अमेरिका और ईरान के बीच समझौते की चर्चा तेज है. लेकिन इसी बीच इजरायल ने अपना रुख साफ कर दिया है. वहां के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया. उन्होंने कहा कि लेबनान से कोई खतरा हुआ, तो इजरायल एक्शन लेने के लिए पूरी तरह आजाद रहेगा. नेतन्याहू ने साफ कर दिया कि देश की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा. यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है.
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच एक संभावित समझौते को लेकर बातचीत चल रही है. ट्रंप ने कहा है कि दोनों देशों के बीच एक सहमति का मसौदा लगभग तैयार हो चुका है. इसके तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने की बात हो रही है. यह दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से तेल की बड़ी सप्लाई गुजरती है. फरवरी में ईरान को लेकर बढ़े तनाव के बाद इस रास्ते पर असर पड़ा था. अब पाकिस्तान की मध्यस्थता में हो रही बातचीत से उम्मीद जताई जा रही है कि करीब तीन महीने से जारी तनाव कुछ कम हो सकता है.
इजरायल के भीतर भी समझौते का विरोध
इजराइल के एक राजनीतिक सूत्र के मुताबिक, शनिवार रात ट्रंप और नेतन्याहू के बीच फोन पर बात हुई. इस दौरान नेतन्याहू ने साफ कहा कि इजरायल लेबनान समेत हर मोर्चे पर खतरों का जवाब देने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेगा. सूत्र का दावा है कि ट्रंप ने भी इस बात का समर्थन किया. वहीं, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि नेतन्याहू के साथ उनकी यह बातचीत काफी अच्छी रही.
ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने समझौते के ड्राफ्ट को लेकर बड़ा दावा किया है. इसके मुताबिक, इस डील के तहत अमेरिका व उसके साथी देश अब ईरान या उसके मददगारों पर हमला नहीं करेंगे. बदले में ईरान भी लिखित भरोसा देगा कि वह अपनी तरफ से पहले कभी कोई हमला शुरू नहीं करेगा. हालांकि, इस दावे पर अमेरिकी सरकार की तरफ से अभी तक कोई ऑफिशियल मुहर नहीं लगी है.
इस पूरे मामले में परमाणु कार्यक्रम सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. इजराइली सूत्र के मुताबिक, ट्रंप ने साफ कहा है कि जब तक ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म नहीं करता और अपने यहां मौजूद संवर्धित यूरेनियम को नहीं हटाता, तब तक कोई अंतिम समझौता नहीं होगा.
दूसरी तरफ, इजरायल के भीतर भी इस संभावित डील को लेकर सवाल उठ रहे हैं. इजरायल के नेता बेनी गैंट्ज के मुताबिक, अगर ईरान के साथ समझौते के बदले लेबनान में सीजफायर स्वीकार किया गया, तो यह एक बड़ी रणनीतिक गलती होगी. उनका कहना है कि सेना अभी लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, इसलिए जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाना चाहिए. कुल मिलाकर, बातचीत भले आगे बढ़ रही हो, लेकिन इजराइल ने साफ कर दिया है कि सुरक्षा के मामले में वह अपने फैसले खुद लेगा.
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