तालमेल की कमी या कोई और प्रेशर? भारत के जहाजों पर ईरानी हमलों से उठे 'दोस्ती' पर सवाल

होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय तेल टैंकरों पर ईरान की गोलीबारी ने क्षेत्रीय सुरक्षा और भारत-ईरान संबंधों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यह हमला संभवतः गलत पहचान का मामला था, लेकिन इससे होर्मुज में तनाव बढ़ा है.

Advertisement
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं (File Photo: AFP) स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं (File Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:28 PM IST

होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय झंडे वाले दो तेल टैंकरों पर ईरान की गोलीबारी ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या ईरान दोस्त देशों के जहाजों की सुरक्षा कर भी सकता है या नहीं. शनिवार को हुए इस हमले ने ईरान के सामने असहज स्थिति पैदा कर दी है क्योंकि भारत उसका विरोधी नहीं है और हाल के हफ्तों में अमेरिकी प्रतिबंधों में अस्थायी छूट के तहत भारत ने ईरान से तेल खरीद भी फिर शुरू की थी.

Advertisement

विश्लेषकों ने कहा कि दोनों भारतीय जहाजों 'जग अर्णव' और 'सैनमार हेराल्ड' पर हमला शायद गलत पहचान का मामला था, न कि भारत के खिलाफ कोई जानबूझकर उठाया गया कदम. हालांकि, उन्होंने कहा कि यह घटना दिखाती है कि होर्मुज में पैदा हुई हालिया स्थिति उन जहाजों को भी प्रभावित कर सकती है जो निशाने पर नहीं थे.

यह घटना उस समय हुई जब ईरान ने संकेत दिया था कि होर्मुज फिर से सख्त सैन्य नियंत्रण में है. शनिवार को कुछ व्यापारी जहाजों को रेडियो चेतावनी मिली कि किसी भी जहाज को स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति नहीं है, जबकि शुक्रवार को संकेत मिले थे कि यातायात फिर शुरू हो सकता है.

दोनों भारतीय झंडे वाले टैंकर कच्चा तेल ले जा रहे थे, जिनमें से एक इराक से 20 लाख बैरल तेल ला रहा था. क्रू में किसी के घायल होने की खबर नहीं है, हालांकि सैनमार हेराल्ड को गोलीबारी से मामूली नुकसान हुआ.

Advertisement

जहाजों पर हमले से भारत की बढ़ी चिंता

भारत ने इस हमले पर अपनी 'गहरी चिंता' दर्ज कराने के लिए दिल्ली में ईरानी राजदूत को तलब किया. विदेश मंत्रालय के शनिवार को जारी बयान के अनुसार, भारत के शीर्ष अधिकारी ने राजदूत मोहम्मद फथाली से कहा कि वो भारत की चिंताओं को ईरानी अधिकारियों तक पहुंचाएं और जल्द से जल्द भारत जाने वाले जहाजों को स्ट्रेट से गुजरने में मदद बहाल करें.

इससे पहले फथाली ने कहा था कि भारतीय जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट खुला है और उन्हें ट्रांजिट यानी होर्मुज पार करने के लिए कोई फीस भी नहीं देनी होगी.

लंदन स्थित दक्षिण एशिया मामलों के लेखक प्रियजीत देबसर्कर ने हॉन्गकॉन्ग स्थित अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से बात करते हुए कहा, 'मुझे लगता है कि यह गलत पहचान का क्लासिक मामला है. आप समझ सकते हैं, होर्मुज स्ट्रेट बेहद भरा हुआ है और वहां बहुत कुछ हो रहा है.'

उन्होंने कहा, 'ईरानी गार्ड्स भारी दबाव में हैं, उनके दुश्मनों के पास भारी सैन्य ताकत है जिसका उन्हें सामना करना है. संभव है कि उन्होंने भारतीय जहाजों पर गोली चलाकर स्थिति का गलत आकलन किया हो.'

भारत के लिए इस घटना ने होर्मुज की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाई है, साथ ही यह चिंता भी बढ़ा दी है कि स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान के साथ उसके संबंधों से  उसे कोई लाभ मिलेगा या नहीं.

Advertisement

यह भारत के लिए बेहद अहम है, क्योंकि वो अपनी तेल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत आयात करता है और खाड़ी क्षेत्र में लंबे रुकावट से बुरी तरह प्रभावित हो सकता है.

जहाजों पर हमले की घटना के बाद ईरान बरतेगा सावधानी

ईरान-भारत संबंध मजबूत और टिकाऊ माने जाते हैं जो लंबे पुराने रिश्तों, व्यापार, ऊर्जा सहयोग और ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर चाबहार बंदरगाह के विकास से बने हैं.

देबसर्कर ने कहा, 'मुझे लगता है कि भविष्य में ईरान ज्यादा सावधानी बरतेगा. दोनों देशों के रिश्तों को देखते हुए मुझे नहीं लगता कि इससे कोई बड़ा उथल-पुथल होगा. यह घटना ईरान युद्ध के बीच बेहद तेजी से बदलती स्थिति में हुई है और दोनों देश इसे समझते हैं.'

यह घटना ऐसे समय हुई जब अमेरिका और ईरान जंग के बीच होर्मुज में जहाजों की आवाजाही बहुत धीमी हो गई है. वीकेंड में अमेरिका ने एक ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज पर हमला कर उसे कब्जे में ले लिया था. उसका कहना था कि जहाज ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा था.

ईरान ने जवाब देने की कसम खाई. विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से कहा कि अमेरिकी धमकियां अमेरिका की बेईमानी के साफ संकेत हैं. इस तनाव के बीच ईरान अमेरिका के साथ दूसरे दौर की बातचीत को भी राजी नहीं हुआ जिसके बाद ट्रंप ने सीजफायर को फिलहाल के लिए आगे बढ़ा दिया है. इस असमंजस के बीच होर्मुज का भविष्य भी अभी साफ नहीं है.

Advertisement

देबसर्कर ने कहा, 'होर्मुज स्ट्रेट का खुलना बेहद महत्वपूर्ण है. यहां से भारी मात्रा में तेल, गैस और यूरोप समेत दुनिया के कई हिस्सों के लिए माल जाते हैं, इसलिए भारत के लिए इसका फिर खुलना या सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित होना जरूरी है.'

ईरानी शासन और सैन्य नेतृत्व में तालमेल की कमी?

विदेश मामलों के जानकार यशवंत देशमुख ने कहा, 'तनाव जरूर है, लेकिन मेरा मानना है कि भारत और ईरान सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं.'

देशमुख ने कहा कि यह घटना या तो ईरान के नागरिक और सैन्य नेतृत्व के बीच तालमेल की कमी दिखाती है या जमीनी स्तर पर कंट्रोल में विफलता, न कि भारत के साथ तनाव बढ़ाने की कोई जानबूझकर कोशिश.

पूर्व भारतीय राजनयिक श्रीकुमार मेनन ने कहा कि होर्मुज टैंकर की घटना दक्षिण एशिया के लिए कोई सीधा खतरा नहीं बनती, हालांकि यह आसपास के जलक्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता को दिखाती है.

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज नाकेबंदी के कारण खाड़ी के भीतर करीब 1.3 करोड़ बैरल तेल और रोजाना लगभग 30 करोड़ घन मीटर तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) फंस गई है, जिससे उत्पादकों को तेलक्षेत्र, रिफाइनरी और एलएनजी संयंत्र बंद करने पड़े हैं. इसका असर एशिया से यूरोप तक अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है.

Advertisement

किंग्स कॉलेज लंदन के अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर हर्ष पंत ने कहा, 'भारत लगातार होर्मुज स्ट्रेट को स्थिर करने की जरूरत पर जोर देता रहा है. भारत इसी तरह की स्थिति को लेकर चेतावनी देता रहा है कि जैसे-जैसे स्ट्रेट का सैन्यीकरण होगा, वैसे-वैसे गलत आकलन और दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ेगा.'

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement