अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए अंतरिम शांति समझौते के बाद अब दोनों देशों के बीच पहली बड़ी वार्ता स्विट्जरलैंड में होने जा रही है. इस बैठक में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी. माना जा रहा है कि यह बातचीत तय करेगी कि दोनों देशों के बीच बनी सहमति आगे बढ़ेगी या फिर से जंग होगी.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक पहुंचे हैं, जहां रविवार को पहले दौर की वार्ता होनी है. दूसरी तरफ ईरान की तरफ से विदेश मंत्री अब्बास अराघची, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और केंद्रीय बैंक प्रमुख अब्दोलनासेर हेम्मती बातचीत में हिस्सा लेंगे. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर भी मध्यस्थ देश के प्रतिनिधि के तौर पर वहां पहुंचे हैं.
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रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि पहले दौर की बातचीत का नतीजा ऐसा हो कि ईरान परमाणु साइट्स की जांच की इजाजत दे. इसके लिए संयुक्त राष्ट्र की टीम ईरान जाएगी और उन साइट्स का इंस्पेक्शन करेगी जहां दावा है कि ईरान ने संवर्धित यूरेनियम छिपा रखा है. ये वही परमाणु साइट्स हैं जहां पहले अमेरिका और इजरायल ने हमले किए थे. जून 2025 के बाद से संयुक्त राष्ट्र के इंसपेक्टर इन साइट्स का दौरा नहीं कर पाए हैं.
ईरान को कतर में फ्रीज फंड का मिलेगा एक्सेस
अमेरिका इसके बदले में ईरान को राहत देने के लिए तैयार दिख रहा है. अगर ईरान राजी होता है तो उसे कतर में फंसे 6 अरब डॉलर के फंड का एक्सेस मिल सकता है. हालांकि इस रकम का इस्तेमाल सिर्फ मानवीय जरूरतों, जैसे खाद्य पदार्थ और दवाओं की खरीद के लिए किया जा सकेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के बीच हुए अंतरिम समझौते हुए हैं. इसमें दोनों पक्षों ने बताचीत कर मामले को पूरी तरह निपटाने के लिए 60 दिनों का वक्त तय किया है. इस दौरान परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में ढील, लेबनान सीजफायर और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विवादित मुद्दों का समाधान तलाशने की कोशिश होगी.
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स्विट्जरलैंड में क्या बातचीत होगी? जेडी वेंस ने बताया
जेडी वेंस ने रवाना होने से पहले कहा कि उनका लक्ष्य बातचीत के लिए एक ठोस ढांचा तैयार करना है. उन्होंने उम्मीद जताई कि परमाणु मुद्दे और इजरायल-लेबनान संघर्ष पर प्रगति हो सकती है. वेंस के मुताबिक, हालात सुर्खियों में जितने खराब दिख रहे हैं, वास्तविकता में तनाव कुछ कम हुआ है.
हालांकि, बातचीत के सामने चुनौतियां भी हैं. अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट्स में आशंका जताई गई है कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस प्रक्रिया में बाधा डाल सकते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ अभियान जारी रखने के लिए नेतन्याहू पर घरेलू राजनीतिक दबाव है और वह किसी ऐसे समझौते से बचना चाहेंगे जो इजरायली सेना की वापसी का रास्ता खोले.
ऐसे में स्विट्जरलैंड की यह बैठक सिर्फ परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा नहीं, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की दिशा तय करने वाली अहम कड़ी मानी जा रही है. अगर दोनों पक्ष शुरुआती भरोसा बनाने में सफल रहते हैं, तो आने वाले 60 दिन क्षेत्र की राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं.
आजतक इंटरनेशनल डेस्क