ईरान युद्ध की वजह से भारत की तेल रिफाइनरियों का पूरा गणित गड़बड़ा गया है. युद्ध के बीच मध्य-पूर्व से तेल सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है जिस कारण कच्चे तेल की कमी हो गई है. चुनौती सिर्फ कच्चे तेल की मात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात की भी है कि किस प्रकार का कच्चा तेल मिल रहा है.
ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के कारण मध्य-पूर्व से तेल बहुत कम आ रहा है जिसके कारण भारत की रिफाइनरियां अब अन्य देशों से कच्चा तेल खरीदने को मजबूर हैं. इसके चलते वो अपने परिचालन में बदलाव कर रही हैं ताकि अलग-अलग तरह के हैवी क्रूड ग्रेड को प्रोसेस किया जा सके और उन ईंधनों का उत्पादन बढ़ाया जा सके जिनकी बाजार में इस समय सबसे ज्यादा मांग है.
रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल तकनीकों की वैश्विक कंपनी लुम्मस टेक्नोलॉजी के चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर उज्जल के. मुखर्जी ने इकोनॉमिक टाइम्स को बताया कि मौजूदा हालात की वजह से कई प्रमुख तेल उत्पादक क्षेत्रों से होने वाली सप्लाई प्रभावित हुई है, जो पारंपरिक रूप से भारत को तेल उपलब्ध कराते रहे हैं.
भारतीय रिफाइनरियों को अलग-अलग तरह के तेल की प्रोसेसिंग करनी पड़ रही
उन्होंने कहा कि इसकी वजह से भारतीय रिफाइनरियों को ऐसे क्रूड की प्रोसेसिंग करनी पड़ रही है, जो पहले उनकी सामान्य फीडस्टॉक लिस्ट का हिस्सा नहीं था.
भारत के रिफाइनिंग सेक्टर को चार साल पहले यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भी इसी तरह का बदलाव करना पड़ा था. उस समय भारतीय रिफाइनरियों ने भारी छूट पर उपलब्ध रूसी कच्चे तेल की खरीद बहुत अधिक बढ़ा दी थी और उन क्रूड ग्रेड्स को प्रोसेस करना शुरू किया था. भारत के कई रिफाइनिंग प्लांट मूल रूप से रूसी तेल की प्रोसेसिंग के लिए डिजाइन नहीं किए गए थे, लेकिन बाद में उन्हें इसके अनुरूप ढाला गया.
मुखर्जी ने कहा कि ऐसे हालात में लुम्मस जैसी टेक्निकल कंपनियां रिफाइनरियों के साथ मिलकर काम करती हैं ताकि कच्चे तेल से अधिक से अधिक प्रोडक्ट्स निकाले जा सके, ऑपरेशनल चुनौतियों को कम किया जा सके और मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक लचीला बनाया जा सके.
उन्होंने यह भी कहा कि लुम्मस की तकनीक का इस्तेमाल करने वाली रिफाइनरियां अब अलग-अलग तरह के कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए अपने सिस्टम में बदलाव कर रही हैं और हाइड्रोक्रैकर जैसी सुविधाओं का बेहतर इस्तेमाल करना चाहती हैं.
इसका उद्देश्य उत्पादन को अपने हिसाब से ढालना और बाजार में सबसे ज्यादा मांग वाले ईंधनों का निर्माण करना है, भले ही इसके लिए ऐसे क्रूड की प्रोसेसिंग करनी पड़े जिन्हें संभालना अपेक्षाकृत मुश्किल हो.
हर तरह के कच्चे तेल की रिफाइनिंग में एडवांस हो रही भारतीय रिफाइनरियां
मुखर्जी ने बताया कि भारतीय रिफाइनरियां अब पारंपरिक रिफाइनिंग से आगे बढ़कर गैस-टू-केमिकल्स और ऑयल-टू-केमिकल्स प्रोजेक्ट्स, प्रीमियम लुब्रिकेंट बेस ऑयल, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीइथाइलीन और डिलेड कोकिंग यूनिट्स जैसे क्षेत्रों में भी अवसर तलाश रही हैं.
लुम्मस टेक्नोलॉजी का एक बड़ा कारोबार खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) क्षेत्र से जुड़ा है, जो ईरान संघर्ष से सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में शामिल है. हालांकि, मुखर्जी के अनुसार भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बावजूद कंपनी का कोई बड़ा प्रोजेक्ट रद्द नहीं हुआ है या फिर उसके किसी प्रोजेक्ट में बहुत अधिक देरी नहीं हो रही है.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क