पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में चल रहा विरोध प्रदर्शन एक बड़े आंदोलन का रूप लेता दिखाई दे रहा है. प्रदर्शनकारियों का दावा है कि पाकिस्तानी प्रशासन और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 53 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग घायल हुए हैं. इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है.
रावलकोट का ईदगाह मैदान इस आंदोलन का केंद्र बनकर उभरा है. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर जुटे लोगों पर सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की है. आंदोलन से जुड़े लोगों का दावा है कि इस कार्रवाई में 16 लोगों की मौत हुई और 37 लोग घायल हुए. इसके बाद गुस्सा और बढ़ गया.
मुजफ्फराबाद, रावलकोट, कोटली और मीरपुर समेत कई शहरों में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. आंदोलनकारियों का दावा है कि 80 हजार से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल हैं. प्रदर्शनकारी पाकिस्तान सरकार पर समस्याओं की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं. अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं.
पाकिस्तान ने JAAC पर लगाया प्रतिबंध
इस आंदोलन की अगुवाई जम्मू-कश्मीर जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) कर रही है. पाकिस्तान ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकारी पक्ष का कहना है कि JAAC की गतिविधियों से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही थी. संगठन का आरोप है कि वो शांतिपूर्ण तरीके से लोगों की आवाज उठा रहा है.
इसे दबाने की कोशिश की जा रही है. रावलकोट में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान कई भावनात्मक बयान सामने आए. आयोजकों में शामिल सरदार अमन खान ने प्रदर्शनकारियों से पीछे न हटने की अपील की. उन्होंने कहा कि आंदोलन अब ऐसे मोड़ पर पहुंच चुका है जहां लोग अपने अधिकारों के लिए हर कीमत चुकाने को तैयार हैं.
उनके बयान और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. प्रदर्शन में शामिल कुछ लोगों ने पाकिस्तान सरकार के खिलाफ तीखी नाराजगी जाहिर की है. उनका कहना है कि वर्षों से क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है. लोग जब अपने अधिकारों की बात करते हैं, उन्हें दबाने की कोशिश की जाती है.
क्या हैं प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें?
PoK में चल रहे आंदोलन के केंद्र में छह प्रमुख मुद्दे बताए जा रहे हैं. प्रदर्शनकारी बिजली संकट, बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी को लेकर नाराज हैं. उनका आरोप है कि स्थानीय संसाधनों का दोहन तो किया जाता है, लेकिन उसका लाभ क्षेत्र के लोगों को नहीं मिलता.
इसके अलावा 27 जुलाई को प्रस्तावित चुनावों में 45 में से 12 सीटें शरणार्थियों के लिए आरक्षित किए जाने का भी विरोध हो रहा है. आंदोलनकारी इसे स्थानीय प्रतिनिधित्व के खिलाफ बता रहे हैं. राजनीतिक उपेक्षा, इंटरनेट प्रतिबंध और JAAC पर लगाए गए प्रतिबंध को भी विरोध की बड़ी वजहों में गिना जा रहा है.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पूरे इलाके में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियों के जरिए उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है. वहीं पाकिस्तान सरकार का तर्क है कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए गए हैं.
इस पूरे घटनाक्रम पर भारत ने भी प्रतिक्रिया दी है. भारतीय पक्ष ने PoK में हो रही घटनाओं को लेकर चिंता जताते हुए कहा है कि यह स्थिति पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में लोगों के अधिकारों से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है. भारत का कहना है कि वहां के लोगों को लोकतांत्रिक अवसर मिलने चाहिए.
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