ईरान अब कभी नहीं रखेगा परमाणु बम सामग्री! ओमान की पहल से बड़ी कामयाबी

ओमान के विदेश मंत्री बदर अल्बुसैदी ने बताया कि ईरान ने परमाणु बम बनाने योग्य सामग्री कभी भी अपने पास न रखने पर सहमति दी है. ये समझौता अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक शांति की दिशा में एक अहम कदम है. ओमान इस समझौते में मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है.

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ओमान ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा है. (Photo: AFP) ओमान ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा है. (Photo: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 7:49 AM IST

दुनिया को परमाणु युद्ध के खतरे से बचाने की दिशा में एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है. ओमान के विदेश मंत्री बदर अल्बुसैदी ने दावा किया है कि ईरान अब परमाणु बम बनाने लायक सामग्री कभी भी अपने पास न रखने पर राजी हो गया है. 

वॉशिंगटन में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से एक अहम मुलाकात के बाद अल्बुसैदी ने इस सफलता की घोषणा की. उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता अब बहुत करीब है.  

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ओमान इस पूरी बातचीत में एक भरोसेमंद मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जो दोनों देशों को एक मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है. इस नए समझौते की सबसे बड़ी विशेषता 'जीरो स्टॉकपाइलिंग' यानी 'शून्य भंडारण' की नीति है.

ईरान अब कभी नहीं रखेगा परमाणु बम सामग्री! 

ओमान के विदेश मंत्री के मुताबिक, 'मेरी राय में सबसे बड़ी उपलब्धि ये समझौता है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु बम बनाने योग्य सामग्री नहीं होगी. ये ओबामा के राष्ट्रपति कार्यकाल में हुए पुराने समझौते में शामिल नहीं था. ये बिल्कुल नया है. मुझे लगता है कि शांति समझौता हमारी पहुंच में है, बशर्ते हम कूटनीति को वहां तक ​​पहुंचने के लिए जरूरी जगह दें. मुझे नहीं लगता कि कूटनीति के अलावा कोई और विकल्प इस समस्या का समाधान कर सकता है.'

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ईंधन में बदलेगा स्टॉक में मौजूद परमाणु

बातचीत का नया ढांचा इसी सिद्धांत पर आधारित है कि अगर ईरान के पास समृद्ध यूरेनियम का भंडार ही नहीं होगा, तो उसके लिए परमाणु बम बनाना तकनीकी रूप से नामुमकिन हो जाएगा. अब ईरान के पास फिलहाल जो भी परमाणु स्टॉक मौजूद है, उसे न्यूनतम स्तर पर लाया जाए और उसे ऐसे ईंधन में बदल दिया जाए जिसे दोबारा कभी भी हथियार बनाने वाली सामग्री में न बदला जा सके.

वार्ता से खुश नहीं डोनाल्ड ट्रंप! 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बातचीत की धीमी रफ्तार पर नाखुशी जाहिर की है. ट्रंप का साफ कहना है कि उन्हें 'नो एनरिचमेंट' यानी यूरेनियम संवर्धन पर पूरी तरह से पाबंदी चाहिए. इसके बावजूद अल्बुसैदी को भरोसा है कि ट्रंप प्रशासन और ईरान, दोनों ही इस बार समझौते को लेकर गंभीर हैं. उन्हें उम्मीद है कि खुद राष्ट्रपति ट्रंप भी चाहते हैं कि ये डील सफल हो ताकि वैश्विक स्थिरता बनी रहे.

नए समझौते में का वेरिफिकेशन करेगी IAEA

अगले चरणों में वियना में तकनीकी विशेषज्ञों के बीच चर्चा होनी तय है, जिसके बाद बड़े नेताओं के बीच उच्च स्तरीय वार्ता का एक और दौर होगा. इस नए समझौते में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) गहन जांच और वेरिफिकेशन भी करेगी.

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ये भी हो सकता है कि अमेरिकी निरीक्षकों को ईरान के परमाणु ठिकानों तक सीधी पहुंच दी जाए ताकि किसी भी तरह के शक की गुंजाइश न रहे. ये पारदर्शिता इस समझौते को सफल बनाने के लिए सबसे जरूरी कड़ी मानी जा रही है.

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