7500 को स्थायी नौकरी,  50 हजार को रोजगार की उम्मीद, सीएम योगी के इस फैसले से युवाओं के लिए बड़ा मौका

यूपी सरकार की नई डेटा सेंटर नीति-2026 युवाओं के लिए बड़े रोजगार के अवसर लेकर आ सकती है. सरकार का लक्ष्य 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश आकर्षित कर करीब 50 हजार लोगों को रोजगार और 7500 लोगों को स्थायी नौकरी के अवसर उपलब्ध कराना है. बताया जा रहा है डेटा सेंटर परियोजनाओं से आईटी, इंजीनियरिंग, निर्माण और तकनीकी क्षेत्रों में यूपी में नौकरी के नए अवसर बढ़ेंगे.

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यूपी कैबिनेट में युवाओं से जुड़े कई फैसले लिए गए हैं.  (File photo: ITG) यूपी कैबिनेट में युवाओं से जुड़े कई फैसले लिए गए हैं. (File photo: ITG)

aajtak.in

  • लखनऊ,
  • 07 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 9:15 AM IST

यूपी  में रोजगार के बड़े अवसर खुलने की उम्मीद है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2026 को मंजूरी दे दी गई है. बताया जा रहा है कि नई नीति का सबसे बड़ा लक्ष्य प्रदेश को देश का प्रमुख ग्रीन और एआई-रेडी डेटा सेंटर हब बनाना है. इसके लिए सरकार ने 2 गीगावाट अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने और 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है.

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50 हजार रोजगार की उम्मीद, 7500 को स्थायी नौकरी

सरकार के अनुसार नई नीति लागू होने के बाद प्रदेश में विश्वस्तरीय डेटा सेंटर इकोसिस्टम विकसित होगा. डेटा सेंटर के आसपास आईटी कंपनियां, क्लाउड सर्विस, डिजिटल सेवाएं और टेक्नोलॉजी आधारित उद्योग भी विकसित होंगे, जिससे रोजगार का दायरा और बढ़ेगा. आधिकारिक अनुमान के मुताबिक करीब 7500 लोगों को दीर्घकालीन प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा, जबकि डेटा सेंटर निर्माण के दौरान लगभग 50 हजार लोगों को अल्पकालीन प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है. इसके अलावा अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बड़ी संख्या में पैदा होंगे, जिनका लाभ स्थानीय युवाओं और छोटे कारोबारियों को मिल सकता है.

बुंदेलखंड और पूर्वांचल को मिलेगा विशेष फायदा

नई नीति में क्षेत्रीय संतुलन पर भी विशेष ध्यान दिया गया है. सरकार ने बुंदेलखंड और पूर्वांचल में निवेश बढ़ाने के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का फैसला किया है. इससे इन क्षेत्रों में उद्योगों की नई संभावनाएं बनेंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को गति मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े डेटा सेंटर इन इलाकों में स्थापित होते हैं तो उनके आसपास होटल, परिवहन, बिजली, इंटरनेट, सुरक्षा, खानपान और अन्य सेवा क्षेत्रों का भी तेजी से विस्तार होगा.

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 एआई और ग्रीन टेक्नोलॉजी पर रहेगा जोर

आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील शर्मा ने बताया कि नई नीति को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. इसमें जीपीयू आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कंप्यूट क्षमता, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण अनुकूल संचालन को प्राथमिकता दी गई है. नीति में टियर-3 और टियर-4 श्रेणी के डेटा सेंटरों को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ ग्रीन डेटा सेंटर और सस्टेनेबल ऑपरेशन के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं. इससे बिजली की बचत, आधुनिक तकनीक और कम कार्बन उत्सर्जन वाले इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलेगा.

पहले की नीति से मिले अच्छे नतीजे

सरकार का कहना है कि वर्ष 2021 में लागू डेटा सेंटर नीति के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं. बाद में 2022 में इसमें संशोधन भी किया गया था. उसी नीति के तहत करीब21,343 करोड़ रुपये के निवेश से 6 डेटा सेंटर पार्क और दो अन्य डेटा सेंटर इकाइयों की परियोजनाएं स्वीकृत हुई थीं. इनमें से सात परियोजनाएं अब संचालन में आ चुकी हैं. नई नीति के जरिए सरकार इस सफलता को और बड़े स्तर पर आगे बढ़ाना चाहती है, ताकि उत्तर प्रदेश डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्यों में शामिल हो सके.

युवाओं के लिए क्या होंगे अवसर?

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डेटा सेंटर उद्योग केवल इंजीनियरों तक सीमित नहीं होता. इसके विस्तार से आईटी, कंप्यूटर साइंस, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, सिविल इंजीनियरिंग, नेटवर्क एडमिनिस्ट्रेशन, साइबर सिक्योरिटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, डेटा मैनेजमेंट, तकनीकी सहायता, सुरक्षा सेवाएं, भवन रखरखाव, हाउसकीपिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे अनेक क्षेत्रों में रोजगार बढ़ने की संभावना है. इसके अलावा छोटे और मध्यम उद्यमों को भी सर्वर इंस्टॉलेशन, केबलिंग, उपकरण आपूर्ति, रखरखाव और अन्य सेवाओं में नए कारोबारी अवसर मिल सकते हैं.

पंचायतों के लिए भी वित्तीय प्रस्ताव मंजूर

कैबिनेट बैठक में त्रिस्तरीय पंचायती संस्थाओं की वित्तीय जरूरतों से जुड़े प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई. वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य वित्त आयोग के तहत 14,988.50 करोड़ रुपये  का प्रावधान किया गया है. इसमें से लगभग 10 प्रतिशत राशि प्रशासनिक, परिचालन और रखरखाव कार्यों पर खर्च होगी. इसी मद से पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय और बैठक भत्तों पर लगभग 495.89 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. वहीं लगभग 157.38 करोड़ रुपये स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) और वित्त आयोग से जुड़े प्रशासनिक एवं तकनीकी कार्यों के लिए निर्धारित किए गए हैं.

क्यों अहम है यह फैसला?

डिजिटल अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है और डेटा सेंटर उसकी सबसे महत्वपूर्ण बुनियादी जरूरत बन चुके हैं. ऐसे में उत्तर प्रदेश की नई डेटा सेंटर नीति केवल निवेश आकर्षित करने की योजना नहीं है, बल्कि इसे रोजगार, डिजिटल उद्योग, एआई तकनीक और क्षेत्रीय विकास को एक साथ गति देने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है. यदि निवेश लक्ष्य तय समय पर पूरे होते हैं तो आने वाले वर्षों में प्रदेश के हजारों युवाओं को तकनीक आधारित रोजगार और कारोबार के नए अवसर मिल सकते हैं. 

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