'मेरे पास 9mm की पिस्टल थी और हमराह के पास AK-47', संभल केस में ASP अनुज चौधरी से पूछे गए 150 सवाल, हथियारों पर घेराबंदी

Sambhal Violence Court Hearing: संभल हिंसा मामले में चंदौसी कोर्ट में तत्कालीन सीओ और वर्तमान एएसपी अनुज चौधरी की वीसी के जरिए गवाही हुई. आरोपियों के वकील ने पुलिस पर दागे 150 सवाल, पुलिस ने कहा- केवल रबर बुलेट चली थी...

Advertisement
संभल हिंसा केस में कोर्ट के सामने एएसपी अनुज चौधरी की गवाही.(Photo:ITG) संभल हिंसा केस में कोर्ट के सामने एएसपी अनुज चौधरी की गवाही.(Photo:ITG)

अभिनव माथुर

  • संभल,
  • 16 मई 2026,
  • अपडेटेड 7:02 PM IST

संभल में भड़की भीषण हिंसा के मामले में शनिवार को जिला जज डॉ. विदुषी सिंह की अदालत में करीब दो घंटे तक मैराथन गवाही और जिरह की प्रक्रिया चली.इस दौरान संभल के तत्कालीन सीओ और वर्तमान में फिरोजाबाद के अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) अनुज चौधरी की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के जरिए गवाही दर्ज की गई.कोर्ट रूम में खुद जिला न्यायाधीश पूरे समय मौजूद रहीं।

Advertisement

जिरह में पूछे गए 150 सवाल, हथियारों और बोर पर हुई घेराबंदी
क्राइम नंबर 340 के तहत चल रहे इस मुकदमे में आरोपियों के वकील आसिफ अख्तर ने ASP अनुज चौधरी को कटघरे में खड़ा करते हुए करीब 150 तकनीकी और तीखे सवाल पूछे.

जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल दीक्षित के अनुसार, बचाव पक्ष ने अधिकारी को उलझाने की पूरी कोशिश की. 

लोकेशन और वेपन
जब पूछा गया कि हिंसा के वक्त वे कहां थे और कौन-सा हथियार था, तो अनुज चौधरी ने बताया कि उनके पास 9mm की पिस्टल थी, जबकि उनके हमराह (सुरक्षाकर्मी) के पास एक AK-47 और एक पंप गन मौजूद थी.

आरोपियों के वकील ने पुलिस अधिकारी की तकनीकी समझ परखने के लिए पूछा कि AK-47 में कौन सी गोली लगती है? इस पर एएसपी ने सटीक जवाब देते हुए कहा कि इसमें 7.62×39MM के कारतूस का इस्तेमाल होता है. वहीं 9mm पिस्टल में 9mm की गोली लगती है.

Advertisement

फायरिंग पर सफाई 
जब पुलिस फायरिंग को लेकर सवाल हुआ, तो अधिकारी ने साफ किया कि उग्र भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की तरफ से केवल पंप गन और रबर बुलेट का इस्तेमाल किया गया था.

केस से अलग हटने पर जज की टोकशासकीय अधिवक्ता ने बताया कि जिरह के दौरान विपक्षी वकीलों ने मूल केस से हटकर भी कई सवाल पूछने की कोशिश की, जिस पर अभियोजन पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई.

इस पर जज डॉ. विदुषी सिंह ने हस्तक्षेप करते हुए वकीलों को सख्त निर्देश दिया कि वे सिर्फ और सिर्फ संभल हिंसा से जुड़े प्रासंगिक सवाल ही पूछें।

आरोपियों के वकील का पलटवार 
दूसरी ओर, हिंसा के मुख्य आरोपी मुल्ला अफरोज के वकील आसिफ अख्तर ने अदालत के बाहर पुलिस की थ्योरी पर गंभीर सवाल उठाए. वकील का दावा है कि हिंसा में जिन चार लोगों की मौत हुई थी, वे जनता की नहीं बल्कि पुलिस की कथित फायरिंग में मारे गए थे।

स्क्रिप्टेड केस का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने अपनी खाल बचाने के लिए शुरुआती एफआईआर में इस बात को छिपाया और बाद में केस को नया रूप देने के लिए मृतकों के परिजनों के जरिए यह एफआईआर लिखवाई।

क्या था पूरा मामला?
बता दें कि 24 नवंबर 2024 को संभल की जामा मस्जिद के एडवोकेट कमीशन सर्वे के दौरान अचानक भारी बवाल और पथराव शुरू हो गया था, जिसने बाद में हिंसक रूप ले लिया. इस हिंसा में चार स्थानीय युवकों की मौत हो गई थी.

Advertisement

पुलिस ने इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड दुबई में बैठे शारिक साठा को बनाया था, जिसके गैंग से जुड़े मुल्ला अफरोज, मोहम्मद गुलाम और मोहम्मद वारिस फिलहाल जेल में बंद हैं. कानूनी जानकारों का मानना है कि इस अहम गवाही के बाद आने वाले कुछ महीनों में संभल हिंसा केस का अंतिम फैसला आ सकता है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »