इजरायल के खिलाफ एकजुट हुआ यूरोप! 24 घंटे में चार देशों के बड़े फैसले से भड़के नेतन्याहू

ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने फिलिस्तीन को स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दी है और सोमवार को अन्य छह देश ऐसा करने जा रहे हैं. इस कदम से इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू बेहद नाराज हैं और उन्होंने इसे आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला बताया है.

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इजरायल के खिलाफ यूरोप एकजुट हो गया है (File Photo: Reuters) इजरायल के खिलाफ यूरोप एकजुट हो गया है (File Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 11:35 PM IST

मध्य पूर्व में जारी गाजा संघर्ष ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी हिला दिया है और लगभग पूरा यूरोप इजरायल के खिलाफ एकजुट हो गया है. पिछले 24 घंटे में यूरोप के बड़े देशों ने कुछ ऐसा किया है जिसने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की चिंता बढ़ा दी है. गाजा में लगातार बढ़ती हिंसा और मानवीय संकट को देखते हुए चार देशों- ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने रविवार को फिलिस्तीन को आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र राज्य के रूप में मान्यता दे दी है. फ्रांस और सऊदी अरब मिलकर सोमवार को संयुक्त राष्ट्र का सम्मेलन बुला रहे हैं जिसमें यूरोप के छह अन्य देश फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले हैं.

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संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में जो छह देश फिलिस्तीन को मान्यता देने वाले हैं, उनमें शामिल हैं- फ्रांस, बेल्जियम, लक्जमबर्ग, एंडोर, माल्टा, सैन मैरीनो. संयुक्त राष्ट्र के पांच स्थायी सदस्य हैं- अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, चीन और रूस. फ्रांस की मान्यता के साथ ही अमेरिका एकलौता ऐसा स्थायी सदस्य रह जाएगा जिसने फिलिस्तीन को अब तक मान्यता नहीं दी है. 

संयुक्त राष्ट्र के 193 देशों में से तीन चौथाई देश फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं. अब अमेरिका पर भी अपने यूरोपीय सहयोगियों का दबाव बढ़ता जा रहा है. 

ब्रिटेन समेत चार देशों ने फिलिस्तीन को मान्यता देने का यह कदम ऐसे समय में उठाया है जब गाजा में इजरायल के युद्ध की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है.  लाखों लोग बेघर हो चुके हैं और 68,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की जान जा चुकी है. गाजा में अकाल घोषित हो चुका है और अंतरराष्ट्रीय संगठनों की रिपोर्ट्स में चेतावनी दी गई है कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो यह मानवीय संकट और गहरा सकता है.

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ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगान की पहल

सबसे पहले ब्रिटेन ने आधिकारिक घोषणा करते हुए कहा कि फिलिस्तीन को मान्यता देना अब शांति बहाल करने के प्रयासों के लिए बेहद जरूरी है. ब्रिटिश विदेश मंत्री ने यवेट कूपर ने एक बयान में कहा, 'हम चाहते हैं कि फिलिस्तीनी लोगों को भी वही अधिकार और पहचान मिले जो हर संप्रभु राष्ट्र को मिलती है. यह कदम स्थायी शांति की दिशा में एक अहम पड़ाव होगा.'

ब्रिटेन के तुरंत बाद कनाडा ने भी इसी रुख को अपनाया और ऐलान किया कि वह फिलिस्तीन को राज्य का दर्जा देगा. कनाडा ने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक निर्णय नहीं, बल्कि गाजा में हो रहे अत्याचारों को देखते हुए उठाया गया नैतिक कदम है.

इसके बाद ऑस्ट्रेलिया और पुर्तगाल ने भी फिलिस्तीन को मान्यता देने का ऐलान कर दिया. पुर्तगाल के प्रधानमंत्री ने बयान में कहा कि अब दुनिया को सिर्फ बयानबाजी नहीं, बल्कि ठोस कदम उठाने होंगे.

नेतन्याहू का कड़ा विरोध

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस फैसले से बेहद नाराज हैं. उन्होंने इन देशों पर आरोप लगाया कि वे 'आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं'.

नेतन्याहू ने बयान में कहा, 'फिलिस्तीन को देश का दर्जा देना उन ताकतों को इनाम देने जैसा है जो निर्दोष नागरिकों पर हमले कर रही हैं. यह कदम न सिर्फ इजरायल बल्कि पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए खतरा है.'

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उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि 'यार्डन नदी के पश्चिम में फिलिस्तीन की स्थापना कभी नहीं होगी'. उनके कहने का मतलब था कि विवादित क्षेत्रों में इजरायल अपना नियंत्रण बनाए रखेगा.

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