' खामेनेई हमारे नेता, हम शहीदों की औलाद...', सुप्रीम लीडर की मौत के बाद ईरान में पहली जुमे की नमाज

ईरान में शुक्रवार की नमाज कुछ खास थी. ये जुमे की वो नमाज थी जब वर्षों बाद ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई इस दुनिया में नहीं थे. ईरानी अपने प्रिय नेता को याद करते हुए बिलख-बिलख कर रो रहे थे. शुक्रवार को ईरान के शहर काले लिबास वाले इंसानों से पटे हुए थे. गम और गुस्से का समंदर यहां साफ दिख रहा था.

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6 मार्च को तेहरान के मोसल्ला चौक पर नमाज पढ़ते लोग (Photo:AFP) 6 मार्च को तेहरान के मोसल्ला चौक पर नमाज पढ़ते लोग (Photo:AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 10:29 PM IST

दस-ग्यारह बजते ही तेहरान की सड़कों पर मर्दों और महिलाओं का हुजूम सा उमड़ पड़ा था. महिलाएं काले लिबास में थीं और पर्दा किए हुए थीं. लेकिन उनका गुस्सा साफ-साफ महसूस किया जा सकता था. पुरुष भी काले कपड़े में थे लेकिन वे मुखर थे और इजरायल-अमेरिका की बर्बादी नारे जोर-शोर से लगा रहे थे. 

शुक्रवार को अली खामेनेई की मौत के ठीक एक सप्ताह बाद ईरान में पहली जुमे की नमाज अदा हुई. युद्ध की आग, अमेरिका-इजरायल के लगातार एयरस्ट्राइक्स और राष्ट्रीय शोक के बीच तेहरान के इमाम खुमैनी मसल्ला, एंगेलाब स्क्वायर और सैकड़ों मस्जिदों में लाखों लोग जमा हुए. यूं लगता था शहर काले कपड़ों से ढक गया है. कुछ लोगों के हाथों में खामेनेई की तस्वीरें थी, तो कुछ हाथ इजरायल और अमेरिका के विरोध में प्लेकार्ड लेकर अपना प्रतिरोध जाहिर कर रहे थे.

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आंसू भरे आंखों और मुट्ठियां तानकर रमजान के महीने में लोग 'ल्बैक या खामेनेई- ऐ खामेनेई, मैं हाजिर हूं!', 'मर्ग बर अमेरिका-अमेरिका मुर्दाबाद', 'मर्ग बर इस्राइल-इजरायल मुर्दाबाद' के नारे लगा रहे थे. यह नमाज सिर्फ इबादत नहीं, बल्कि प्रतिरोध और एकता का ऐतिहासिक प्रदर्शन बन गई. 

अल जज़ीरा की एक टीम ने बताया कि भीड़ इजरायली और अमेरिकी बमबारी के बावजूद जरा सा भी भयभीत नहीं थी. ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले के बाद पहली बार ईरानी कौम इतनी बड़ी तादाद में सड़क पर आई थी. इससे पहले मिनाब की शहीद बच्चियों के जनाजे की नमाज में भी ऐसा ही माहौल देखने को मिला था. 

तेहरान में शुक्रवार को प्रदर्शन करतीं महिलाएं (Photo: AFP)

ईरानी मीडिया द्वारा शेयर किए गए फुटेज में राजधानी में इमाम खुमैनी की ग्रैंड मस्जिद के बाहर खुली जगह पर काले कपड़े पहने पुरुषों और महिलाओं की भीड़ दिख रही है. 

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इस दौरान लाउडस्पीकर पर एक शख्स भीड़ को संबोधित करता है और अली खामेनेई के लिए दुख जताता है. इस शख्स ने कहा, "खामेनेई हमारे समय में ईमान के प्रतीक थे, वे हमारे रखवाले थे. जबकि पास ही प्रार्थना की चटाई पर बैठे दूसरे लोग खुलेआम रो रहे थे. 

तस्वीरों में नमाज के बाद US-इज़रायल युद्ध के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए नमाजियों को दिखाया गया है. 
 
बता दें कि 6 मार्च को पश्चिम एशिया समेत कई मुस्लिम देश के नमाजी बमबारी और युद्ध के बीच रमजान के तीसरे शुक्रवार की नमाज पढ़ी. 

पश्चिम में इलम और बोरुजेर्ड और दक्षिण-पूर्व में ज़ाहेदान सहित ईरान के दूसरे शहरों से आए फुटेज में भी ऐसे ही दृश्य दिखे. इसमें कई नमाज़ पढ़ने वाले ईरानी झंडे पकड़े हुए थे. 

कुम और मशहद जैसे धार्मिक शहरों में भी यही मंजर देखने को मिला. कुम में महिलाएं रो-रोकर सीना पीट रही थीं, मशहद में पुरुष 'खामेनेई हमारे लीडर, हम शहीदों की औलाद' के नारे लगा रहे थे.  इस्फहान और शिराज में भी मस्जिदें खचाखच भरीं थीं. ईरान की सरकारी टीवी ने इसे “ऐतिहासिक जुमे की नमाज” बताया और कहा कि युद्ध के बावजूद ईरानी राष्ट्र नहीं टूटा, बल्कि और मजबूत हुआ. 

जंग का सातवां दिन

इस बीच जंग के सातवें दिन भी ईरान इजरायल का एक दूसरे के ठिकानों पर हमला जारी रहा. शुक्रवार को जब ईरान ने इज़राइल और खाड़ी देशों के खिलाफ जवाबी हमलों की एक और लहर शुरू की, तो इज़रायली लड़ाकू विमानों ने बेरूत और तेहरान पर बमबारी की.

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इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत से इनकार कर दिया और "बिना शर्त सरेंडर" करने की बात कही. 

लेबनान में ये हमले 2024 के सीज़फ़ायर के बाद से सबसे भारी थे, जिसने इज़रायल और ईरान के समर्थन वाले हिज़्बुल्लाह के बीच पिछली लड़ाई खत्म कर दी थी, जिसने ताजा लड़ाई के शुरुआती दिनों में इज़राइल पर रॉकेट दागे थे. इज़रायल की खाली करने की चेतावनी के बाद हज़ारों लोग बेरूत के आस-पास के इलाकों और दक्षिणी लेबनान से भाग गए हैं. 

यह युद्ध मिडिल ईस्ट और उससे आगे के एक दर्जन से ज़्यादा देशों को प्रभावित कर रहा है.  अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमले किए हैं, और उसकी सैन्य क्षमताओं, लीडरशिप और न्यूक्लियर प्रोग्राम को निशाना बनाया है. युद्ध के लिए बताए गए लक्ष्य और टाइमलाइन बार-बार बदलते रहे हैं, क्योंकि US ने कई बार कहा है कि वह ईरान की सरकार को गिराना चाहता है या अंदर से नई लीडरशिप लाना चाहता है. 
 

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