बिहार के बेगूसराय जिले के सदर अस्पताल परिसर में अंधविश्वास का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. रिफाइनरी थाना क्षेत्र के मोसादपुर गांव निवासी और गैरेज संचालक 25 वर्षीय मनीष कुमार की मौत करंट लगने से हो गई थी.
मनीष वेल्डिंग का कार्य करते समय बिजली की तार की चपेट में आ गया. हादसे के बाद परिजन उसे स्थानीय निजी अस्पताल ले गए, जहां से उसे बेगूसराय सदर अस्पताल रेफर किया गया. लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
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मृत घोषित होने के बावजूद मनीष के परिजनों ने अस्पताल परिसर में ही अंधविश्वास का सहारा लिया. उन्होंने युवक के शव को एक बेंच पर लिटाकर बेलन और आटा पाउडर से शरीर रगड़कर उसे जिंदा करने की कोशिश की. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें परिजनों के साथ कई अन्य लोग इस दृश्य को देख रहे हैं.
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परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों ने इलाज में लापरवाही बरती और सही इलाज न मिलने से मनीष की मौत हुई. उन्होंने बताया कि अस्पताल की एक नर्स भी रगड़ने में मदद कर रही थी लेकिन बाद में डॉक्टर ने उसे अंदर बुला लिया.
सिविल सर्जन डॉ. अशोक कुमार ने सफाई दी कि युवक को मृत अवस्था में लाया गया था और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. परिजनों ने पुरानी परंपराओं और विश्वास के तहत यह कृत्य किया, इससे अस्पताल प्रशासन का कोई लेना-देना नहीं है. यह घटना जागरूकता की कमी और अंधविश्वास हैं. फिलहाल, प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है.