चीन की दादागीरी का काउंटर बैलेंस तैयार! भारत-न्यूजीलैंड के बीच 18 बड़े समझौते

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान दोनों देशों ने 10 एमओयू और 8 बड़े ऐलान किए. रक्षा, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कृषि, शिक्षा और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर हुए ये समझौते दोनों देशों के रिश्तों को नई मजबूती देंगे. इन्हें चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की दिशा में भी अहम कदम माना जा रहा है.

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पीएम नरेंद्र मोदी पहली बार न्यूजीलैंड पहुंचे थे. (Photo- PTI) पीएम नरेंद्र मोदी पहली बार न्यूजीलैंड पहुंचे थे. (Photo- PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:59 AM IST

करीब 40 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का न्यूजीलैंड दौरा दोनों देशों के रिश्तों के लिए ऐतिहासिक साबित हुआ. ऑकलैंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री की मुलाकात के बाद दोनों देशों ने कुल 18 बड़े समझौतों और ऐलानों पर सहमति जताई. इनमें 10 एमओयू और 8 बड़े ऐलान शामिल हैं. इन फैसलों से भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों को अब स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा मिल गया है. रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, कृषि, शिक्षा, खेल और संस्कृति जैसे कई क्षेत्रों में अब दोनों देश मिलकर काम करेंगे. इसे इंडो-पैसिफिक में चीन के बढ़ते प्रभाव का काउंटरबैलेंस भी माना जा रहा है.

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सबसे अहम समझौते रक्षा और समुद्री सुरक्षा को लेकर हुए. भारत और न्यूजीलैंड की सेनाएं अब समुद्री सुरक्षा, जानकारी साझा करने और संयुक्त अभ्यास में साथ काम करेंगी. दोनों देशों ने समुद्र से जुड़े नक्शे और हाइड्रोग्राफी डेटा साझा करने पर भी सहमति दी है. इससे समुद्री रास्तों की सुरक्षा और बेहतर होगी.

एक और समझौते के तहत दोनों देशों की नौसेनाएं जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे को लॉजिस्टिक सपोर्ट भी दे सकेंगी.

आतंकवाद और आपदा से मिलकर लड़ेंगे

भारत और न्यूजीलैंड ने आतंकवाद के खिलाफ एक संयुक्त कार्य समूह बनाने का फैसला किया है. दोनों देश आतंकियों से जुड़ी जानकारी साझा करेंगे और मिलकर रणनीति बनाएंगे. आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने समझौता किया है. भूकंप, सुनामी और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अनुभव और तकनीक साझा की जाएगी.

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कृषि और डेयरी में मिलेगा फायदा

कृषि और डेयरी सेक्टर में भी सहयोग बढ़ाया जाएगा. दोनों देश नई तकनीक, रिसर्च और बेहतर खेती के तरीके साझा करेंगे. इसके अलावा कीवीफ्रूट एक्शन प्लान भी शुरू किया गया है. नागालैंड और उत्तराखंड में कीवी के दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाए जाएंगे, जहां किसानों को नई तकनीक और प्रशिक्षण मिलेगा.

पर्यटन, खेल और संस्कृति को बढ़ावा

दोनों देशों ने पर्यटन बढ़ाने के लिए नया समझौता किया है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग एक-दूसरे के देश घूमने जाएं. खेल के क्षेत्र में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग, स्पोर्ट्स साइंस और स्पोर्ट्स मेडिसिन पर साथ काम होगा.

गुजरात के लोथल में बन रहे नेशनल मैरिटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के विकास में भी न्यूजीलैंड सहयोग करेगा. साथ ही कला, संस्कृति और विरासत को बढ़ावा देने के लिए भी दोनों देशों ने समझौता किया है.

रिश्ते बने स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप

इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि दोनों देशों के रिश्तों को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा मिलना है. अब भारत और न्यूजीलैंड रक्षा, व्यापार, कृषि, शिक्षा, संस्कृति और इंडो-पैसिफिक जैसे कई क्षेत्रों में लंबे समय तक साथ काम करेंगे.

2030 तक व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य

दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है. इसे भविष्य में मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA की दिशा में भी बड़ा कदम माना जा रहा है.

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इंडो-पैसिफिक में बढ़ेगा सहयोग

भारत और न्यूजीलैंड अब इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा पर मिलकर काम करेंगे.

न्यूजीलैंड ने भारत की Indo-Pacific Oceans Initiative (IPOI) में भी शामिल होने का ऐलान किया है. दोनों देश समुद्र में अवैध मछली पकड़ने जैसी गतिविधियों के खिलाफ भी साथ काम करेंगे.

स्वच्छ ऊर्जा और रिसर्च में साझेदारी

न्यूजीलैंड अब Global Biofuels Alliance का हिस्सा बनेगा. इससे स्वच्छ ऊर्जा और जैव ईंधन के क्षेत्र में दोनों देशों का सहयोग बढ़ेगा. इसके अलावा अंटार्कटिका रिसर्च, समुद्री विज्ञान, खाद्य प्रौद्योगिकी, छात्र आदान-प्रदान और रिसर्च के क्षेत्र में भी कई नए समझौते हुए हैं.

चीन को लेकर क्यों अहम है यह साझेदारी?

विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा, समुद्री सुरक्षा, लॉजिस्टिक सपोर्ट और इंडो-पैसिफिक में बढ़ते सहयोग से भारत और न्यूजीलैंड की साझेदारी और मजबूत होगी. ऐसे समय में जब चीन इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है, दोनों देशों के ये समझौते एक मजबूत रणनीतिक संतुलन बनाने की दिशा में अहम कदम माने जा रहे हैं. इससे समुद्री सुरक्षा, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है.

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