हमारे देश में बहुत सारे लोग टैक्स व्यवस्था को गलत मानते हैं और ये भी कहा जाता है कि भारत की टैक्स व्यवस्था पश्चिम देशों से प्रेरित है. जबकि ये बात सच नहीं है. रामराज्य में भी टैक्स प्रणाली के थी, जिसका ज़िक्र गोस्वामी तुलसीदास ने अपनी मूल दोहावली में किया था और तुलसीदास ने ही रामचरित मानस की भी रचना की थी.