और खतरनाक होने वाला है युद्ध? ईरान जंग के बीच US ने मिडिल ईस्ट भेजे 2500 मरीन और जंगी जहाज

यह तैनाती ऐसे समय में हो रही है जब पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है. ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं और उसने प्रभावी रूप से हॉर्मुज को बंद कर दिया है.

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अमेरिका ने ईरान पर हमले तेज कर दिए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर) अमेरिका ने ईरान पर हमले तेज कर दिए हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 6:44 AM IST

मिडिल ईस्ट की जंग ने पूरी दुनिया में हलचल मचा रखी है. अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर हमले कर रहे हैं तो तेहरान भी चुन-चुनकर विरोधियों को निशाना बना रहा है. इस बीच खबर है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपने 2500 मरीन और समंदर के साथ-साथ जमीन से हमला करने वाला युद्धपोत भेज रहा है.

अधिकारियों के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच यह अमेरिकी सैन्यबलों की एक बड़ी मजबूती मानी जा रही है. बताया जा रहा है कि 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट के कुछ हिस्सों और समंदर के साथ-साथ जमीन से हमला करने वाले जहाज USS ट्रिपोली को मिडिल ईस्ट की ओर बढ़ने का आदेश दिया गया है.

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अधिकारी ने संवेदनशील सैन्य योजनाओं पर चर्चा करने के लिए पहचान उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि करीब 2,500 नौसैनिक और समंदर के साथ-साथ जमीन से हमला करने वाला युद्धपोत मिडिल ईस्ट की ओर भेजा जा रहा है.  इस तैनाती से क्षेत्र में सैनिकों की संख्या में एक बड़ा इजाफा होगा.

बता दें कि मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट को संकट की स्थिति में तेजी से प्रतिक्रिया देने के लिए तैयार किया जाता है. हालांकि इन्हें समंदर के रास्ते सैन्य कार्रवाई के लिए प्रशिक्षित किया जाता है लेकिन ये दूतावासों की सुरक्षा, नागरिकों की निकासी और मानवीय आपदाओं में सहायता जैसे कार्यों में भी विशेषज्ञ होती हैं.

अधिकारियों ने कहा कि इस तैनाती का यह मतलब नहीं है कि तुरंत कोई जमीनी सैन्य अभियान शुरू होने वाली है. लेकिन यह कदम क्षेत्र में सैनिकों की संख्या में एक बड़ा इजाफा करेगा. जमीन पर स्थिति के अनुसार ये बल कई तरह के मिशनों का समर्थन करने में सक्षम हैं.

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31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट, USS ट्रिपोली और मरीन सैनिकों को लेकर चलने वाले अन्य जहाज जापान में तैनात हैं. सैन्य तस्वीरों से पता चलता है कि ये जहाज हाल के दिनों में प्रशांत महासागर में सक्रिय थे. अधिकारियों के अनुसार, उनकी मौजूदा स्थिति को देखते हुए इन जहाजों को ईरान के नजदीकी समुद्री क्षेत्र तक पहुंचने में एक सप्ताह से अधिक समय लग सकता है.

यह तैनाती ऐसे समय में हो रही है जब पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ रहा है. ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं और उसने प्रभावी रूप से हॉर्मुज को बंद कर दिया है. यह दुनिया का एक बेहद महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग है, जिससे होकर वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है.

इसी दौरान अमेरिकी और इजराइली लड़ाकू विमानों ने ईरान के अंदर सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि क्षेत्र के अन्य हिस्सों में भी संघर्ष तेज हो गया है. वहीं, लेबनान में मानवीय संकट भी गंभीर हो गया है. इजराइल द्वारा ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह लड़ाकों को निशाना बनाकर किए गए हमलों में करीब 800 लोगों की मौत हो चुकी है और लगभग 8.5 लाख लोग विस्थापित हो गए हैं.

इस बढ़ती अस्थिरता का असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ा है. ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत बढ़कर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के समय की तुलना में लगभग 40% अधिक है.

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