US-ईरान पीस डील का रोडमैप तैयार, 60 दिन में हो सकता है फाइनल एग्रीमेंट

स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में हुई हाई लेवल मीटिंग के बाद अमेरिका और ईरान ने 60 दिनों के अंदर फाइनल डील तक पहुंचने के रोडमैप पर सहमति जताई है. कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई इस बातचीत को दोनों पक्षों ने पॉजिटिव और कंस्ट्रक्टिव बताया है.

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परमाणु विवाद, प्रतिबंध और सुरक्षा मुद्दों पर आगे बढ़ी बात, कतर और पाकिस्तान बने मध्यस्थ. (File Photo: ITG) परमाणु विवाद, प्रतिबंध और सुरक्षा मुद्दों पर आगे बढ़ी बात, कतर और पाकिस्तान बने मध्यस्थ. (File Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 जून 2026,
  • अपडेटेड 5:02 PM IST

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच एक बड़ी कूटनीतिक पहल सामने आई है. स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में घंटों चली हाई लेवल मीटिंग के बाद दोनों देशों ने 60 दिनों के अंदर फाइनल एग्रीमेंट तक पहुंचने के मकसद से एक रोडमैप पर सहमति जताई है. कतर और पाकिस्तान ने सोमवार को जारी संयुक्त बयान में इस प्रगति को उत्साहजनक बताया है. 

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संयुक्त बयान में कहा गया कि बातचीत पॉजिटिव और कंस्ट्रक्टिव माहौल में हुई और आगे की टेक्निकल बातचीत के लिए एक मैकेनिज्म तैयार करने पर सहमति बनी है. ये बातचीत लेक ल्यूसर्न समिट के दौरान हुई. यह इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के फ्रेमवर्क के तहत हुई पहली हाई लेवल कमेटी मीटिंग थी. इस पर अमेरिका और ईरान ने हस्ताक्षर किए थे.

अमेरिकी टीम का नेतृत्व उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया, जबकि ईरानी डेलीगेशन की कमान संसद के स्पीकर  मोहम्मद बाकर गालिबाफ के हाथों में थी. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख असीम मुनीर और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने भी बातचीत में हिस्सा लिया. दोनों देशों ने बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाई.

अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों ने मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के तहत हुई प्रगति की समीक्षा की है. इसके साथ ही एक हाई लेवल कमेटी बनाने पर सहमति बनी है, जो पूरी प्रक्रिया पर निगरानी रखेगी. यह कमेटी चीफ नेगोशिएटर्स से नियमित रिपोर्ट लेगी. न्यूक्लियर, सैंक्शन और डिस्प्यूट रेजोल्यूशन मैकेनिज्म से जुड़े विशेष वर्किंग ग्रुप्स की निगरानी करेगी. 

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इसका उद्देश्य MoU को प्रभावी तरीके से लागू करना और बातचीत को अंतिम समझौते तक पहुंचाना है. हाई लेवल कमेटी 60 दिनों के अंदर फाइनल डील तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप पर सहमत हुई है. इसके साथ ही आगे की टेक्निकल बातचीत तुरंत शुरू करने की तैयारी भी की जाएगी. दोनों देशों के बीच गलतफहमियों को रोकने के लिए एक कम्युनिकेशन चैनल भी बनाया जाएगा.

ये चैनल होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में भी मदद करेगा. होर्मुज स्ट्रेट फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री रास्ता है. इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल ट्रांजिट चोकपॉइंट में गिना जाता है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, UAE और ईरान जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों के लिए यह एक्सपोर्ट का प्रमुख रास्ता है.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि पाकिस्तान और कतर के मध्यस्थों ने लेबनान युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ी प्रगति की है. उन्होंने कहा कि पहला वास्तविक टेस्ट 'डी-कॉन्फ्लिक्टेशन सेल' होगा. इस बीच लेबनान में हुआ सीजफायर लागू होता दिख रहा है. इजरायल ने बॉर्डर के पास कुछ इलाकों में पाबंदियों में ढील दी है. 

इजरायल का कहना है कि उसकी सेना दक्षिणी लेबनान में तब तक मौजूद रहेगी जब तक सुरक्षा खतरे खत्म नहीं हो जाते. वहीं हिज्बुल्लाह ने कहा है कि वह हमले तभी रोकेगा जब इजरायल अपने सैनिकों की वापसी का वादा करेगा. जेडी वेंस ने कहा कि शांति के लिए लेन-देन जरूरी है. उन्होंने इसे ऐतिहासिक मीटिंग बताते हुए कहा कि ये एक टेक्निकल बातचीत की शुरुआत है.

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वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बातचीत में हुई प्रगति की तारीफ की है. उन्होंने कहा कि पहली हाई लेवल कमेटी मीटिंग सफलतापूर्वक खत्म हुई और 60 दिनों के अंदर फाइनल डील के लिए रोडमैप पर सहमति बनना एक बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने अमेरिका और ईरान की लीडरशिप की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कतर को धन्यवाद कहा है.

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