बाजार में आया.
1980 के बाद सैमसंग ने मोबाइल, मेमोरी कार्ड समेत अन्य कंप्यूटर पार्ट्स बनाने पर फोकस दिया. इस तरह यह कंपनी मोबाइल बनाने के बिजनेस में उतरी.