गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (जीएसटी) के तमाम कठिनाइओं की वजह से नाराज चल रहे छोटे-बड़े कारोबारियों को मोदी सरकार ने बड़ी राहत दी है. सरकार की ओर से सूक्ष्म, लघु, छोटे और मध्यम उद्यमों (एमएसएमईज) को 1 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर 2 फीसदी ब्याज सब्सिडी देने की घोषणा की गई है. यही नहीं, अब सिर्फ 59 मिनट में 1 करोड़ तक के कर्ज दी जा सकती है. वहीं सरकारी खरीद में एमएसएमई की हिस्सेदारी को सरकारी ईमार्केटप्लेस (जीईएम) के माध्यम से बढ़ाया गया है. अब यह 25 फीसदी कर दिया गया है. इसमें महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे एमएसएमई का 3 फीसदी शामिल है.
वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने वित्त वर्ष 2019-10 के लिए अंतरिम बजट प्रस्तुत करते हुए कहा, सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन देने के लिए कई कदम उठाएं हैं देश में करोड़ों लोगों को नौकरियां दी हैं. हमने हाल में 1 करोड़ रुपये का कर्ज महज 59 मिनट में हासिल करने की सुविधा का ऐलान किया है. इसके अलावा जीएसटी के तहत रजिस्टर्ड सभी एमएसएमई इकाईयां को 1 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर 2 फीसदी ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाएगी.उन्होंने बताया है कि अभी तक जीईएम ने 17,500 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन पंजीकृत किया है जिससे 25-28 फीसदी की बचत हुई है.
इंडस्ट्री की ये मांगें रह गईं अधूरी!
हालांकि इंडस्ट्री की कई मांगें अधूरी भी रह गई हैं.इंडस्ट्री की ओर से कॉरपोरेट टैक्स घटाने की मांग की जा रही थी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ.वहीं एल्यूमीनियम इंडस्ट्री की ओर से घरेलू उद्योग को सहारा देने की अपील की गई थी. इस इंडस्ट्री का कहना था कि भारत में एल्यूमीनियम आयात पूरी तरह से गैर-जरूरी है क्योंकि देश में पर्याप्त घरेलू क्षमता है. आयात पर अंकुश लगाने के लिए बजट में सरकार को प्राइमरी एल्यूमीनियम और स्क्रैप मेटल दोनों पर मौजूदा सीमा शुल्क को बढ़ाकर 10 फीसदी कर देने की मांग की जा रही थी.बता दें कि भारत में एल्यूमीनियम की डिमांड हर साल 10 फीसदी की दर से बढ़ रही है.
जबकि ऑयल एंड एनर्जी सेक्टर की निवेश पर जोर देने की मांग थी. इस प्रकार की इकाइयों के अवसंरचना के विकास के लिए अलग से विशेष फंड बनाए जाने की भी मांग थी. इसके अलावा बायोफ्यूल/बायोडीजल संयंत्र लगाने के लिए आवश्यक मशीनों के आयात पर जीरो शुल्क कर देने की मांग की गई थी. इस बजट में बायोफ्यूल/बायोडीजल संबंधी सभी उत्पादों पर जीएसटी की न्यूनतम दर 5 फीसदी करने की मांग थी .