मुनीर की कूटनीति फेल? तेहरान दौरे के बाद भी नहीं बनी ईरान-US सीजफायर पर बात

अमेरिका-ईरान बातचीत के बावजूद कोई समझौता नहीं हो सका, पाकिस्तान की मध्यस्थता भी विफल रही और सीजफायर की डेडलाइन नजदीक आने से तनाव बढ़ गया है. वहीं, अमेरिका ने बताया है कि होर्मुज के नाकेबंदी शुरू होने के बाद से 14 जहाज रास्ते से गुजरे हैं.

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मुनीर की कोशिशों को ईरान से बड़ा झटका लगा है (Photo: AP) मुनीर की कोशिशों को ईरान से बड़ा झटका लगा है (Photo: AP)

आजतक इंटरनेशनल डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 16 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:09 PM IST

पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच शांति कराने की पूरी कोशिश की. पहले इस्लामाबाद में 30 घंटे से ज्यादा की बातचीत कराई. फिर पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर खुद तेहरान पहुंचे. लेकिन नतीजा क्या निकला? कुछ नहीं. ईरान अभी भी अपनी बात पर अड़ा हुआ है और दूसरे दौर की बातचीत की कोई तारीख तय नहीं हो पाई है. और यह सब तब हो रहा है जब अमेरिका-ईरान सीजफायर की डेडलाइन 22 अप्रैल को खत्म होने वाली है यानी बस कुछ ही दिन बचे हैं.

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पिछले हफ्ते पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत हुई. यह बातचीत करीब 21 घंटे चली और आने-जाने और बीच के छोटे ब्रेक मिलाकर पूरा सिलसिला करीब 30 घंटे का रहा. अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस खुद वहां गए थे और ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गलीबाफ ने अगुवाई की. लेकिन इतनी लंबी बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हुआ.

अमेरिका का कहना था कि ईरान परमाणु कार्यक्रम छोड़ने को तैयार नहीं है. ईरान ने कहा कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा थीं. गलीबाफ ने कहा कि उनकी टीम ने अच्छे सुझाव रखे लेकिन अमेरिकी पक्ष ने ईरान का भरोसा नहीं जीता.

फिर आसिम मुनीर तेहरान क्यों गए?

इस्लामाबाद बातचीत के टूटने के बाद भी पाकिस्तान ने हार नहीं मानी. पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक बड़े राजनीतिक और सुरक्षा दल के साथ तेहरान पहुंचे. ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक उनके दौरे का मकसद दो काम थे. पहला, अमेरिका का संदेश ईरानी नेतृत्व तक पहुंचाना. दूसरा, अगले दौर की बातचीत की योजना बनाना.

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तेहरान में मुनीर ने ईरान के संसद अध्यक्ष गलीबाफ से मुलाकात की. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी उनका स्वागत किया और कहा कि पाकिस्तान की मेजबानी के लिए शुक्रगुजार हैं. लेकिन नतीजे के मामले में सब कुछ खाली हाथ रहा.

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पाकिस्तान ने क्या कहा?

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर आंद्राबी ने साफ कहा कि दूसरे दौर की बातचीत की कोई तारीख अभी तय नहीं हुई है. जब पत्रकारों ने पूछा कि कौन आएगा, कितना बड़ा दल होगा तो उन्होंने कहा कि यह दोनों पक्षों को तय करना है. उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत की सारी जानकारी गोपनीय रखी जा रही है क्योंकि दोनों पक्षों ने पाकिस्तान पर भरोसा किया है. उन्होंने मीडिया से अटकलें न लगाने की अपील की. आंद्राबी ने यह जरूर कहा कि लेबनान में शांति भी इस पूरी प्रक्रिया के लिए जरूरी है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा था?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि दूसरे दौर की बातचीत इस्लामाबाद में अगले दो दिनों में हो सकती है. लेकिन उनके इस बयान के बाद भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह जरूर माना कि इस्लामाबाद बातचीत के बाद भी पाकिस्तान के जरिए अमेरिका और ईरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है.

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असली अड़चन क्या है?

पूरे मामले में सबसे बड़ी दिक्कत ईरान का परमाणु कार्यक्रम है. अमेरिका चाहता है कि ईरान यह कार्यक्रम बंद करे. ईरान इसके लिए तैयार नहीं है. पाकिस्तान के प्रवक्ता ने भी माना कि परमाणु मुद्दा बातचीत में शामिल है लेकिन इस पर किसी के रुख के बारे में वो कुछ नहीं बोलेंगे.

बड़ी तस्वीर क्या है?

इस सब के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्किए के चार दिन के दौरे पर हैं. वो इन देशों के नेताओं से पश्चिम एशिया की स्थिति पर बात कर रहे हैं. पाकिस्तान की कोशिश है कि इलाके के सभी बड़े देश मिलकर शांति की दिशा में काम करें.

22 अप्रैल की डेडलाइन अब बहुत करीब है. अगर इस तारीख से पहले कोई समझौता नहीं हुआ या सीजफायर नहीं बढ़ाई गई तो फिर से युद्ध शुरू होने का खतरा है. पाकिस्तान की तमाम कोशिशों के बावजूद फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है. अभी ईरान और अमेरिका के बीच अगली बैठक कब होगी, इसे लेकर कोई दिन तय नहीं किया गया है.

मिडिल ईस्ट की जंग में आज क्या-क्या बड़ा हुआ?

