बीते कुछ सालों से मोदी सरकार की अगुवाई में इंडिया पोस्ट यानी भारतीय डाक में बहुत कुछ बदल गया है. उदाहरण के लिए सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) जैसी योजनाओं को पोस्ट ऑफिस से जोड़ा गया तो पोस्ट ऑफिस के बचत खाताधारकों के लिए मोबाइल बैंकिंग की शुरुआत की गई. अब मोदी सरकार भारतीय डाक में एक और बड़ा बदलाव करने जा रही है.
पोस्टल डिपार्टमेंट यानी डाक विभाग, डाक जीवन बीमा (पीएलआई) के कारोबार को विभाजित कर एक अलग कंपनी में बदलने को लेकर गंभीरता से विचार कर रहा है. न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक डाक विभाग के एक बड़े अधिकारी गौतम भट्टाचार्य ने यह जानकारी दी है.
इसके साथ ही गौतम भट्टाचार्य ने बताया है कि अब ''डाक जीवन बीमा'' बीएसई और
एनएसई में लिस्टेड कंपनियों के अलावा प्रोफेशनल्स के लिए भी खोल दिया
गया है.
इसका मतलब ये हुआ कि अब डॉक्टर, इंजीनियर, वकील समेत प्राइवेट
सेक्टर की कंपनियों में काम करने वाले लोग भी डाक जीवन बीमा खरीद सकेंगे.
अब तक यह इंश्योरेंस स्कीम सिर्फ सरकारी और अर्द्ध-सरकारी प्रतिष्ठानों
के कर्मचारियों के लिए थी.
भट्टाचार्य ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, ‘‘डाक जीवन बीमा की बाजार हिस्सेदारी अभी बहुत कम 3 फीसदी है लेकिन यह अन्य जीवन बीमा कंपनियों के मुकाबले अधिक बोनस की पेशकश करता है और प्रीमियम भी कम है. इसका कारण बीमा पॉलिसी बेचने का कमीशन कम होना तथा परिचालन लागत कम है.’’
भट्टाचार्य ने आगे कहा कि फिलहाल डाक विभाग के कुल राजस्व में 60 फीसदी
हिस्सेदारी डाक विभाग बचत योजना से है. अब हमारा जोर पार्सल मेल के जरिये
आय बढ़ाने पर है.
सबसे पुरानी स्कीम
बता दें कि साल 1884 से उपलब्ध डाक जीवन बीमा (PLI) देश की सबसे पुरानी इंश्योरेंस स्कीम है. इंडिया पोस्ट की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक आज 4.7 मिलियन पॉलिसी के साथ यह भारत की टॉप इंश्योरेंस स्कीम्स में शामिल है.
इस स्कीम के तहत संपूर्ण लाइफ इंश्योरेंस (सुरक्षा), एंडोमेंट
इंश्योरेंस (संतोष), ज्वाइंट लाइफ इंश्योरेंस और बच्चों के लिए
चिल्ड्रन पॉलिसी भी शामिल हैं. इस स्कीम के तहत 50 लाख तक की बीमा लिमिट
है. वहीं लोन की सुविधा भी मिलती है. इसके अलावा इनकम टैक्स में छूट का
लाभ भी लिया जा सकता है.