पुतिन की एक धमकी से सहम गया यूरोप, जानिए गैस के लिए रूस पर कितने निर्भर हैं ये देश

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की धमकी के बाद यूरोप के 4 देश रूसी गैस खरीदने के लिए रूबल में भुगतान करने को राजी हो गए हैं. रूस ने धमकी दी थी कि गैस की डिलीवरी तभी होगी, जब उसका भुगतान उसकी मुद्रा रूबल में किया जाएगा.

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पुतिन ने साफ कर दिया है कि गैस खरीदना है तो रूबल में भुगतान करना होगा. (फाइल फोटो-AP/PTI) पुतिन ने साफ कर दिया है कि गैस खरीदना है तो रूबल में भुगतान करना होगा. (फाइल फोटो-AP/PTI)

Priyank Dwivedi

  • नई दिल्ली,
  • 29 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 5:26 PM IST
  • यूरोपीय देशों की 40% गैस की जरूरत पूरी करता है रूस
  • 2020 में रूस ने 185 अरब क्यूबिक मीटर गैस यूरोप भेजी
  • दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गैस उत्पादक देश है रूस

यूक्रेन से जंग के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की एक धमकी ने पूरे यूरोप को सहमा दिया है. पुतिन ने पिछले महीने धमकाया था कि 'गैर मित्र देशों' को रूस से गैस खरीदने के लिए रूसी मुद्रा रूबल में भुगतान करना होगा. अब रूबल में भुगतान नहीं करने पर रूस ने बुल्गारिया और पोलैंड को दी जाने वाली गैस की सप्लाई रोक दी है. वहीं, एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पुतिन की धमकी के बाद यूरोप के चार देश झुक गए हैं और रूबल में भुगतान करने को राजी हो गए हैं. 

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यूक्रेन के साथ जंग के दौरान भी रूस ने यूरोपीय देशों को गैस की सप्लाई जारी रखी थी. लेकिन बाद में जब यूरोपीय देश रूस के खिलाफ खड़े होने लगे तो पुतिन ने धमका दिया कि गैस लेनी है तो भुगतान रूबल में करना होगा. 

रूस की सरकारी गैस एजेंसी गजप्रोम ने रूबल में भुगतान नहीं करने पर पोलैंड और बुल्गारिया की गैस सप्लाई रोक दी है. इसके बाद पूरे यूरोप में हलचल पैदा हो गई है. 

पोलैंड और बुल्गारिया ने रूस पर 'ब्लैकमेल' करने का आरोप लगाया है. बुल्गारिया के प्रधानमंत्री किरील पेतकोव ने इसे ब्लैकमेल बताते हुए कहा कि गजप्रोम का गैस डिलीवरी को रोकना समझौते का उल्लंघन है. हम इस रैकेट के आगे नहीं झुकेंगे. 

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इसी बीच बुधवार यूरोपियन यूनियन के अधिकारियों ने भी एक इमरजेंसी मीटिंक की. यूरोपियन कमिशन के अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन ने कहा कि रूस गैस के जरिए ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है. हालांकि, रूस के राष्ट्रपति भवन क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने ब्लैकमेल करने के आरोपों को खारिज किया है. 

वहीं, अब पुतिन की धमकी के आगे यूरोपीय देश झुकने लगे हैं. यूक्रेन से जंग में रूस के खिलाफ खड़े यूरोपीय देश अब गैस के लिए बैकफुट पर नजर आने लगे हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक, चार देश रूबल में भुगतान करने को राजी हो गए हैं, जिसमें इटली भी शामिल है. 

तेल-गैस के लिए रूस पर कितना निर्भर हैं यूरोपीय देश?

- इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, यूरोपियन यूनियन के देशों ने 2021 में जितनी गैस निर्यात की, उसमें से 45 फीसदी गैस रूस से आई थी. रूस की गैस यूरोपियन यूनियन के देशों की जरूरत को 40 फीसदी पूरा करती है.

- रूस अपनी गैस की सबसे ज्यादा पाइपलाइन के जरिए करता है. एनर्जी सेक्टर पर नजर रखने वाली BP.com के आंकड़ों के मुताबिक, 2020 में यूरोपियन यूनियन के देशों ने 562 अरब क्यूबिक मीटर गैस निर्यात की थी, इसमें से 185 अरब क्यूबिक मीटर गैस रूस से आई थी.

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- रूस की गैस पर जर्मनी सबसे ज्यादा निर्भर है. जर्मनी ने 2020 में रूस से 56.3 अरब क्यूबिक मीटर गैस खरीदी थी. इसके बाद इटली है, जिसने 19.7 अरब क्यूबिक मीटर गैस खरीदी थी. तीसरे नंबर पर तुर्की है, जिसने 15.8 अरब क्यूबिक मीटर गैस खरीदी थी.

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रूस की गैस, कच्चे तेल और कोयले पर निर्भर है यूरोप

यूरोप रूस की गैस, कच्चे तेल और कोयले पर काफी हद तक निर्भर है. 2019 में यूरोप के कुल गैस निर्यात में रूस की हिस्सेदारी 41.1 फीसदी थी. वहीं, कच्चे तेल में 26.9 फीसदी और कोयले के निर्यात में 46.7 फीसदी हिस्सेदारी रूस की ही थी. 

कितना बड़ा है रूस का तेल-गैस का बाजार?

- कच्चा तेलः अमेरिका और सऊदी अरब के बाद सबसे ज्यादा कच्चे तेल का उत्पादन करने वाला रूस तीसरा देश है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, 2021 में रूस ने हर दिन 10.5 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन किया है. रूस ने पिछले साल हर दिन 47 लाख बैरल कच्चा तेल निर्यात किया है. अकेले यूरोप में हर दिन 24 लाख बैरल कच्चा तेल रूस ने निर्यात किया था.

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- गैसः दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गैस उत्पादक देश रूस है. रूस का अपना गैस पाइपलाइन नेटवर्क है, जिससे बेलारूस और यूक्रेन के जरिए पूरे यूरोप को गैस की सप्लाई होती है. IEA के मुताबिक, यूरोपीय देशों की 40 फीसदी से ज्यादा गैस की जरूरत रूस से ही पूरी होती है. रूस की गैस पर सबसे ज्यादा जर्मनी और इटली निर्भर हैं.

 

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