'मुगलों-पठानों के नाम पर कोई सड़क नहीं होगी...', सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने पर शुभेंदु और ऋतब्रत में बहस

पश्चिम बंगाल के नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने सरकार के फैसले की आलोचना की. जवाब में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ऋतब्रत को उनकी कथित कम्युनिस्ट विचारधारा वाली टिप्पणियों के लिए निशाना बनाया. उन्होंने कहा, "कोलकाता में मुगलों और पठानों के नाम पर कोई नाम नहीं रखा जाएगा."

Advertisement
नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने की आलोचना की. (Photo: ITG) नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने की आलोचना की. (Photo: ITG)

अनुपम मिश्रा

  • कोलकाता,
  • 23 जून 2026,
  • अपडेटेड 9:20 PM IST

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि इस कोलकाता में कोई मुगल-पठान नाम नहीं रहेगा. भगिनी निवेदिता के अलावा किसी अन्य विदेशी के नाम पर गली का नाम रखने के बारे में आपको सोचना पड़ेगा. इसके अलावा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में सड़कों का नाम बदलने के लिए एक समिति का गठन किया है. उन्होंने मंगलवार को विधानसभा के बजट सत्र में घोषणा की कि स्वामी प्रदीपानंद महाराज समिति के अध्यक्ष होंगे. 

Advertisement

सीएम ने कहा कि यह समिति नए नाम का मूल्यांकन करेगी. इस समिति को कोई भी व्यक्ति या संस्था अपना प्रस्ताव दे सकता है. 

मंगलवार को विधानसभा की कार्यवाही के दौरान विपक्षी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलने की आलोचना की. इसके जवाब में मुख्यमंत्री शुवेंदु अधिकारी ने ऋतब्रत पर कम्युनिस्ट मानसिकता रखने का आरोप लगाते हुए कहा, "कोलकाता में मुगलों और पठानों के नाम पर कोई नाम नहीं रखा जाएगा."

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल सरकार ने कोलकाता की सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी एवेन्यू रख दिया है. ये सड़क 'बंगाल के कसाई' हुसैन सुहरावर्दी के नाम पर थी. 

सुहरावर्दी के नाम पर कोई सड़क गली नहीं

सीएम शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में कहा, "सुहरावर्दी के नाम पर कोई गली नहीं रखी जाएगी. जब मैं पार्क सर्कस सेवन पॉइंट्स से गुजरता हूं, तो मुझे सुहरावर्दी नाम की एक गली दिखती है. वह नाम नहीं रहेगा. अगर आपको लगता है कि डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर किसी सच्चे देशभक्त को सम्मानित करने की जरूरत है, तो कहिए मैं उन्हें सम्मानित करूंगा." 

Advertisement

यह भी पढ़ें: बुचर ऑफ बंगाल पर नया विवाद! एक सड़क, तीन किरदार… फिर चर्चा में हसन, हुसैन सुहरावर्दी और गोपाल पाठा

सीएम शुभेंदु ने कहा कि बंगाल के कसाई हुसैन सुहरावर्दी का समर्थन करने का तो सवाल ही नहीं उठता. इस सदन में खड़े होकर 1946 के दंगों का खून उनके हाथों पर लगा था, जिसका रिकॉर्ड इसी सदन में दर्ज है. ज्योति बसु ने कहा कि बंगाल के इस कसाई ने कम से कम 20,000 लोगों को मार डाला था. लेकिन समस्या यह है कि इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करने से ही समस्या पैदा होती है.

बता दें कि हसन सुहरावर्दी 8 अगस्त 1930 से 7 अगस्त 1934 तक कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति रहे. 

अविभाजित बंगाल के प्रधानमंत्री हसन सुहरावर्दी का जिक्र आने पर सीएम शुभेंदु ने कहा कि मुझे पता चला कि एक और सुहरावर्दी हैं. लेकिन सुनिए, स्वतंत्रता सेनानी वीणा बसु, जिन्होंने पांच गोलियां चलाईं, उन्हें तत्कालीन कुलपति ने अंग्रेजों के हवाले कर दिया. इसके लिए अंग्रेजों ने उन्हें नाइट की उपाधि दी थी. इस कोलकाता में कोई मुगल-पठान नाम नहीं रहेगा. भगिनी निवेदिता के अलावा किसी अन्य विदेशी के नाम पर गली का नाम रखने के बारे में आपको सोचना पड़ेगा.'

नामकरण पर शुभेंदु-ऋतब्रत भिड़े

Advertisement

सरकार के फैसले से जब नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने आपत्ति जताई तो सीएम शुभेंदु ने कहा कि आप हमारी बंगाली संस्कृति और परंपरा को मिटा नहीं सकते. आपका भाषण पश्चिम बंगाल के किसी पार्टी नेता जैसा नहीं था, बल्कि एक कम्युनिस्ट जैसा था. मैं आपसे कोई सलाह नहीं लूंगा.

गौरतलब है कि डेढ़ महीने के भीतर ही कोलकाता के पार्क सर्कस स्थित सेवन पॉइंट्स से डॉन बॉस्को सर्कल तक जाने वाली 500 मीटर लंबी सड़क, जिसे सुहरावर्दी एवेन्यू के नाम से जाना जाता था, का नाम बदल दिया गया है.
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »