संभल: 4 साल से दबंगों के कब्जे में थी महिला की जमीन, हाईकोर्ट के आदेश के बाद चला बुलडोजर, मिला कब्जा

उत्तर प्रदेश के संभल में करीब चार साल से विवादों में फंसी पौने दो बीघा जमीन प्रशासन ने कब्जामुक्त करा दी. दबंगों ने महिला की खरीदी हुई जमीन पर कब्जा कर मकान बना लिए थे. एसडीएम कोर्ट के आदेश के बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया, जिसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा. कोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर अवैध निर्माण ध्वस्त किया और जमीन का कब्जा पीड़ित को दिलाया.

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बुलडोजर से ढहाया अवैध निर्माण. (Photo: Screengrab) बुलडोजर से ढहाया अवैध निर्माण. (Photo: Screengrab)

अभिनव माथुर

  • संभल,
  • 15 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 8:15 AM IST

उत्तर प्रदेश के संभल में एक महिला की जमीन पर अवैध कब्जे का मामला आखिरकार हाईकोर्ट की दखल के बाद सुलझ गया. प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पौने दो बीघा जमीन को कब्जामुक्त कराया और उस पर बने अवैध निर्माण को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया. 

जानकारी के मुताबिक, असमोली थाना क्षेत्र के मढ़न गांव निवासी बुशरा खातून ने साल 2022 में करीब 6 लाख रुपये में पौने दो बीघा जमीन खरीदी थी. आरोप है कि गांव के ही रहने वाले शमशाद और इफ्तेखार ने जमीन पर कब्जा कर कच्चे मकान बना लिए. महिला ने पुलिस, राजस्व विभाग और प्रशासन से कई बार शिकायत की, लेकिन कब्जा नहीं हट सका. इसके बाद मामला एसडीएम कोर्ट पहुंचा.

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साल 2025 में एसडीएम कोर्ट ने पीड़ित महिला के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कब्जा हटाने का आदेश दिया था. हालांकि, इसके बाद भी कथित कब्जेदारों ने जमीन खाली नहीं की. मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां से भी प्रशासन को पीड़ित पक्ष को कब्जा दिलाने का निर्देश मिला.

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प्रशासन ने कई बार कब्जाधारियों को जमीन खाली करने के लिए कहा, लेकिन जब आदेश का पालन नहीं हुआ तो पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर दी. इसके बाद हाईकोर्ट ने संभल प्रशासन से जवाब तलब किया.

कोर्ट की सख्ती के बाद एक्शन में आया प्रशासन

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह और नायब तहसीलदार दीपक जुरैल भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. प्रशासन ने पहले कब्जाधारियों को हटने का मौका दिया, लेकिन विरोध होने पर बुलडोजर बुलाकर अवैध निर्माण गिरा दिया. कार्रवाई के दौरान पुलिस बल की तैनाती रही.

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तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि इस जमीन का बैनामा महिला के नाम है. शमशाद नाम के स्थानीय व्यक्ति ने जो भू माफिया किस्म का है, उसने इस जमीन पर कब्जा कर लिया था. महिला ने तहसील और राजस्व विभाग के साथ पुलिस को इस मामले की एप्लिकेशन दी थी कि उसकी जमीन पर भूृमाफिया ने कब्जा कर रखा है.

दबंगई के बल पर जमीन नहीं छोड़ रहा. एसडीएम कोर्ट और बाद में हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कब्जा नहीं छोड़ा गया. अवमानना याचिका में कोर्ट द्वारा जवाब मांगे जाने के बाद प्रशासन ने जमीन को कब्जामुक्त कराया. इनका यह चार साल पहले का कब्जा है. पहले भी एसडीएम ने इनको समझाया था.

पीड़ित पक्ष बोला- देर लगी, लेकिन न्याय मिला

पीड़ित पक्ष के अब्बास हैदर ने कहा कि उनकी जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा किया गया था. उन्होंने बताया कि कानूनी लड़ाई के बाद पहले एसडीएम कोर्ट और फिर हाईकोर्ट से राहत मिली. अब प्रशासन ने जमीन का कब्जा दिला दिया है. उनका कहना है कि न्याय मिलने में समय जरूर लगा, लेकिन आखिरकार उन्हें उनका हक मिल गया. फिलहाल प्रशासन ने जमीन को कब्जामुक्त कराकर पीड़ित पक्ष को सौंपने की कार्रवाई पूरी कर दी है.

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