केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के मौके पर पश्चिम बंगाल पहुंचे. उन्होंने इस दौरान एक भव्य कार्यक्रम को संबोधित किया. इस दौरान अमित शाह ने दावा किया कि CM शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल में 'सोनार बांग्ला' का संकल्प साकार हो रहा है.
गृह मंत्री ने इस ऐतिहासिक मौके पर पश्चिम बंगाल में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फीट ऊंची भव्य प्रतिमा की आधारशिला भी रखी. उन्होंने राज्य सरकार की नीतियों को डॉ. मुखर्जी की वैचारिक विरासत का विस्तार बताया.
अमित शाह ने इस दौरान नागरिकता, राष्ट्रीय अखंडता, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दों को उनके विजन से जोड़ा.
बंगाल में UCC कमेटी का गठन और घुसपैठ पर एक्शन
अमित शाह ने अपने संबोधन में राज्य की जनता के लिए कई बड़े ऐलान किए. उन्होंने कहा, 'हमने बंगाल चुनाव के दौरान अपने संकल्प पत्र में जो भी वादे किए थे, उन्हें हम तेजी से पूरा कर रहे हैं. राज्य में UCC को लागू करने का रास्ता साफ करने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन कर दिया गया है.'
इसके साथ ही उन्होंने सुरक्षा और घुसपैठ के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि बंगाल में अवैध घुसपैठियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. शाह ने गरजते हुए कहा, 'हम हर एक घुसपैठिए की पहचान करेंगे और देश को पूरी तरह सुरक्षित बनाएंगे.'
महिलाओं की सुरक्षा पर बात करते हुए अमित शाह ने कहा कि राज्य में नवगठित 'दुर्गा सुरक्षा स्क्वॉड' महिलाओं की सुरक्षा को और मजबूत करेगा. इसके अलावा, उन्होंने 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक व्यवस्था रखरखाव (संशोधन) विधेयक, 2026' का जिक्र किया. उन्होंने कहा, 'हमने अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा किया था और यह कानून उसी दिशा में हमारा पहला कदम है.'
CAA पर बड़ा आश्वासन
गृह मंत्री ने पड़ोसी देशों से आए पीड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देने के वादे पर भी बात की. उन्होंने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत पात्र शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया को और तेज किया जाएगा.
शाह ने कहा, 'आज मैं इस मंच से कहना चाहता हूं कि हम जल्द ही नागरिकता देने की बची हुई औपचारिकताओं को भी पूरा कर लेंगे, क्योंकि अब पश्चिम बंगाल में BJP की सरकार है.'
नेहरू-लियाकत समझौते और डॉ. मुखर्जी के इस्तीफे का जिक्र
अमित शाह ने अपने संबोधन में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के ऐतिहासिक फैसलों को याद किया. उन्होंने स्वतंत्र भारत के पहले मंत्रिमंडल से डॉ. मुखर्जी के इस्तीफे और नेहरू-लियाकत समझौते पर बात की.
शाह ने कहा, 'मेरे जैसे कई लोगों के लिए आज का दिन बेहद भावुक करने वाला है. डॉ. मुखर्जी ने कश्मीर को भारत में मिलाने के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी. मैंने उनका वो इस्तीफा पत्र देखा है जो उन्होंने पहले मंत्रिमंडल से दिया था. जब डॉ. मुखर्जी ने नेहरू-लियाकत समझौते का अध्ययन किया, तो उन्होंने पाया कि इसमें भारत में रहने वाले मुसलमानों की बात तो थी, लेकिन पाकिस्तान और बांग्लादेश (तब पूर्वी पाकिस्तान) में रहने वाले हिंदुओं की चिंताओं का कोई समाधान नहीं था. उन्होंने इसे पूरी तरह एकतरफा माना और कैबिनेट से इस्तीफा देने का फैसला किया.'
शाह ने आगे कहा कि आज उसी विचारधारा की सरकार ने पाकिस्तान में प्रताड़ित हुए हिंदुओं को सम्मान देने के लिए CAA कानून लागू किया है. उन्होंने कांग्रेस पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि साल 1953 में कश्मीर में डॉ. मुखर्जी की रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई मौत की कांग्रेस ने कभी ठीक से जांच नहीं होने दी.
शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनेगा 'सोनार बांग्ला'
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की तारीफ करते हुए अमित शाह ने कहा, 'मुझे पूरा भरोसा है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में 'सोनार बांग्ला' के निर्माण का हमारा संकल्प जरूर पूरा होगा.'
उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी द्वारा स्थापित जनसंघ आज बीजेपी के रूप में देश के दो-तिहाई से ज्यादा भौगोलिक क्षेत्र और आबादी में उनकी नीतियों के मुताबिक सरकार चला रहा है. डॉ. मुखर्जी मानते थे कि आजाद भारत का विकास मॉडल पश्चिम से उधार लिया हुआ नहीं होना चाहिए, बल्कि उसकी नीतियां भारत की अपनी मिट्टी की खुशबू से तैयार होनी चाहिए.
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अमित शाह ने आखिर में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी सिद्धांत को दिल से लगाकर भारत को साल 2047 तक पूर्ण विकसित बनाने की राह पर है. उन्होंने कहा कि पीएम मोदी हमारी संस्कृति का परचम दुनिया में सबसे ऊंचा लहराने के सफर पर आगे बढ़ रहे हैं.
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