अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ दूसरे दौर की शांति वार्ता को लेकर पाकिस्तान जाने वाली अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा रद्द कर दी है. ट्रंप का कहना है कि अमेरिका फायदे की स्थिति में है और ईरान को बात करनी है तो वह खुद फोन करें. हमारे पास सारे विकल्प मौजूद हैं. वहीं, ईरान ने अमेरिका की अत्यधिक मांगों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है और संकेत दिया है कि वह पाकिस्तान के जरिए इनडायरेक्ट बातचीत पक्ष में है.
डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को बताया कि मैंने कुछ देर पहले अपने लोगों को बताया कि वो जाने की तैयारी कर रहे हैं और मैंने कहा, 'नहीं, आप वहां (पाकिस्तान) जाने के लिए 18 घंटे की उड़ान नहीं भर सकते. हमारे पास सारे विकल्प मौजूद हैं. वो (ईरान) जब चाहें हमें फोन कर सकते हैं, लेकिन आप अब और 18 घंटे की उड़ान भरकर यूं ही बैठकर बेकार की बातें नहीं करेंगे.'
ईरानी लीडरशिप में है भ्रम
इससे पहले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर भी पोस्ट किया कर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की पाकिस्तान यात्रा रद्द करने की जानकारी दी थी. उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'मैंने अपने प्रतिनिधियों की इस्लामाबाद, पाकिस्तान जाने वाली यात्रा रद्द कर दी है जो ईरानियों से मिलने वाले थे. यात्रा पर बहुत समय बर्बाद होता है, बहुत काम है!'
ट्रंप ने दावा करते हुए कहा कि ईरान की लीडरशिप में जबरदस्त अंदरूनी कलह और भ्रम की स्थिति है. इसके लिए कौन जिम्मेदार है, ये उन्हें खुद नहीं पता.
'हमारे पास मौजूद हैं विकल्प'
ट्रंप का कहना है, 'हमारे पास सभी विकल्प खुले हुए हैं, जबकि उनके पास कुछ नहीं है! अगर वो बात करना चाहते हैं तो उन्हें बस फोन करना होगा.'
ईरानी प्रतिनिधिमंडल की PAK नेतृत्व से मुलाकात
वहीं, ट्रंप के इन बयानों से कुछ घंटे पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तान के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आर्मी फील्ड मार्शल आसिम मुनीर शामिल थे. इसके बाद वे पाकिस्तान से रवाना हो गए.
दूसरी ओर, ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका की 'अत्यधिक मांगों' (मैक्सिमलिस्ट डिमांड्स) को स्वीकार नहीं करेगा. तेहरान ने अमेरिका पर भरोसा करने को लेकर संदेह जताया है. उनका कहना है कि परमाणु कार्यक्रम पर पिछली वार्ताओं के बाद भी अमेरिका और इजरायल ने उन पर हमले किए. ईरान फिलहाल पाकिस्तान के माध्यम से केवल परोक्ष (इनडायरेक्ट) बातचीत के पक्ष में है और उसने इस्लामाबाद के मध्यस्थता प्रयासों की सराहना की है.
फिलहाल दोनों देशों के बीच अनिश्चितकालीन सीजफायर लागू है, लेकिन जमीनी हालात तनावपूर्ण बना हुए हैं. ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी कर रखी है और सुरंगें बिछाने वाली छोटी नावों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए हैं.
इस बीच, ईरान ने इस हफ्ते तीन जहाजों पर हमला किया, जिनमें से एक भारत जा रहा था. इस संघर्ष और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी के कारण ईंधन, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल आया है, जिससे वैश्विक आर्थिक संकट गहरा गया है.
आपको बता दें कि शांति वार्ता का पहला दौर इसी महीने पाकिस्तान में हुआ था, जिसका नेतृत्व अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने किया था. 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ये दोनों देशों के बीच पहली उच्च स्तरीय सीधी बातचीत थी जो 20 घंटे से ज्यादा चली. हालांकि, इतनी लंबी चर्चा के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका. अब ट्रंप के ताजा फैसले ने कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को फिर से अधर में लटका दिया है.
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