'जापान की ये बात मान ली गई तो आसमान छुएंगी तेल की कीमतें, दुनिया पर आ जाएगा बड़ा संकट'

रूस के पूर्व राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव का कहना है कि अगर रूस के तेल की कीमत निर्धारित करने के जापान के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है तो इससे तेल की कीमतें 300-400 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच सकती है.

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रूस के पूर्व राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव (photo: reuters) रूस के पूर्व राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव (photo: reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 6:11 PM IST
  • पूर्व राष्ट्रपति ने तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि को लेकर चेताया
  • जापान ने G-7 में रखा था रूस के तेल की कीमतें नियंत्रित करने का प्रस्ताव

यूक्रेन पर युद्ध के बाद से अमेरिका सहित पश्चिमी देश रूस पर लगातार दबाव बना रहे हैं. रूस पर कई तरह के प्रतिबंध लगाकर उसे आर्थिक चोट पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं. ऐसे में रूस के पूर्व राष्ट्रपति दमित्री मेदवेदेव का बयान सामने आया है.

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा है कि अगर रूस के तेल की कीमत निर्धारित करने के जापान के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है तो इससे तेल की कीमतें 300-400 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच सकती है.

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मेदवेदेव ने कहा कि जापान ने रूस के तेल के मौजूदा स्तरों की तुलना में उसकी कीमत लगभग आधी कर दी जाती है तो इससे बाजार में कम तेल उपलब्ध होगा और कीमतें 300 से 400 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो जाएंगी.

जापान के प्रधानमंत्री ने पेश किया था प्रस्ताव

इस प्रस्ताव को कथित तौर पर जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने G-7 देशों के शिखर सम्मेलन के दौरान पेश किया था.

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मेदवेदेव ने कहा कि अगर इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिल जाती है तो जापान के पास ना तो रूस का तेल होगा और ना ही गैस. इसके साथ ही रूस की सखालिन-2 एलएनजी परियोजना में भी किसी तरह की भागीदारी नहीं होगी.

बता दें कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले हफ्ते एक आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें रूस के सुदूर पूर्व में स्थित सखालिन-2 गैस एवं तेल परियोजना पर पूर्ण नियंत्रण की बात कही गई थी. इस कदम से शेल कंपनी और जापान की मितसुई एंड कंपनी और मितसुबिशी कॉर्प को बाहर होने पर मजबूर होना पड़ेगा.

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नई कंपनी में बने रहने के लिए विदेशी शेयरधारकों को एक महीने के भीतर कंपनी में हिस्सेदारी के लिए रूस सरकार से संपर्क करने की जरूरत है.

G-7 में रूस के तेल की कीमतें नियंत्रित करने पर चर्चा 

बता दें कि G-7 देशों ने पिछले हफ्ते रूस के तेल सहित उसके ईंधन की कीमतें तय करने के तरीकों पर चर्चा की थी. G-7 देशों का यह प्रयास रूस के संसाधनों को सीमित करने के लिए था.

रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष मेदवेदेव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ऐसा होने पर तेल बाजार में कम तेल उपलब्ध रहेगा और इसकी कीमत बहुत अधिक होगी. इसकी कीमत 300-400 डॉलर प्रति बैरल से अधिक होगी.

रूस के तेल की कीमतें निर्धारित करने के प्रस्तावों पर प्रतिक्रिया देते हुए रूस के राष्ट्रपति कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि अन्य देश इस प्रस्ताव से असहमत हो सकते हैं.

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