भारत को NSG की सदस्यता नहीं मिलने पर अमेरिकी सीनेटर खुश

अमेरिका के एक सीनेटर ने भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता नहीं देने का निर्णय करने के लिए एनएसजी की प्रशंसा की है.

Advertisement
अमेरिकी सीनेटर ने NSG की तारीफ की अमेरिकी सीनेटर ने NSG की तारीफ की

अमित कुमार दुबे / BHASHA

  • वाशिंगटन,
  • 25 जून 2016,
  • अपडेटेड 1:08 PM IST

अमेरिका के एक सीनेटर ने भारत को परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता नहीं देने का निर्णय करने के लिए एनएसजी की प्रशंसा की है. अमेरिकी सीनेटर एड्वर्ड मार्के ने चीन के नेतृत्व में हुए मजबूत विरोध के मद्देनजर भारत की सदस्यता पर कोई निर्णय लिए बिना एनएसजी की पूर्ण बैठक के सोल में समाप्त होने के कुछ ही घंटों बाद परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह की तारीफ की.

Advertisement

अमेरिकी सीनेटर ने NSG की तारीफ की
मैसाचुसेट्स से जूनियर डेमोक्रेटिक सीनेटर एड्वर्ड मार्के ने एक बयान में कहा, 'एनएसजी ने भारत को प्रवेश देने से रोककर परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के प्रति अपने दृढ़ समर्थन फिर से दोहराया.' उन्होंने शुक्रवार को कहा कि की स्थापना भारत के 1974 के परमाणु परीक्षण की प्रतिक्रिया के तौर पर की गई थी और इसने परमाणु हथियारों के और विस्तार में योगदान कर सकने वाली उस तकनीक को साझा करने से रोकने के लिए दशकों काम किया है.

'भारत को सदस्यता नहीं मिलना सही फैसला'
भारत विरोधी के तौर पर चर्चित मार्के ने कहा, 'अगर भारत को एनएसजी में शामिल कर लिया जाता तो यह संगठन में भागीदार एकमात्र ऐसी सरकार होती जो , जिससे संधि के प्रति एनएसजी की प्रतिबद्धता कमजोर होती. भारत को प्रवेश देने से रोककर एनएसजी ने संधि और व्यापक वैश्विक अप्रसार व्यवस्था दोनों को मजबूत किया है'.

Advertisement

भारत को NSG की सदस्यता नहीं मिली
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के सदस्य के तौर पर मार्के ने भारत और अमेरिका के बीच असैन्य को पारित होने से रोकने के प्रयासों का असफल नेतृत्व किया है. मार्के ने पिछले महीने कांग्रेस की सुनवाई के दौरान भारत की एनएसजी में सदस्यता के आवेदन का विरोध किया था. एनएसजी की पूर्ण बैठक शुक्रवार को सोल में समाप्त हुई जिसमें भारत की सदस्यता पर कोई निर्णय नहीं लिया गया.

NPT का सदस्य नहीं होने से भारत के खिलाफ फैसला
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कल कहा, 'सोल में एनएसजी की बैठक में भारत को तुरंत समूह की सदस्यता देने से इंकार कर दिया गया और कहा गया कि जिन देशों ने परमाणु अप्रसार संधि पर दस्तखत नहीं किया है उनकी भागीदारी पर चर्चा जारी रहेगी.' चीन ने भारत को सदस्यता दिए जाने को लेकर अपने विरोध को गोपनीय नहीं रखा था. चीन ने भारतीय पक्ष में बड़े समर्थन के बावजूद सदस्यता की उसकी दावेदारी को विफल कर दिया. भारतीय अधिकारियों के अनुसार 38 देशों ने भारत को समर्थन दिया.

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »