अमेरिका और ईरान में जारी तनाव के बीच वॉशिंगटन ने तेहरान को बड़ा आर्थिक झटका देने का दावा किया है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि अमेरिका ने ईरान से जुड़े लगभग 1 अरब डॉलर के क्रिप्टोकरेंसी फंड जब्त कर लिए हैं. यह कार्रवाई अमेरिका के "ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी" अभियान के तहत की गई है, जिसका मकसद ईरान की वित्तीय ताकत को कमजोर करना है.
फॉक्स बिजनेस के कार्यक्रम में बातचीत के दौरान बेसेंट ने कहा, "हमने ईरान के करीब एक अरब डॉलर के क्रिप्टो फंड को जब्त कर लिया है. हमने सीधे उनके डिजिटल वॉलेट्स पर कब्जा कर लिया." उन्होंने दावा किया कि हाल के हफ्तों में चली सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों ने ईरान को गंभीर वित्तीय संकट में पहुंचा दिया है.
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बेसेंट के मुताबिक, पिछले पांच से छह हफ्तों में हुए सैन्य अभियान और आर्थिक दबाव ने ईरान की कमर तोड़ दी है. उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि कई सुरक्षा कर्मियों को समय पर वेतन नहीं मिल रहा है. साथ ही महंगाई तेजी से बढ़ रही है और सरकार को लोगों के लिए फूड वाउचर जैसी योजनाएं चलानी पड़ रही हैं.
ईरान के बैंक खातों, विदेशी संपत्तियों को बनाया निशाना
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने बताया कि मार्च 2025 में शुरू किए गए "ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी" के तहत ईरान के बैंक खातों, विदेशी संपत्तियों और वित्तीय नेटवर्क को निशाना बनाया गया है. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने यूरोपीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान से जुड़े आलीशान घरों, विला और अन्य संपत्तियों को भी जब्त करने की कार्रवाई कर रहा है.
बेसेंट ने आरोप लगाया कि ईरानी नेतृत्व हर महीने 40 से 50 करोड़ डॉलर तक की रकम विभिन्न माध्यमों से हासिल कर रहा था, लेकिन अमेरिकी कार्रवाई के बाद इन इनकम सोर्स पर बड़ा असर पड़ा है. उन्होंने दावा किया कि यह पैसा ईरानी जनता का था, जिसे सत्ता के शीर्ष लोग अपने हितों के लिए इस्तेमाल कर रहे थे.
तीसरे स्तर के नेताओं के साथ अमेरिका की बातचीत
ईरान के साथ जारी बातचीत पर भी बेसेंट ने टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि हालिया सैन्य कार्रवाइयों के बाद अमेरिका अब ईरान की नई नेतृत्व ढांचे से बातचीत कर रहा है. उनके मुताबिक, शीर्ष स्तर के कई नेता हट चुके हैं और अब तीसरे स्तर के नेतृत्व के साथ वार्ता हो रही है.
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बेसेंट ने कहा कि ईरान की सत्ता दो प्रमुख धड़ों में बंटी हुई है. एक तरफ धार्मिक नेतृत्व है, जबकि दूसरी ओर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का प्रभाव है. उन्होंने कहा कि किसी भी समझौते के लिए दोनों पक्षों को साथ लाना जरूरी है.
उन्होंने यह भी दावा किया कि फारस की खाड़ी में ईरान की आक्रामक गतिविधियों का उल्टा असर हुआ है. इसके बाद खाड़ी देशों ने अमेरिका के साथ वित्तीय सूचनाएं साझा करने और ईरान से जुड़े तेल और बैंकिंग नेटवर्क पर निगरानी बढ़ाने में अधिक सहयोग देना शुरू कर दिया है. अमेरिका का मानना है कि आर्थिक दबाव और प्रतिबंधों के जरिए ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की रणनीति अब असर दिखा रही है.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क