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प्रणब के पिटारे पर टिकी देश की निगाहें

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी अब से कुछ ही देर में पेश करने वाले हैं 2011-12 का आम बजट. बजट से सबकी अपनी-अपनी उम्मीदें हैं, लेकिन आम आदमी सिर्फ यही सोच रहा है कि क्या इस बजट से महंगाई पर लगाम लग सकेगी?

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी अब से कुछ ही देर में पेश करने वाले हैं 2011-12 का आम बजट. बजट से सबकी अपनी-अपनी उम्मीदें हैं, लेकिन आम आदमी सिर्फ यही सोच रहा है कि क्या इस बजट से महंगाई पर लगाम लग सकेगी?

प्रणब दा संसद में क्या कहेंगे, इस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं. 2011-12 का बजट ऐसे वक्त में आ रहा है, जब तीन राज्यों में चुनाव होने हैं. ऐसे में आम बजट लोकलुभावन नहीं होगा, इसकी उम्मीद कम ही है.

जिस तरह ममता बनर्जी के रेल बजट में आने वाले विधानसभा चुनावों गूंज सुनाई दी, मुमकिन है कि आम बजट में भी उसका असर दिखे. वैसे सरकार के सामने बड़ी तीन बड़ी चुनौतियां हैं- अर्थव्यवस्था के विकास की ऊंची दर को बरकरार रखना, महंगाई को काबू में करना और राजकोषीय घाटे को कम करना. इसके लिए सरकार को कई बड़े कदम उठाने की जरूरत है.{mospagebreak}

ठीक उतना ही जरूरी है महंगाई की मार से कराहते आम आदमी को राहत देना. मुमकिन है कि इस बजट में इनकम टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाकर वित्तमंत्री लोगों को खुश करने की कोशिश करें.

चुनावी मौसम में आ रहे बजट में किसान भी कुछ राहत की उम्मीद कर सकते हैं. उद्योग जगत की अपनी उम्मीदे हैं. बुनियादी सुविधाओं के विकास पर सरकारी की नीतियों, इंश्योरेंस और रिटेल के क्षेत्र में एफडीआई जैसे बड़े मुद्दों पर उद्योग जगत की नजरें टिकी होंगी.

इसी तरह डायरेक्ट टैक्स कोड यानी डीटीसी और जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स को लेकर सरकार क्या घोषणा करती है इस पर भी सबकी नजरें होंगी.

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