हम अक्सर सोचते हैं कि दौड़ती-भागती जिंदगी और ऑफिस के तनाव ने हमारी नींद छीन ली है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा देश भी है जहां लोग हर रात औसतन 9 घंटे से ज्यादा घोड़े बेचकर सोते हैं? ग्लोबल स्लीप एटलस दुनिया भर में लोगों की नींद के पैटर्न और आदतों का एक व्यापक डेटाबेस रखता है. जो विभिन्न देशों और संस्कृतियों में नींद की अवधि, गुणवत्ता और समय का विश्लेषण करता है.
इसके डेटा के मुताबिक, नींद के मामले में दुनिया के 'अमीरों' और 'कंगालों' की जो लिस्ट है उसमें दक्षिण अफ्रीका ने नंबर-1 पर जगह बनाई है. मतलब वहां के लोग औसतन दुनिया भर में सबसे ज्यादा सोते हैं. मतलब यहां के लोगों को अगर 'नींद का चैंपियन' कहा जाए तो गलत नहीं होगा. इस एटलस ने 62 देशों के लोगों की नींद के पैटर्न को ट्रैक किया.
ये डेटा बताता है कि अच्छी नींद का सीधा संबंध सिर्फ पैसे से नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल से है. दक्षिण अफ्रीका दुनिया का निर्विवाद 'स्लीप चैंपियन' है. यहां के लोग हर रात औसतन 9 घंटे 13 मिनट सोते हैं. दूसरे नंबर पर है चीन. जो कि मैन्युफैक्चरिंग और बड़ी बड़ी फैक्ट्रियों के लिए जाना जाता है. उसने सबको चौंकाते हुए इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर जगह बनाई है. चीन के लोग औसतन 9 घंटे 2 मिनट की गहरी नींद ले रहे हैं.
अमेरिका 8 घंटे 59 मिनट के साथ तीसरे स्थान पर है. जबकि एस्टोनिया के लोग 8 घंटे 50 मिनट सोते हैं. भारतीयों ने इस लिस्ट में 8 घंटे 48 मिनट की औसत नींद के साथ पांचवां स्थान हासिल किया है. आमतौर पर माना जाता है कि भारत और चीन जैसे देशों में वर्क-लाइफ बैलेंस बिगड़ा हुआ है, लेकिन यह डेटा एक अलग ही कहानी कहता है. भारत में 8 घंटे 48 मिनट की औसत नींद यह संकेत देती है कि लोग अब अपनी रिकवरी और सेहत को प्राथमिकता दे रहे हैं. वहीं चीन का दूसरे नंबर पर होना यह बताता है कि वहां की जनता 'स्मार्ट वर्क' और 'डीप स्लीप' के महत्व को समझ रही है.
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कहां के लोग हैं नींद के 'कंगाल'?
अब बात उन देशों की जहां के लोगों की आंखों में कटती है रात? जहां दक्षिण अफ्रीका में लोग सुकून की नींद ले रहे हैं, वहीं कुवैत दुनिया का सबसे कम सोने वाला देश बनकर उभरा. यहां के लोग औसतन सिर्फ 6 घंटे 15 मिनट ही सो पाते हैं. जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों का हाल भी कुछ ऐसा ही है, जहां काम के दबाव ने लोगों की रातें छोटी कर दी हैं.
दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत और चीन तक, नींद के ये 'चैंपियंस' हमें ये भी सिखाते हैं कि दुनिया में सफलता का रास्ता ऑफिस की फाइलों से नहीं, बल्कि रात की सुकून भरी नींद से होकर गुजरता है. भारत और चीन का टॉप-5 में होना एक सुखद संकेत है कि हम हेल्थ-कॉन्शस हो रहे हैं.
विशेषज्ञ मानते हैं कि दक्षिण अफ्रीका में ज्यादा नींद का कारण वहां की सांस्कृतिक जीवनशैली और जैविक घड़ी का बेहतर तालमेल हो सकता है. वहीं, कुवैत जैसे देशों में 'लाइट पॉल्यूशन' और नाइट-लाइफ नींद में बड़ी बाधा है. हालांकि, तमाम स्टडी यह भी चेतावनी देती हैं कि नींद की 'क्वालिटी' उसके 'घंटों' से ज्यादा मायने रखती है. 9 घंटे की बेचैन नींद से बेहतर 6 घंटे की गहरी और सुकून भरी नींद भी हो सकती है.
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विश्व स्वास्थ्य संगठन की तमाम रिपोर्ट्स बताती हैं कि कम नींद मतलब बीमारियों को दावत. इन रिपोर्ट्स ने बार-बार आगाह किया है कि नींद सिर्फ 'आराम' नहीं, बल्कि शरीर की 'सर्विसिंग' है. जो लोग 7 घंटे से कम सोते हैं, उनमें डिप्रेशन और एंजाइटी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. नींद की कमी से दिमाग में 'टॉक्सिन्स' जमा होने लगते हैं, जो बुढ़ापे में भूलने की बीमारी यानी डिमेंशिया का कारण बनते हैं.
क्योंकि, पर्याप्त नींद न लेना सीधे तौर पर हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे से जुड़ा है. WHO का कहना है कि कम सोने वालों की इम्यूनिटी इतनी कमजोर हो जाती है कि उनका शरीर आम वायरल इन्फेक्शन से भी नहीं लड़ पाता. मैसेज साफ है कि आपकी नींद ही आपकी सबसे बड़ी दौलत है. तो ग्लोबल स्लीप एटलस की रैकिंग में ऊपर आने पर परेशान मत हों और ये समझें कि आप सही तरीके से नींद ले रहे हैं और अपनी बॉडी की सर्विसिंग का पूरा टाइम दे रहे हैं.
संदीप कुमार सिंह