अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर लड़ाई तेज हो गई है. दोनों देश एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं. इस बीच ईरान ने मस्कट में ओमान के साथ हुई हाई-लेवल बातचीत के विफल होने के लिए सीधे तौर पर अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है.
दरअसल ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए अमेरिकी हवाई हमलों की निंदा की है. ईरान ने इन हमलों को 'आक्रामक' करार दिया है.
ईरानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को मस्कट में ईरान और ओमान के बीच एक अहम बैठक हुई थी. इस वार्ता का मकसद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रबंधन और समुद्री रास्तों के संचालन के लिए नए इंतजाम करना था.
ओमान ने दिया था दो अलग रास्तों का प्रस्ताव
इस बीच, अल जजीरा ने सूत्रों के हवाले से मस्कट में हुई इस सीक्रेट मीटिंग की कुछ अहम जानकारियां दी हैं. इस बैठक में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और ओमान के विदेश मंत्री बद्र अल्बुसैदी शामिल हुए थे. बैठक के दौरान, मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान ने होर्मुज में तनाव को कम करने के लिए एक प्रस्ताव रखा था.
मस्कट ने सुझाव दिया था कि इस जलमार्ग में कमर्शियल जहाजों की आवाजाही के लिए दो अलग-अलग नियंत्रित रास्ते बनाए जाएं. इसमें से एक रास्ता ईरानी क्षेत्रीय जल क्षेत्र से होकर गुजरे और दूसरा रास्ता ओमान के जल क्षेत्र से होकर निकले. लेकिन अमेरिका के हस्तक्षेप और दबाव के कारण इस शांति प्रस्ताव पर सहमति नहीं बन सकी.
ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने ओमान पर 'प्रत्यक्ष और परोक्ष' (Directly and Indirectly) रूप से भारी दबाव बनाया. इसी दबाव की वजह से ये बातचीत किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी और विफल हो गई.
ट्रंप के दावे को ईरान ने बताया 'कोरा झूठ'
दरअसल, ट्रंप ने अमेरिकी मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि शनिवार को ईरान एक समझौते के लिए पूरी तरह तैयार हो गया था. ट्रंप के मुताबिक, 'वो (ईरान) सब कुछ छोड़ने और हमारी शर्तें मानने के लिए राजी हो रहे थे. लेकिन फिर अचानक उसके दो घंटे बाद ही उन्होंने ड्रोन से एक जहाज पर हमला कर दिया.'
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इस वार्ता के नतीजों को लेकर ट्रंप के इस बयान को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है. ईरान ने ट्रंप के दावों को निराशा से पैदा हुआ 'कोरा झूठ' करार दिया है. ईरान का कहना है कि ट्रंप का ये बयान जमीनी हकीकत से कोसों दूर है.
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