ट्रंप के सपोर्टर हंगरी के PM को मिली करारी चुनावी शिकस्त, 16 साल बाद सत्ता से बेदखल हुए ओर्बन

हंगरी के हालिया चुनाव में 16 सालों से सत्ता में रहे विक्टर ओर्बन को युवा नेता पीटर मग्यार की तिस्जा पार्टी ने करारी शिकस्त दी है. इस चुनाव में रिकॉर्ड मतदान हुआ और तिस्जा पार्टी ने 199 सीटों वाली विधायिका में 138 सीटें जीतकर दो-तिहाई से ज्यादा बहुमत हासिल किया है.

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ओर्बन को मग्यार ने हराया है. (Picture: AP) ओर्बन को मग्यार ने हराया है. (Picture: AP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 7:24 AM IST

हंगरी के चुनावी नतीजों में दिग्गज राष्ट्रवादी नेता विक्टर ओर्बन को करारी हार का सामना करना पड़ा. पिछले 16 सालों से सत्ता पर काबिज ओर्बन को केंद्र-दक्षिणपंथी 'तिस्जा' पार्टी के युवा नेता पीटर मग्यार ने करारी शिकस्त दी है.

इस बार चुनाव में रिकॉर्ड मतदान हुआ है. पीटर मग्यार की पार्टी ने हंगरी की 199 सीटों वाली विधायिका में शानदार बहुमत हासिल किया है. लगभग मतों की गिनती के बाद, तिस्जा पार्टी 138 सीटें जीतती नजर आ रही है. ये दो-तिहाई बहुमत से भी ज्यादा है.

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जीत के बाद पीटर मग्यार ने बुडापेस्ट में डेन्यूब नदी के किनारे जमा हजारों समर्थकों को संबोधित किया. इस दौरान उन्होंने कहा, 'हमने कर दिखाया. तिस्जा और हंगरी ने ये चुनाव जीत लिया है.

मग्यार ने कहा कि जनता ने उनके साथ मिलकर ओर्बन की व्यवस्था को बदल दिया है और हंगरी को आजाद कराया है. मग्यार ने इस दौरान चेतावनी देते हुए कहा, जिन्होंने हमारे देश के साथ धोखाधड़ी की है, उन्हें इसका जवाब देना होगा.

ओर्बन की हार की वजह

विक्टर ओर्बन को यूरोप और अमेरिका के रूढ़िवादी एक 'अनुदार लोकतंत्र' के मास्टरमाइंड के रूप में देखा जाता है. हालांकि इस बार वो जनता का भरोसा जीतने में नाकाम रहे. इसकी वजह आर्थिक सुस्ती और अंतरराष्ट्रीय अलगाव को बताया जा रहा है.

मग्यार इस चुनाव में एक बड़ा विकल्प बनकर उभरे. उन्होंने दावा किया था कि ओर्बन की नीतियों ने हंगरी को यूरोपीय मुख्यधारा से दूर कर दिया है. अब मग्यार की जीत से हंगरी में लोकतांत्रिक सुधारों का रास्ता खुलता नजर आ रहा है. यूरोपीय संघ लंबे समय से इसकी मांग भी कर रहा था.

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वहीं ओर्बन ने भी अपनी हार मानी और फिदेज अभियान कार्यालय में कहा, चुनावी नतीजे हमारे लिए दर्दनाक हैं, लेकिन साफ हैं.' विक्टर ओर्बन हंगरी की सत्ता पर 16 सालों से अपना दबदबा बनाए हुए थे. 

यूक्रेन के लिए 90 अरब यूरो के कर्ज का रास्ता साफ होगा!

कई यूरोपीय नेताओं को उम्मीद है कि अब यूरोपीय संघ के भीतर हंगरी की टकराव वाली भूमिका खत्म होगी. इससे युद्ध से प्रभावित यूक्रेन के लिए 90 अरब यूरो ($105 बिलियन) के उस कर्ज का रास्ता साफ हो सकता है, जिसे ओर्बन ने रोक रखा था.

यह भी पढ़ें: रूस से युद्ध के बीच यूक्रेन को हंगरी की बड़ी धमकी... रोका 90 अरब यूरो का लोन, रखी ये शर्त

यूरेशिया ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर मुजतबा रहमान ने कहा,'यूक्रेन को लेकर मग्यार 90 अरब यूरो की सहायता यूक्रेन तक पहुंचाने का रास्ता साफ करने के लिए सहमत होंगे. वो चुनाव से पहले बेहद सतर्क थे, लेकिन अब फिदेज मतदाताओं को खुश करने की जरूरत नहीं है, इसलिए हमें लगता है कि हंगरी ज्यादातर मामलों पर सावधानीपूर्वक यूरोपीय मुख्यधारा की ओर कदम बढ़ाएगा.'

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