ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल के बीच रणनीतिक मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं. अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई हालिया फोन कॉल काफी तनावपूर्ण रही. दोनों नेताओं के बीच सबसे बड़ा विवाद इस बात को लेकर था कि ईरान पर फिर से सैन्य हमला किया जाए या बातचीत के जरिए समझौते की कोशिश जारी रखी जाए.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेतन्याहू ईरान की सैन्य क्षमता और उसके अहम इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह कमजोर करने के लिए दोबारा हमले शुरू करना चाहते हैं. अमेरिकी वेबसाइट Axios ने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि फोन कॉल के बाद नेतन्याहू बेहद नाराज और बेचैन नजर आए. रिपोर्ट में यहां तक कहा गया कि "उनके बालों में आग लगी हुई थी", यानी वह बेहद गुस्से और तनाव में थे.
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दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित हमले को फिलहाल टाल दिया है. बताया गया कि कतर, UAE और दूसरे अरब देशों ने अमेरिका से तनाव कम करने की अपील की थी, जिसके बाद सैन्य कार्रवाई रोक दी गई. इसके साथ ही पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में एक नया शांति प्रस्ताव भी तैयार किया गया है, जिसका मकसद अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की जमीन तैयार करना है.
मध्यस्थ देश 'लेटर ऑफ इंटेंट तैयार' कर रहे!
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप ने नेतन्याहू से बातचीत में कहा कि मध्यस्थ देश एक "लेटर ऑफ इंटेंट" तैयार कर रहे हैं, जिस पर अमेरिका और ईरान हस्ताक्षर कर सकते हैं. इस प्रस्ताव के तहत 30 दिनों तक बातचीत चलेगी, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज स्ट्रेट को खोलने जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी.
हालांकि, इजरायल इस पूरी प्रक्रिया को लेकर काफी संशय में है. CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायली सरकार के अंदर एक बड़ा वर्ग मानता है कि ईरान जानबूझकर बातचीत को लंबा खींच रहा है और इस दौरान अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटा है. यही वजह है कि इजरायल फिर से सैन्य कार्रवाई के पक्ष में दिख रहा है.
अगर नहीं बनी बात तो फिर होगी जंग!
ट्रंप ने हालांकि यह भी कहा कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका दोबारा युद्ध का रास्ता अपना सकता है. उन्होंने कहा, "सब कुछ अब सीमा रेखा पर खड़ा है. अगर सही जवाब नहीं मिला तो हालात बहुत तेजी से बदल सकते हैं."
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उधर ईरान ने भी साफ कर दिया है कि वह अपने 14-सूत्रीय प्रस्ताव के आधार पर ही बातचीत आगे बढ़ाएगा. ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा कि वार्ता जारी है, लेकिन अभी किसी समझौते पर पहुंचना आसान नहीं दिख रहा.
ऐसे में साफ है कि ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल फिलहाल एक ही पेज पर नजर नहीं आ रहे. एक तरफ ट्रंप कूटनीति को मौका देना चाहते हैं, तो दूसरी तरफ नेतन्याहू मानते हैं कि ईरान पर दबाव बनाए रखने का सबसे असरदार तरीका सैन्य कार्रवाई ही है.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क