विधायकों का फोन इग्नोर करना पड़ेगा भारी, यूपी विधानसभा अध्यक्ष का अधिकारियों को कड़ा अल्टीमेटम

यूपी में विधायकों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों की अब खैर नहीं है. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने स्पष्ट कर दिया है कि जनहित के कार्यों के लिए फोन न उठाने या सहयोग न करने वाले अफसरों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.

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उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना (File Photo) उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना (File Photo)

समर्थ श्रीवास्तव

  • लखनऊ ,
  • 19 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:14 PM IST

उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना ने सदन में विधायकों के फोन न उठाने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का ऐलान किया है. नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय द्वारा अधिकारियों के असहयोग का मुद्दा उठाए जाने के बाद अध्यक्ष ने यह व्यवस्था दी. विधानसभा अध्यक्ष ने संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना को निर्देश दिया कि वे पूर्व में जारी शासनादेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं. अधिकारियों को जनहित के मुद्दों पर विधायकों को समय और सम्मान देने के लिए उत्तरदायी बनाया गया है. नियमों का उल्लंघन करने वाले अफसरों के विरुद्ध अब सेवा नियमावली के तहत कठोर अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे.

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अधिकारियों का आचरण चिंता का विषय

सतीश महाना ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष की सूचना से यह साफ झलक रहा है कि अधिकारी विधायकों का सहयोग नहीं कर रहे हैं, जो अत्यंत चिंताजनक है. उन्होंने याद दिलाया कि कुछ समय पहले भी सदन में दोषी अधिकारियों को दंडित किया गया था. 

महाना के अनुसार, दंड देना यह दर्शाता है कि अधिकारियों का आचरण संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है. यदि अधिकारी अपना रवैया नहीं बदलते, तो सदन के पास उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचेगा.

लोकतंत्र की सीमाओं का रखें ध्यान

विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यपालिका, न्यायपालिका और विधायिका के बीच संतुलन पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि ये तीनों अंग एक-दूसरे के पूरक हैं और सभी को एक-दूसरे के क्षेत्राधिकार का सम्मान करना चाहिए. सतीश महाना ने आगाह किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी तरह का हस्तक्षेप अराजकता पैदा कर सकता है. उन्होंने अधिकारियों से अपने दायित्वों और सीमाओं का पालन करने को कहा, साथ ही सदस्यों से भी अपेक्षा की कि वे अन्य अंगों की मर्यादा का सम्मान बनाए रखें.

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जारी होंगे सख्त निर्देश

महाना ने संसदीय कार्य मंत्री से अनुरोध किया कि वे इस संबंध में नए और कड़े निर्देश जारी करें. उन्होंने स्पष्ट किया कि जो अधिकारी शासनादेशों की अवहेलना कर रहे हैं, वे सीधे तौर पर अपनी सेवा नियमावली का उल्लंघन कर रहे हैं. ऐसे अफसरों के खिलाफ अब नरमी नहीं बरती जाएगी. सरकार की ओर से विधायिका को मजबूत करने की पहल की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों को अधिक सजग होकर नियमों का अनुपालन करना होगा.

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