पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस पर कब्जे की लड़ाई अब पार्टी के पैसों के लेन-देन (वित्तीय मामलों) तक पहुंच गई है. पार्टी के ट्रेजरर अरूप बिस्वास ने HDFC बैंक को एक चिट्ठी लिखी है. इस चिट्ठी में उन्होंने मांग की है कि पार्टी के बैंक खातों से किसी भी तरह के डेबिट ट्रांजेक्शन और खातों को संभालने के नियमों में किसी भी बदलाव पर रोक लगा दी जाए.
अरूप बिस्वास ने अपनी चिट्ठी में पार्टी के अंदर चल रहे गंभीर झगड़े का जिक्र किया है. उन्होंने कहा है कि संगठन को कौन संभालेगा (नियंत्रण किसके हाथ में होगा), इसे लेकर अभी स्थिति साफ नहीं है. इसलिए, जब तक सब कुछ तय नहीं हो जाता, तब तक बैंक खातों में किसी भी तरह के बदलाव पर रोक लगा दी जानी चाहिए.
ये बात ऐसे समय में सामने आई है जब टीएमसी के नाम-निशान पर कब्जे की लड़ाई छिड़ी हुई है. बागी गुट ने अपने धड़े को असली टीएमसी घोषित कर दिया है. बागी गुट को असली टीएमसी मानते हुए विधानसभा स्पीकर ने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता भी दे दी है. टीएमसी के लोकसभा सदस्यों ने भी बगावत कर एनसीपीआई में विलय कर लिया है.
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TMC ने अरूप बिस्वास के पद पर उठाए सवाल
हालांकि, टीएमसी ने अरूप बिस्वास के इस दावे को गलत बताया है. पार्टी का कहना है कि अरूप बिस्वास अब पार्टी के ट्रेजरर नहीं हैं. पार्टी के मुताबिक, 5 जून को संगठन में हुए बदलावों के बाद सुभाषीष चक्रवर्ती को नया ट्रेजरर बनाया गया था. इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी की सभी पुरानी कमेटियों को भंग करके संगठन में बड़े फेरबदल का एलान किया था.
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इसके बाद ट्रेजरर के पद को लेकर विवाद और बढ़ गया है. एक तरफ अरूप बिस्वास ने बैंक खातों के लेन-देन को रुकवाने के लिए कदम उठाया है, तो दूसरी तरफ पार्टी के बड़े नेताओं का कहना है कि अब ये जिम्मेदारी उनके पास नहीं, बल्कि किसी दूसरे नेता के पास है.
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