ईरान जंग ने निकाली UAE मॉडल की हवा, पैसा छापने वाली ये इंडस्ट्री दूसे देश में हो रही शिफ्ट

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग का असर अब खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखने लगा है. दुबई, जो कभी मिडिल ईस्ट की सबसे सुरक्षित और तेजी से बढ़ती बिजनेस हब माना जाता था, वहां अब शिपिंग इंडस्ट्री से जुड़े विदेशी कारोबारी दूसरे देशों में जाने की तैयारी कर रहे हैं.

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UAE से ग्रीस-साइप्रस शिफ्ट हो सकती हैं शिपिंग कंपनियां. (Photo- DP World) UAE से ग्रीस-साइप्रस शिफ्ट हो सकती हैं शिपिंग कंपनियां. (Photo- DP World)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 21 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:18 AM IST

ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने सिर्फ तेल बाजार या मिडिल ईस्ट की राजनीति को ही नहीं हिलाया, बल्कि दुबई जैसे ग्लोबल बिजनेस हब की बुनियाद तक को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. जिस UAE को पिछले कुछ सालों में दुनिया का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और फाइनेंशियल सेंटर माना जाने लगा था, वहां अब शिपिंग सेक्टर से जुड़े कई विदेशी प्रोफेशनल्स दूसरे देशों में शिफ्ट होने की तैयारी कर रहे हैं.

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मिडिल ईस्ट आई की रिपोर्ट के मुताबिक, दुबई में काम कर रहे कई वेस्टर्न एक्सपैट्स अब ग्रीस की राजधानी एथेंस और साइप्रस जैसे देशों को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं. इसकी वजह यही है कि होर्मुज स्ट्रेट में खतरा, जहाजों की आवाजाही में रुकावट और युद्ध के लंबे खिंचने का डर बना हुआ है.

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दरअसल, फरवरी में ईरान जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज स्ट्रेट लगभग जाम जैसी स्थिति में पहुंच गया है. अमेरिका और ईरान दोनों अपनी-अपनी तरह से समुद्री नियंत्रण लागू कर रहे हैं, जिसकी वजह से करीब 2000 जहाज खाड़ी क्षेत्र में फंस गए. हालांकि इससे ग्लोबल शिपिंग रेट्स में भारी उछाल आया है और कई टैंकर कंपनियां रिकॉर्ड मुनाफा कमा रही हैं, लेकिन UAE की अर्थव्यवस्था पर इसका उल्टा असर पड़ रहा है.

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जेबेल अली पोर्ट पर कारोबार की रफ्तार धीमी

दुबई का जेबेल अली पोर्ट दुनिया के सबसे बड़े ट्रांसशिपमेंट हब्स में गिना जाता है, जहां एक जहाज से सामान दूसरे जहाज में ट्रांसफर होकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जाता है. लेकिन युद्ध और ब्लॉकेड के कारण यहां कारोबार की रफ्तार धीमी पड़ गई है. पूरे खाड़ी में ये पोर्ट 60% से भी ज्यादा के कार्गो को मैनेज करता है.

UAE का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट यानी तेल भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है, क्योंकि होर्मुज पर ईरान की पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, एक शिप ओनर ने कहा कि समस्या सिर्फ बिजनेस की नहीं है, बल्कि भरोसे की भी है. उनका कहना था, "अगर युद्ध बढ़ता है तो क्या दुबई से परिवार को सुरक्षित तरीके से लंदन या पेरिस भेज पाना आसान होगा? यही चिंता लोगों को परेशान कर रही है."

दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी जंग की मार

युद्ध का असर अब दुबई के रियल एस्टेट सेक्टर पर भी दिखने लगा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, आने वाले महीनों में दुबई की हजारों प्रॉपर्टी एजेंसियां बंद हो सकती हैं. कई छोटी कंपनियां, जो तेजी से बढ़ते प्रॉपर्टी मार्केट और सट्टेबाजी वाले निवेश पर निर्भर थीं, अब टिक नहीं पा रही हैं.

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कोविड के बाद दुबई ने दुनिया भर के निवेशकों, क्रिप्टो कारोबारियों और अमीर प्रोफेशनल्स को आकर्षित किया था. टैक्स में छूट, आसान नियम और तेज ग्रोथ ने इसे ग्लोबल फाइनेंस हब बना दिया था. लेकिन अब ईरान जंग ने पहली बार इस मॉडल की कमजोरी को उजागर कर दिया है.

हालांकि एक्सपर्ट्स मानते हैं कि UAE के पास अभी भी मजबूत आर्थिक संसाधन हैं और दुबई पूरी तरह कमजोर नहीं होगा, लेकिन यह साफ हो गया है कि होर्मुज संकट और क्षेत्रीय युद्ध ने खाड़ी की सबसे चमकदार अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है.

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