धमकी और वॉकआउट के बाद आखिर पिघली बर्फ, कूटनीति की मेज पर अमेरिका-ईरान में बनी बात... हटने लगे प्रतिबंध, होर्मुज में जहाजों की आवाजाही शुरू!

अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में ईरान से हुई बातचीत को बहुत अच्छा बताया है. उनका कहना है कि इससे एक बड़े शांति समझौते की नींव पड़ गई है. अमेरिका ने ईरान पर से 60 दिन के लिए प्रतिबंध भी हटा दिए हैं. होर्मुज में फिर से टैंकर चलने लगे हैं और तेल की कीमतें गिरी हैं.

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अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन में स्थायी समझौते का रोडमैप तय हो गया है (Photo: Reuters) अमेरिका-ईरान के बीच 60 दिन में स्थायी समझौते का रोडमैप तय हो गया है (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 4:42 AM IST

अमेरिका के वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड में ईरान के अधिकारियों से बातचीत के बाद कहा कि यह बातचीत बहुत अच्छी रही और इससे एक बड़े शांति समझौते की नींव पड़ गई है. लेकिन ईरान ने कहा कि उसने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर कोई बातचीत शुरू नहीं की है. इसके अलावा ईरान से जुड़ी एक न्यूज एजेंसी ने वेंस के एक और दावे को भी गलत बताया है.

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जेडी वेंस सोमवार 22 जून को वाशिंगटन लौटने के लिए विमान में बैठे थे. इस दौरान उन्होंने कहा कि स्विट्जरलैंड में ईरान के अधिकारियों के साथ हुई बातचीत बहुत अच्छी रही है और इससे आखिरी शांति समझौते के लिए एक अच्छी नींव तैयार हो गई है. वेंस का कहना है कि पिछले 36 घंटे बहुत काम के रहे.

हालांकि ईरान ने इस बात से इनकार किया है कि उसने अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में कोई बातचीत शुरू की है.

अमेरिका ने सोमवार से ईरान पर लगे प्रतिबंधों को 60 दिन के लिए हटा दिया है. यह कदम नए शांति समझौते के तहत हुई पहली बातचीत के बाद उठाया गया है. इसके साथ ही अधिकारियों ने बताया कि लेबनान में अब शांति है. इससे पहले लेबनान में लड़ाई हुई थी जिसकी वजह से ईरान ने होर्मुज को बंद करने का ऐलान कर दिया था.

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पिछले वीकेंड में ऐसा लग रहा था कि एक हफ्ते पहले हुआ शांति समझौता खतरे में पड़ गया है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो यह तक धमकी दे दी थी कि अगर ईरान ने होर्मुज को बंद किया तो वह फिर से जंग शुरू कर देंगे. लेकिन अब हालात बदल गए हैं. इस रास्ते से होकर जाने वाले टैंकरों का आना-जाना फिर शुरू हो गया है और तेल की कीमतें भी गिरने लगी हैं.

जेडी वेंस इस शांति समझौते को लेकर शुरू से ही पॉजिटिव बात करते रहे हैं. उनका कहना है कि ईरान ने न्यूक्लियर इंस्पेक्टरों को अपने देश में आने देने पर सहमति दे दी है. साथ ही ईरान विदेशों में फ्रीज किए गए अपने पैसों को मैनेज करने और सीजफायर को संभालने के लिए भी एक सिस्टम बनाने पर राजी हुआ है.

यह भी पढ़ें: 'जिनेवा में अमेरिका से क्या बात हुई, होर्मुज पर कितनी हुई प्रोगेस...' ईरान ने दी पूरी डिटेल्स

दोनों देश पिछले हफ्ते हुए अंतरिम समझौते को आगे बढ़ाना चाहते हैं. इसके लिए स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में हुई बातचीत में दोनों पक्षों ने 60 दिन के अंदर एक पूरा और स्थायी समझौता करने का रोडमैप तैयार किया है. इस बातचीत में पाकिस्तान और कतर ने मीडिएटर यानी बीच में सुलह कराने वाले की भूमिका निभाई.

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इसके अलावा दोनों देशों ने लेबनान में चल रही लड़ाई को रोकने के लिए भी एक तरीका तय किया है. यह लड़ाई अमेरिका के साथी इजरायल और ईरान के साथी हिज्बुल्लाह के बीच चल रही थी. साथ ही दोनों देशों ने एक कम्युनिकेशन लाइन भी शुरू की है ताकि होर्मुज से कमर्शियल जहाजों का सुरक्षित आना-जाना हो सके.

लेकिन इस बीच ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी न्यूज एजेंसी फार्स ने जेडी वेंस के एक दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. वेंस ने कहा था कि इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी यानी आईएईए के इंस्पेक्टर ईरान वापस लौटेंगे. फार्स न्यूज एजेंसी ने अपने एक सूत्र के हवाले से बताया कि हाल ही में स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत में आईएईए इंस्पेक्टरों के ईरान में रहने को लेकर कोई बात ही नहीं हुई थी.

लेकिन इस बीच ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड से जुड़ी न्यूज एजेंसी फार्स ने जेडी वेंस के एक दावे को सिरे से खारिज कर दिया है. वेंस ने कहा था कि इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी यानी आईएईए के इंस्पेक्टर ईरान वापस लौटेंगे. फार्स न्यूज एजेंसी ने अपने एक सूत्र के हवाले से बताया कि हाल ही में स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत में आईएईए इंस्पेक्टरों के ईरान में रहने को लेकर कोई बात ही नहीं हुई थी.

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यानी एक तरफ अमेरिका शांति समझौते को लेकर बहुत पॉजिटिव नजर आ रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान की तरफ से उसके कुछ दावों को गलत बताया जा रहा है. अब आगे क्या होता है, इसके लिए 60 दिन के रोडमैप पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी.

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