बजट पेश करने के दौरान वित्त मंत्री कुछ ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं, जो आम बोलचाल भाषा में समझना थोड़ा मुश्किल होता है. आगे हम आपको 12 ऐसे ही शब्दों के बारे में बता रहे हैं, जिनके बारे में अगर आप जानकारी रखेंगे, तो बजट को आसानी से समझ पाएंगे.
डायरेक्ट टैक्स : डायरेक्ट टैक्स वह टैक्स होता है, जो किसी भी व्यक्ति व संस्थान की आय, संस्थानों की आय और उसके स्रोत पर लगता है. इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स और इनहेरिटेंस टैक्स इस कैटेगरी में आते हैं.
इनडायरेक्ट टैक्स : उत्पादित वस्तुओं पर लगने वाला टैक्स होता है
इनडायरेक्ट टैक्स. इसके अलावा यह आयात-निर्यात वाले सामान पर उत्पाद शुल्क,
सीमा शुल्क और सेवा शुल्क के जरिय भी लगाया जाता है.
जीडीपी : सकल घरेलू उत्पाद अर्थात जीडीपी एक वित्त वर्ष के दौरान देश के भीतर कुल वस्तुओं के उत्पादन और देश में दी जाने वाली सेवाओं का टोटल होता है.
बजट घाटा : जब खर्चा सरकार के राजस्व से ज्यादा हो जाता है, तब पैदा होने वाली स्थिति को ही बजट घाटा कहते हैं.
राजकोषीय घाटा : राजकोषीय घाटा सरकार के कुल खर्च और कुल राजस्व के बीच का फर्क है. इससे सरकार को यह तय करने में मदद मिलती है कि उसे कितना कर्ज लेना पड़ सकता है.
उत्पाद शुल्क : एक्साइज ड्यूटी अथवा उत्पाद शुल्क वह शुल्क होता है, जो देश के भीतर बनने वाले उत्पादों पर लगाया जाता है. यह कस्टम ड्यूटी से अलग होता है. कस्टम ड्यूटी देश के बाहर से आने वाले उत्पादों पर लगाया जाता है. यह उत्पाद के प्रोडक्शन और खरीद पर लगता है.
सीमा शुल्क :देश में आयात होने वाली वस्तुओं पर सीमा शुल्क अथवा कस्टम ड्यूटी लगती है.
बैलेंस बजट : जब सरकार का राजस्व मौजूदा खर्च के बराबर होता है, तो उसे बैलेंस बजट का नाम दिया जाता है.
बैलेंस ऑफ पेमेंट : देश और दुनिया के अन्य देशों के साथ सरकार का जो भी वित्तीय लेनदेन होता है, उसे ही बैलेंस ऑफ पेमेंट कहा जाता है.
आयकर : बजट में आम आदमी की सबसे ज्यादा नजर इसी पर टिकी होती हैं. यह आपकी और हमारी आय और उसके अलग स्रोत पर लगता है. आय के स्रोत में आपकी आमदनी, निवेश और उस पर मिलने वाल ब्याज भी इसमें शामिल होता है.
विनिवेश :जब सरकार अपने संचालन की किसी कंपनी या संस्थान में अपनी हिस्सेदारी बेचती है, तो उसे विनिवेश कहा जाता है. इसका मतलब ये है कि सरकार अपने अधिकार वाली कंपनी में से हिस्सेदारी निजी कंपनियों या व्यक्ति को बेच देती है.
बॉन्ड : पैसा जुटाने के लिए सरकार अक्सर बॉन्ड जारी करती है. यह कर्ज का एक सर्टिफिकेट होता है.