बांग्लादेश में बाढ़ से तबाही, रोहिंग्या शरणार्थी शिविर में भूस्खलन, 54 की मौत... 10 लाख से ज्यादा लोग फंसे

बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी इलाकों में लगातार भारी बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन में कम से कम 54 लोगों की जान चली गई है. आपदा प्रबंधन मंत्रालय ने सोमवार को ये जानकारी दी.

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बांग्लादेश में कई इलाकों में भरा बाढ़ का पानी. (Image: AFP) बांग्लादेश में कई इलाकों में भरा बाढ़ का पानी. (Image: AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 7:05 AM IST

बांग्लादेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के कारण कम से कम 54 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है. अधिकारियों का कहना है कि इस प्राकृतिक आपदा से तटीय ज़िला कॉक्स बाज़ार सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है, जहां पिछले हफ़्ते रोहिंग्या शरणार्थी कैंपों में भूस्खलन से बच्चों समेत कई लोगों की मौत हो गई थी.

बांग्लादेश के आपदा प्रबंधन मंत्रालय ने सोमवार 13 जुलाई को दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र में लगातार आ रही भारी बाढ़ और विनाशकारी भूस्खलन के कारण कम से कम 54 लोगों की मौत होने की आधिकारिक पुष्टि की है. इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे क्षेत्र में जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है और कई समुदायों का संपर्क पूरी तरह से टूट गया है.

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रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में धंसी मिट्टी

उन्होंने बताया कि बाढ़ से कई क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, लेकिन तटीय जिला कॉक्स बाजार सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां पिछले सप्ताह मूसलाधार बारिश के बाद हुए भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है. रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में मिट्टी धंसने की वजह से बच्चों समेत कई लोगों की मलबे में दबकर मौत हो गई है. प्रभावित इलाकों में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है.

कई इलाकों में बदतर हो चुके हैं हालात

क्षेत्र में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अनेक गांवों में अभी भी कमर तक पानी भरा हुआ है. कुछ निचले इलाकों में तो बाढ़ का स्तर इतना ज्यादा बढ़ गया है कि पानी लोगों के टिन से बने घरों की छतों के भी ऊपर तक पहुंच गया है, जिससे लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश में भटक रहे हैं.

आपदा प्रबंधन मंत्रालय के अनुसार, इस भीषण बाढ़ के कारण 10 लाख से ज्यादा लोग अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए हैं. बाढ़ पीड़ितों ने नाराजगी जताते हुए शिकायत की है कि प्रशासन की ओर से मिलने वाली राहत सहायता बेहद धीमी गति से पहुंच रही है और उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने के लिए बिल्कुल नाकाफी है.

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