शुभेंदु सरकार आज विधानसभा में पेश करेगी UCC बिल, जानिए टीएमसी के बागी गुट का प्लान

बंगाल विधानसभा में पेश होने जा रहे यूसीसी विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों के लिए सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होने वाला एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है.

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यूसीसी बिल पर शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला (Photo: PTI) यूसीसी बिल पर शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला (Photo: PTI)

aajtak.in

  • कोलकाता,
  • 29 जून 2026,
  • अपडेटेड 1:38 AM IST

पश्चिम बंगाल की शुभेंदु सरकार सोमवार को यूसीसी विधेयक विधानसभा में पेश करने जा रही है. मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि उनकी सरकार धर्मांतरण के खिलाफ सख्त कानून बनाएगी. साथ ही राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करेगी. इससे राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है.

अब सबकी नजरें तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों पर हैं. दरअसल, यूसीसी विधेयक पेश करने के साथ यह मुकाबला केवल सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच नहीं होगा, बल्कि टीएमसी के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच भी है. दोनों गुट इस विधेयक के खिलाफ सबसे मुखर आवाज बनने की कोशिश करेंगे.

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यह बहस टीएमसी के दो गुटों- पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के लिए पहली बड़ी सियासी परीक्षा है. पार्टी पर नियंत्रण को लेकर संघर्ष अब विधानसभा के भीतर भी दिखाई देने की संभावना है.

दोनों गुटों ने बनाई अलग-अलग रणनीति
दोनों गुटों ने यूसीसी विधेयक का विरोध करने का संकेत दिया है और अलग-अलग रणनीति बनाई है. दोनों गुट अलग-अलग वक्ताओं और राजनीतिक तर्कों के जरिए इस बिल विरोध करेंगे. साथ ही राजनीतिक विरासत के असली प्रतिनिधि होने का दावा भी पेश करेंगे.

शुभेंदु सरकार की ओर से प्रस्तावित यूसीसी का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों के लिए सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होने वाला एक समान कानूनी ढांचा तैयार करना है.विधानसभा सूत्रों के अनुसार, सोमवार की कार्यवाही के दूसरे हिस्से में विधेयक पर चर्चा होगी. इसमें मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, विपक्ष के नेता और कई वरिष्ठ विधायक भाग लेंगे.

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ममता बनर्जी ने भी कर ली तैयारी
विधानसभा में स्पष्ट बहुमत होने के कारण बीजेपी सरकार के लिए विधेयक पारित कराना मुश्किल नहीं माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक दृष्टि से सदन में बहस काफी अहम होगी.

इस बीच ममता बनर्जी ने अपने सहयोगियों को विधानसभा के अंदर और बाहर इस विधेयक का जोरदार विरोध करने का निर्देश दिया है. उनका कहना है कि यह मुद्दा संवैधानिक सिद्धांतों, सामाजिक सहमति और भारत की बहुलतावादी पहचान से जुड़ा हुआ है।

ममता गुट के नेताओं ने बीजेपी पर आरोप लगाया है कि वह यूसीसी को कानूनी सुधार के बजाय राजनीतिक ध्रुवीकरण का माध्यम बना रही है. पार्टी के वरिष्ठ नेता सोवनदेब चट्टोपाध्याय को विधेयक के विरोध में प्रमुख वक्ताओं में शामिल किया जा सकता है, जबकि कुणाल घोष भी चर्चा में हिस्सा ले सकते हैं.

ऋतब्रत गुट की ये रणनीति
दूसरी ओर, ऋतब्रत बनर्जी का गुट भी अपनी अलग रणनीति तैयार कर चुका है. उन्होंने पहले ही सरकार द्वारा विधेयक को जल्दबाजी में लाने पर सवाल उठाए हैं. ऋतब्रत का कहना है कि यूसीसी जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक चर्चा और सभी पक्षों से परामर्श जरूरी है.

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