अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर एक बड़ा दावा सामने आया है. इजराइली अखबार Israel Hayom की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने कथित तौर पर चुपचाप कतर और ईरान के बीच अरबों डॉलर के वित्तीय लेन-देन को मंजूरी दी थी. दावा किया गया है कि इस व्यवस्था का मकसद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर रखना था.
Israel Hayom ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, "राजनयिक अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वॉशिंगटन ने चुपके से दोहा को तेहरान को पैसे ट्रांसफर करने की मंजूरी दी थी, जिससे होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही की आजादी मिल सके और हमलों से सुरक्षा बनी रहे. इस दोहरी नीति का मकसद दुनिया भर में ऊर्जा की कीमतों को काबू में रखना था और इसी के आधार पर रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नेताओं के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) तैयार किया जा रहा था."
आगे कहा गया है कि पैसों के लेन-देन की निगरानी का काम कमजोर कर दिया गया और कतर को सौंप दिया गया, लेकिन वॉशिंगटन में यूरेनियम संवर्धन के मुद्दे पर तीखे विवाद की वजह से बातचीत अटक गई.
'सोच-समझकर उठाया गया कदम...'
रिपोर्ट में दावा किया है, "तीन राजनयिक अधिकारियों ने पुष्टि की है कि अमेरिका ने चुपचाप कतर और ईरान के बीच एक वित्तीय और समुद्री समझौते को मंज़ूरी दी थी. इस समझौते के तहत, होर्मुज स्ट्रेट से कतरी टैंकरों और जहाजों को बिना रोक-टोक गुजरने देने के बदले तेहरान को अरबों डॉलर का भुगतान किया गया था."
आगे कहा गया कि अमेरिकी प्रशासन का यह कदम सोच-समझकर उठाया गया था. प्रशासन ने अपनी घोषित नीति के बिल्कुल उलट, अपनी नौसेना को इस समझौते पर आंखें मूंद लेने की इजाजत दी थी. इस नई जानकारी से साबित होता है कि व्हाइट हाउस ने उस वक्त ही ईरान के साथ होने वाले समझौते की नींव रख दी थी. ऐसा करके, प्रशासन ने ईरान को उस समय एक अहम आर्थिक सहारा दिया, जब वह बेहद गंभीर वित्तीय दबाव का सामना कर रहा था.
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इजरायली अखबार ने सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका ने करीब एक महीने पहले चुपचाप मंजूरी दी थी. यह मंजूरी दोहा की तेहरान के साथ बातचीत का सीधा जरिया खोलने की इच्छा के मुताबिक थी, जो सीजफायर के बाद और मजबूत हुई थी. युद्ध के दौरान अपनी एक गैस सुविधा पर हमले के बाद, कतर को डर था कि ईरान उसकी अन्य सुविधाओं पर भी हमला कर सकता है, इसलिए वह सुरक्षा और शांति बनाए रखने का रास्ता तलाश रहा था.
रिपोर्ट के मुताबिक, युद्धविराम के बाद जहां संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब पर मिसाइल और UAV हमले हुए, वहीं कतर ने ईरान की आर्थिक मदद की और पूरी तरह सुरक्षित रहा. इस समझौते के तहत, ईरान ने कतर में जमा अपनी रकम के एक हिस्से तक पहुंच की मांग की. कुछ भुगतान होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले टैंकरों की फीस के तौर पर दिखाए गए और कतर के जरिए सामान खरीदने के लिए 1 अरब डॉलर तक की क्रेडिट लाइन भी खोली गई.
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