अमेरिका के साथ मिलकर भारत करने जा रहा ऐसा काम, बढ़ गई चीन की टेंशन!

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने फिजी में पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना की घोषणा की है. यह क्वाड समूह का प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

Advertisement
क्वाड के देश फिजी में एक बड़े प्रोजेक्ट पर सहमत हुए हैं (Photo: Reuters) क्वाड के देश फिजी में एक बड़े प्रोजेक्ट पर सहमत हुए हैं (Photo: Reuters)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 30 मई 2026,
  • अपडेटेड 2:40 PM IST

भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने इस हफ्ते नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद प्रशांत क्षेत्र के द्वीप देश फिजी में संयुक्त रूप से पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की योजना की घोषणा की है. इन चार देशों का समूह, जिसे क्वाड (Quadrilateral Security Dialogue) कहा जाता है, पिछले दो दशकों से एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव के मुकाबले एक बैलेंसिंग पावर के रूप में काम कर रहा है.

Advertisement

क्वाड को लेकर चीन का कहना है कि ऐसे समूहों को किसी तीसरे पक्ष को निशाना नहीं बनाना चाहिए. चीन ने कहा है कि वो 'गुटबंदी आधारित टकराव' का विरोध करता है.

ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने फिजी में पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रशांत क्षेत्र में हाई क्वालिटी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की दिशा में क्वाड का अब तक का सबसे बड़ा कदम बताया है. उन्होंने कहा कि फिजी में पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट इस बात का उदाहरण है कि क्वाड प्रशांत देशों की प्राथमिकताओं के हिसाब से बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करा सकता है.

यह प्रोजेक्ट क्वाड के लिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि मौजूदा वर्ल्ड ऑर्डर में क्वाड की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के साथ संबंध सुधारने की कोशिश कर रहे हैं और अमेरिका ने अपनी प्राथमिकताओं का फोकस एशिया-प्रशांत से हटाकर पश्चिमी गोलार्ध और मध्य पूर्व की ओर कर दिया है.

Advertisement

ऐसे में सवाल उठता है कि फिजी में पोर्ट विकास का महत्व क्या है? और क्या यह अमेरिका-चीन संबंधों में तनाव की वजह हो सकता है?

फिजी में पोर्ट विकास की क्या योजना है?

फिजी के विदेश मंत्री ने बताया कि राजधानी सुवा और लौतोका बंदरगाह 'क्वाड पोर्ट्स ऑफ द फ्यूचर पार्टनरशिप' के तहत विकसित किए जाने वाले पहले पोर्ट होंगे. यह क्वाड की ओर से इस तरह की पहला संयुक्त इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट होगा.

सुवा पहले से ही देश का सबसे बड़ा और व्यस्त बंदरगाह है. लौतोका बंदरगाह चीनी के निर्यात का केंद्र रहा है और यह फिजी के उत्तर-पश्चिम में स्थित देश के दूसरे सबसे बड़े शहर का प्रमुख बंदरगाह है.

फिजी के विदेश मंत्री सकियासी डिटोका ने स्थानीय मीडिया से कहा, 'शुरुआत दो प्रमुख बंदरगाहों से होगी. बाद में इसे अन्य क्षेत्रों तक भी बढ़ाया जा सकता है, जैसे उत्तर में वनुआ लेवू और शायद लेवुका पोर्ट को भी इसमें शामिल किया जाए.'

सुवा पोर्ट चलाने वाली एजेंसी, जिसमें फिजी सरकार की 41 प्रतिशत हिस्सेदारी है, ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ 18.1 करोड़ डॉलर के अपग्रेड प्रोग्राम और लगभग 1.82 अरब डॉलर के रिलोकेशन प्लान पर चर्चा की है.

फिजी पोर्ट्स के कार्यवाहक मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुरेश प्रसाद ने कहा कि अगर यह क्वाड प्रोजेक्ट है तो संभवतः यह सुवा पोर्ट से जुड़ा एक विशाल प्रोजेक्ट होगा.

Advertisement

साल 2023 में फिजी के प्रधानमंत्री सीतिवेनी रबुका ने चीन के साथ सुवा पोर्ट के पुनर्विकास पर चर्चा की थी, लेकिन वो योजना आगे नहीं बढ़ सकी.

चीन क्वाड से नाराज क्यों है?

ताइवान-एशिया एक्सचेंज फाउंडेशन की शोधकर्ता सना हाशमी ने अलजजीरा से बात करते हुए कहा, 'चीन क्वाड को अपने खिलाफ बने गठबंधन के रूप में देखता है और मानता है कि फिजी प्रोजेक्ट प्रशांत के द्वीप देशों तक क्वाड का विस्तार है.'

पिछले कुछ वर्षों में चीन ने इस क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश किया है और उसका प्रभाव लगातार बढ़ा है.

इस सप्ताह क्वाड के फिजी प्रोजेक्ट पर पूछे गए सवाल के जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि क्षेत्रीय सहयोग 'किसी तीसरे पक्ष को निशाना बनाने वाला नहीं होना चाहिए.'

उन्होंने कहा, 'देशों के बीच सहयोग क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देने वाला होना चाहिए, न कि किसी तीसरे पक्ष के खिलाफ. हम विशेष गुटों के गठन और ब्लॉक आधारित टकराव का विरोध करते हैं.' 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »