उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने गुरुवार को अपनी टीम का ऐलान कर दिया है. यूपी बीजेपी की इस नई कार्यकारिणी में 64 लोगों को जगह मिली है. सूबे के क्षेत्रीय अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री सहित अलग-अलग मोर्चे के अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं. टीम पंकज के जरिए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन ही नहीं साधा बल्कि 'मंडल और कंमडल' का समीकरण बनाया है.
यूपी बीजेपी में पंकज चौधरी को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही उनकी नई टीम बनाने की कवायद जारी ही थी. केंद्रीय नेतृत्व की ओर से मंजूरी मिलने के बाद टीएम का ऐलान कर दिया गया है.
उत्तर प्रदेश बीजेपी के सगंठन में 64 पाधिकारियों को शामिल गया है, जिसमें युवा और महिलाओं को खास तवज्जे दी गई है. इसके अलावा जाति समीकरण के लिहाज से देखें तो ओबीसी और दलितों का दबदबा है. वेस्ट से यूपी पूर्वांचल तक और अवध से लेकर काशी तक बीजेपी के क्षेत्रीय समीकरण ही नहीं बल्कि यूपी में 'मंडल और कमंडल’ के संतुलन को दर्शाता है.
बीजेपी की 'मंडल कममंडल' पॉलिटिक्स
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के अगुवाई में बनी टीम में 64 पदाधिकारियों जगह मिली है, जिसमें 6 क्षेत्रीय अध्यक्ष, 19 उपाध्यक्ष, 8 महामंत्री और 19 मंत्री बने हैं. इसके अलावा अलग-अलग मोर्चे के अध्यक्ष की भी नियुक्ति की गई है. टीएम पंकज में जिन 64 पदाधिकारियों को जगह मिली है, उसमें 47 फीसदी तो 41 फीसदी सामान्य वर्ग को जगह मिली है. इसके अलावा 12 फीसदी दलित और आदिवासी समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है.
यूपी की नई कार्यकारिणी में ओबीसी को सबसे अधिक तरजीह दी गई है. कुल 64 पदाधिकारियों में से 30 यानी 47 फीसदी सदस्य ओबीसी समाज से आते हैं. बीजेपी के 'मंडल और कमंडल' के संतुलन को दर्शाता है.
वहीं, टीएम पंकज में सामान्य वर्ग से 26 पदाधिकारियों को शामिल किया गया, जो करीब 41 फीसदी है. इसके अलावा, दलित समाज से जुड़ाव गहरा करने के उद्देश्य से अनुसूचित जाति के 7 सदस्यों (11 प्रतिशत) और अनुसूचित जनजाति के 1 सदस्य (2 प्रतिशत) को टीम में स्थान मिला है.
टीम पंकज में किस जाति का दबदबा
उत्तर प्रदेश बीजेपी संगठन की कमान ओबीसी समाज से आने वाले पंकज चौधरी के हाथों में है. अब लंबे समय के बाद घोषित हुई टीम पंकज के जातिवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा ब्राह्मण समाज को जगह मिली है. ब्राह्मण समाज से 10 (16 फीसदी) सदस्य बने हैं. इसके बाद क्षत्रिय समाज से 7 (11 फीसदी), भूमिहार समाज से 5 (8 फीसदी) और वैश्य समाज से 4 (6 फीसदी) पदाधिकारी बनाए गए हैं.
ओबीसी जातियों में कुर्मी समाज को 3 (5 प्रतिशत), जाट को 3 (5 प्रतिशत), जबकि यादव, पाल, गुर्जर, लोधी और शाक्य समाज को भी सम्मानजनक प्रतिनिधित्व देकर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की गई है. शाक्य-सैनी-कुशवाहा समुदाय के लोगों को संगठन में ओबीसी में सबसे ज्यादा अहमियत मिली है.
अवध और काशी क्षेत्र को तवज्जे मिली
उत्तर प्रदेश में बीजेपी ने अपने संगठन को 6 हिस्सों में बांटकर रखा है. टीम पंकज में सेंट्रल यूपी यानि अवध क्षेत्र से सबसे ज्यादा 16 और काशी क्षेत्र से 13 पदाधिकारी बनाए गए हैं. इसके अलावा बीजेपी ने अपने 6 क्षेत्रीय अध्यक्षों में 4 4 ओबीसी और ब्राह्मण और भूमिहार एक-एक बनाए गए हैं. भौगोलिक और क्षेत्रीय समीकरणों की बात करें तो उत्तर प्रदेश के सभी छह सांगठनिक क्षेत्रों को आनुपातिक प्रतिनिधित्व दिया गया है.
नई टीम में अवध क्षेत्र को सबसे बड़ा हिस्सा मिला है, जहां से 16 पदाधिकारियों (25 प्रतिशत) को चुना गया है. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाले काशी क्षेत्र से 13 पदाधिकारियों (20 प्रतिशत) को टीम में जगह दी गई है. पश्चिम उत्तर प्रदेश से 10 (16 प्रतिशत), ब्रज क्षेत्र से 9 (14 प्रतिशत) जबकि कानपुर और गोरखपुर क्षेत्रों से 8-8 पदाधिकारियों (13-13 प्रतिशत) को शामिल कर पूरे सूबे को एक सूत्र में पिरोने का प्रयास किया गया है.
युवा और पढ़े-लिखे लोगों को अहमियत
प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की इस नई टीम की सबसे बड़ी खासियत इसकी शैक्षणिक योग्यता और युवा ऊर्जा है. टीम के 64 पदाधिकारियों में से 29 पोस्ट ग्रेजुएट, 25 ग्रेजुएट और 4 पीएचडी धारक हैंय इसके अलावा बी.टेक, एलएलबी और एमबीए जैसी व्यावसायिक डिग्री वाले चेहरों को भी संगठन में जिम्मेदारी दी गई है. इससे पार्टी की प्रशासनिक और रणनीतिक क्षमता को नई धार मिलने की उम्मीद है.
बीजेपी ने युवाओं को मौका देने की रणनीति के तहत उम्र के समीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया हैय टीम में 50 वर्ष से कम आयु वाले नेताओं की भारी बहुलता है. 35 वर्ष से कम उम्र के 2, 40 वर्ष से कम के 11, 45 वर्ष से कम के 16 और 50 वर्ष से कम आयु के 27 नेताओं को शामिल कर संगठन में नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने का स्पष्ट संदेश दिया गया.
आधी आबादी पर बीजेपी खास फोकस
बीजेपी ने यूपी संगठन में आधी आबादी की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए कुल 13 महिला पदाधिकारियों को जगह दी है. इनमें 4 महिला उपाध्यक्ष, 1 महिला महामंत्री और 8 महिलाओं को मंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इससे साफ संकेत मिलता है कि बीजेपी संगठन ने सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन के साथ-साथ महिलाओं की भागीदारी को भी प्राथमिकता दी है.
हिमांशु मिश्रा