मिडिल ईस्ट में एक साथ कई बड़ी घटनाएं हो रही हैं. एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन की सीजफायर का ऐलान किया है. दूसरी तरफ ईरान को लेकर तनाव अभी भी बना हुआ है. पाकिस्तान बीच में बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है. और इन सब के बीच लड़ाई भी जारी है. आइए एक-एक करके सब कुछ समझते हैं.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि इजरायल और लेबनान 10 दिन की सीजफायर पर राजी हो गए हैं. यह सीजफाय  शाम 5 बजे अमेरिकी समय यानी भारतीय समय के हिसाब से रात करीब 2:30 बजे (17 अप्रैल) से शुरू होगी. ट्रंप ने कहा कि यह एक स्थायी शांति की दिशा में बड़ा कदम है.

ट्रंप ने किससे बात की?

राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन से फोन पर 'बेहतरीन बातचीत' की और यह सीजफायर तय की. यह पिछले 34 सालों में इजराइल और लेबनान के बीच पहली बड़ी कूटनीतिक कोशिश है. ट्रंप ने अपने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सेना प्रमुख को आगे की शांति कोशिशों के लिए निर्देश भी दिए.

लेबनान ने क्या कहा?

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने ट्रंप को धन्यवाद दिया और जल्द से जल्द गोलीबारी रोकने की अपील की. हालांकि उन्होंने इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से सीधे बात करने से मना कर दिया. उनका कहना था कि जब तक सीजफायर नहीं होती, सीधी बातचीत नहीं होगी. लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने भी ट्रंप के ऐलान का स्वागत किया.

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लेकिन सीजफायर के ऐलान के बावजूद हमले जारी रहे

सीजफायर के ऐलान के बाद भी जमीन पर हालात नहीं बदले. इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में हिजबुल्लाह के 200 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए. टायर शहर के पास कासमियेह तटीय पुल को तबाह कर दिया गया जिससे दक्षिणी लितानी का इलाका बाकी जगहों से कट गया. 

इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और दो घायल हुए. चूफ जिले के सादियात इलाके में एक और हमले में एक महिला की जान गई और दो बच्चे घायल हुए. पिछले कुछ दिनों में अलग-अलग हमलों में कुल 9 लोगों की मौत हो चुकी है और 6 घायल हैं जिनमें कुछ मेडिकल कर्मचारी भी शामिल हैं.

हिजबुल्लाह ने भी हमले नहीं रोके

हिजबुल्लाह ने भी उत्तरी इजरायल पर हमले जारी रखे. उसने इजराइली सेना के श्रागा बेस पर ड्रोन भेजे. अल-बयादा, तायबेह और नहरिया पर रॉकेट दागे. साथ ही मर्कवा टैंकों पर गाइडेड मिसाइलें भी दागी. हिजबुल्लाह ने कहा कि जब तक इजराइल और अमेरिका की आक्रामकता नहीं रुकती, उसके हमले जारी रहेंगे.

इजरायल ने सीजफायर में एक शर्त रखी

इजरायल ने साफ कह दिया कि सीजफायर के दौरान भी वो दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा. यानी इजरायली फौज वहां तैनात रहेगी.

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ईरान का मोर्चा: होर्मुज खाड़ी और पाकिस्तान की कोशिश

इजरायल-लेबनान मामले के साथ-साथ ईरान का मामला भी उतना ही गर्म है. अमेरिका ने होर्मुज की खाड़ी की नाकेबंदी की हुई है. अमेरिकी सेना CENTCOM ने बताया कि पिछले 72 घंटों में 14 जहाजों को वापस भेज दिया गया. रक्षा मंत्री हेगसेथ ने कहा कि यह नाकेबंदी जब तक जरूरी होगी, तब तक जारी रहेगी.

पाकिस्तान इस मामले में बीच-बचाव की कोशिश कर रहा है. पाकिस्तान के सेना प्रमुख असिम मुनीर तेहरान गए और ईरानी अधिकारियों से मिले. कोशिश यह है कि 8 अप्रैल से शुरू हुई दो हफ्ते की अमेरिका-ईरान सीजफायर को आगे बढ़ाया जाए और दूसरे दौर की बातचीत हो. इस सीजफायर की डेडलाइन 22 अप्रैल है यानी बहुत कम समय बचा है. ईरान का परमाणु कार्यक्रम अभी भी सबसे बड़ा अड़ंगा बना हुआ है.

यह भी पढ़ें: इजरायल-लेबनान के नेता 34 साल बाद मिले, दोनों देशों के बीच हो गया सीजफायर, ट्रंप का ऐलान

क्या कोई उम्मीद की किरण है?

इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा है कि अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के सभी बड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बना लिया है. ट्रंप प्रशासन का मानना है कि लेबनान की सीजफायर ईरान युद्ध को खत्म करने में भी मदद करेगी. लेकिन जमीन पर अभी भी हमले जारी हैं और बातचीत की डेडलाइन बहुत करीब है.

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पूरा मामला क्या है?

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमले शुरू किए. इन हमलों से दुनियाभर में तेल की सप्लाई बुरी तरह हिल गई और व्यापार पर भी असर पड़ा. काफी लड़ाई के बाद 8 अप्रैल को दो हफ्ते की सीजफायर हुई. इस सीजफायर की डेडलाइन 22 अप्रैल है. इस बीच दोनों देशों के बीच स्थायी शांति के लिए बातचीत जरूरी थी. पाकिस्तान ने इसमें बीच का रोल निभाने की जिम्मेदारी ली.

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