उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में श्रम विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीम ने सोमवार को एक बड़ी छापेमारी की है. टीम ने एक झोला बनाने वाली फैक्ट्री में चल रहे बंधुआ मजदूरी के बड़े खेल का भंडाफोड़ किया है.
इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान फैक्ट्री की ऊंची दीवारों के पीछे बंधक बनाकर रखे गए 13 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला गया है. ये मजदूर पिछले करीब दो साल से वहां कैद थे और नरक से बद्तर जिंदगी जी रहे थे.
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब एक मजदूर किसी तरह फैक्ट्री की सुरक्षा को चकमा देकर भाग निकला. उसने स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंचकर अधिकारियों को सारा माजरा सुनाया. इसके बाद ही पुलिस ने फैक्ट्री पर छापा मारा.
मोटी सैलरी का लालच देकर लाए गए थे मजदूर
फैक्ट्री की कैद से छूटे इन मजदूरों ने मालिकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मजदूरों ने बताया कि उन्हें अच्छे काम और मोटी तनख्वाह का लालच देकर यहां लाया गया था. लेकिन फैक्ट्री पहुंचते ही उनके मोबाइल फोन और आधार कार्ड छीन लिए गए.
मजदूरों ने बताया कि उन्हें उनके परिवारों से पूरी तरह काट दिया गया ताकि वो किसी से संपर्क न कर सकें. मजदूरों को भागने से रोकने के लिए फैक्ट्री परिसर में दो खूंखार पिटबुल कुत्ते भी पाले गए थे, जिन्हें देखकर मजदूर हमेशा डरे रहते थे.
24 घंटे में सिर्फ एक बार मिलती थी सूखी रोटी
पीड़ित मजदूरों के मुताबिक, उन्हें पैसे नहीं दिए जाते थे और खाने के नाम पर बहुत कम खाना दिया जाता था. उन्हें हर 24 घंटे में सिर्फ एक बार सूखी रोटी दी जाती थी. अगर कोई मजदूर इसका विरोध करता या वहां से भागने की कोशिश करता, तो उसे लाठियों-कोड़े से बेरहमी से पीटा जाता था.
कई मजदूरों के शरीर पर मारपीट के गहरे निशान भी मौजूद हैं. पुलिस ने मौके से मारपीट में इस्तेमाल होने वाली लाठियां और दूसरी चीजें बरामद कर ली हैं.
मामले में दो आरोपी गिरफ्तार
रेस्क्यू किए गए मजदूरों की पहचान रामू, विक्रम, नारायण, सीताराम, संतोष, शिवम जाटव, जगदीश, राजहंस, साहिल, रंजीत पासवान, दिलशाद, उज्ज्वल और सोनू चौहान के रूप में हुई है. ये मजदूर हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों और पड़ोसी देश नेपाल से लाए गए थे. इस मामले में पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों, शिवम त्यागी और प्रदीप बालियान को गिरफ्तार कर लिया है.
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पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या लंबे समय तक बंधक रहने के कारण कुछ मजदूरों की वहां मौत भी हुई थी. रेस्क्यू के बाद सभी मजदूरों का मेडिकल कराया गया. प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका माला पहनाकर स्वागत किया और उन्हें घर भेजने के पुख्ता इंतजाम किए और अब मामले की आगे की जांच की जा रही है.
संदीप सैनी