अमेरिका में बाहर से आकर बसे लोगों की कैसी है जिंदगी? रिसर्च में सामने आया सच

अमेरिका में रहने वाले एशियाई मूल के 23 लाख लोगों में से ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जो गरीबी में जी रहे हैं. अमेरिका में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले एशियाई मूल के ज्यादातर नागरिक ऐसे हैं जिनकी उम्र 25 साल से ज्यादा है और उनके पास बैचलर्स डिग्री भी है. रिसर्च के अनुसार, बर्माई मूल के नागरिकों में गरीबी की दर 19 फीसदी और हमोंग मूल के अमेरिकियों में 17 फीसदी है.

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अमेरिका में दो करोड़ से ज्यादा एशियाई मूल के नागरिक हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर) अमेरिका में दो करोड़ से ज्यादा एशियाई मूल के नागरिक हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 11:43 PM IST

अमेरिका के बाहर रहने वाले लोग अक्सर सोचते हैं कि वहां रहने लोग ज्यादा कमाते हैं और अच्छा जीवन जीते हैं, लेकिन हकीकत इससे अलग भी हो सकती है. 

प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले एशियाई मूल के 23 लाख लोगों में से ज्यादातर लोग ऐसे हैं, जो गरीबी में जी रहे हैं. प्यू रिसर्च ने अमेरिकी जनगणना ब्यूरो के आंकड़ों का विश्लेषण कर बताया है कि हर 10 एशियाई अमेरिकी में से एक गरीबी में रहता है.

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हालांकि, भारतीय-अमेरिकी बाकी एशियाई मूल के नागरिकों की तुलना में ज्यादा बेहतर जीवन जी रहे हैं. भारतीय-अमेरिकियों में गरीबी की दर 6 फीसदी है, जो बाकी एशियाई मूल के नागरिकों की तुलना में सबसे कम है.

रिसर्च के अनुसार, बर्माई मूल के नागरिकों में गरीबी की दर 19 फीसदी और हमोंग मूल के अमेरिकियों में 17 फीसदी है.

ज्यादातर लोग 25 साल से ऊपर

प्यू रिसर्च की स्टडी से ये भी पता चलता है कि गरीबी में जीने वाले हर तीन एशियाई मूल के अमेरिकियों में से एक 25 साल से ज्यादा है और उनके पास बैचलर्स की डिग्री है. ऐसे एशियाई अमेरिकी जिनकी उम्र 25 साल से ज्यादा है और जिनके पास बैचलर डिग्री है, उनमें गरीबी की दर 5 फीसदी है. 

रिपोर्ट के मुताबिक, गरीबी रेखा से नीचे करीब 10 लाख से ज्यादा एशियाई मूल के नागरिक अमेरिका के 10 बड़े शहरों में रहते हैं. न्यूयॉर्क सिटी, लॉस एंजेलिस और सैन फ्रांसिस्को में एक लाख से ज्यादा एशियाई अमेरिकी ऐसे हैं जो गरीबी रेखा से नीचे हैं.

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2022 और 2023 में प्यू रिसर्च ने सर्वे किया था और इसमें सामने आया कि एशियाई मूल के हर 10 में से 8 नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है. 

खाने के लिए फूड बैंक पर निर्भर

गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले 57 फीसदी एशियाई अमेरिकी ऐसे हैं, जिनके पास कोई सेविंग्स नहीं है. जबकि, गरीबी रेखा से ऊपर रहने वाले 40 फीसदी एशियाई अमेरिकी सेविंग्स नहीं कर पाते हैं. इतना ही नहीं, एशियाई मूल के 38 फीसदी वयस्क ऐसे हैं जो खाने के लिए फूड बैंक और चैरिटेबल ट्रस्ट पर निर्भर हैं. 

कब होगा सपना पूरा?

हर साल एशियाई मुल्कों से लाखों लोग अपने सपने पूरा करने के लिए अमेरिका जाते हैं. लेकिन रिसर्च बताती है कि 47 फीसदी नागरिकों को लगता है कि यहां आकर वो अपने सपने कभी पूरे नहीं कर सकते. जबकि, एशियाई मूल के 15 फीसदी लोगों को लगता है कि उन्हें जो चाहिए था, वो मिल गया. वहीं, 36 फीसदी का मानना है कि वो अपने सपनों को पूरा करने के रास्ते पर हैं.

एशियाई मूल के 91 फीसदी लोग मानते हैं कि अगर उन्हें अपनी मर्जी से जीने को मिल जाए, तो ये उनके लिए सपना पूरा होने जैसा है. जबकि, 90 फीसदी लोगों का मानना है कि आराम से रिटायर होने को सपना पूरा होना मानते हैं.

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दो करोड़ से ज्यादा एशियाई-अमेरिकी

अनुमान है कि अमेरिका में 2.35 करोड़ लोग एशियाई मूल के हैं. सबसे ज्यादा 52 लाख नागरिक चीनी मूल के हैं. दूसरे नंबर पर भारतवंशी हैं. अमेरिका में भारतवंशियों की आबादी लगभग 48 लाख है. इनमें 16 लाख से ज्यादा वीजा होल्डर हैं. जबकि 10 लाख से ज्यादा ऐसे हैं जिनका जन्म ही अमेरिका में हुआ है.

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