रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को एक ओपन लेटर में आमने-सामने मुलाकात का प्रस्ताव दिया है. जेलेंस्की ने कहा कि युद्ध को खत्म करने के लिए अब सीधे नेताओं के स्तर पर बातचीत जरूरी है और सिर्फ इसी रास्ते से स्थायी शांति की उम्मीद की जा सकती है.
करीब 1800 शब्दों की चिट्ठी में जेलेंस्की ने लिखा कि यूरोप का यह युद्ध तब तक नहीं रुक सकता जब तक दोनों देशों के शीर्ष नेता सीधे संवाद नहीं करते. उन्होंने कहा कि अमेरिका फिलहाल ईरान संकट पर ज्यादा ध्यान दे रहा है, इसलिए यूक्रेन युद्ध को अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं के बदलने का इंतजार नहीं करना चाहिए.
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अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेंस्की ने पुतिन को संबोधित करते हुए कहा कि "यूक्रेन इस युद्ध को हमारे और आपके बीच सीधे संवाद के जरिए खत्म करने का प्रस्ताव रखता है. मैं आपसे मुलाकात का प्रस्ताव देता हूं." उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यह बैठक तुर्की या स्विट्जरलैंड जैसे किसी तटस्थ देश में हो सकती है.
'अब उम्र का असर दिखने लगा है', पुतिन से बोले जेलेंस्की
अपनी चिट्ठी में जेलेंस्की ने पुतिन पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की. उन्होंने लिखा कि सत्ता में 26 साल बिताने के बाद अब उम्र का असर दिखने लगा है. साथ ही उन्होंने हाल के यूक्रेनी ड्रोन हमलों का जिक्र करते हुए रूस पर दबाव बनाए रखने का संकेत दिया.
हालांकि क्रेमलिन ने चिट्ठी मिलने की पुष्टि की है, लेकिन रूस की तरफ से प्रतिक्रिया पहले जैसी ही रही. मॉस्को ने कहा कि जेलेंस्की चाहें तो रूस आकर पुतिन से मुलाकात कर सकते हैं. वहीं पुतिन ने सेंट पीटर्सबर्ग में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि वह समझौते के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों को समझौता करना होगा.
जंग खत्म करने के लिए रूस की शर्तें
रूस अब भी अपनी पुरानी मांगों पर कायम है. पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन डोनेट्स्क, लुहान्स्क, खेरसॉन और जापोरिज्जिया क्षेत्रों पर अपने दावे छोड़ दे और नाटो में शामिल होने की कोशिश बंद करे. दूसरी तरफ यूक्रेन इन शर्तों को मानने से इनकार करता रहा है. कीव का कहना है कि अगर उसने क्षेत्र छोड़ दिए तो भविष्य में रूस फिर हमला कर सकता है.
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इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी दोनों नेताओं की संभावित मुलाकात का समर्थन किया है. ट्रंप ने कहा कि अगर पुतिन और जेलेंस्की आमने-सामने बैठकर बात करें तो यह बहुत अच्छा होगा और इससे शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
हालांकि अब तक हुई शांति वार्ताएं नाकाम रही हैं और दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर अड़े हुए हैं. ऐसे में जेलेंस्की का यह ओपन लेटर युद्ध समाप्ति की दिशा में एक नई कूटनीतिक पहल माना जा रहा है, लेकिन यह देखना बाकी है कि क्या यह पहल वास्तव में पुतिन और जेलेंस्की को एक ही मेज पर ला पाएगी.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क