उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों बयानबाजी तेज है. हाल ही में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी में एक बड़ी टूट होने वाली है, जिससे पहले ही सियासी पारा गर्म था.
अब इसी बीच राजभर ने गोमती रिवर फ्रंट मामले को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव को एक बार फिर आड़े हाथों लिया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर 'सत्यमेव जयते: गोमती रिवर फ्रंट, सैफई परिवार का भ्रष्टाचार पार्ट-1' का एक पीला पोस्टर साझा करते हुए आरोप लगाया कि इस प्रोजेक्ट का पैसा साल 2017 के विधानसभा चुनाव में उड़ाया गया. राजभर का कहना है कि पूरे मामले की जांच चल रही है, जिससे बहुत जल्द सारा सच जनता के सामने आ जाएगा. उन्होंने तीखा तंज कसते हुए चेतावनी दी कि 'विरोधी दल के नेता थोड़ा धीरज रखें, क्योंकि जेल जाने पर न एसी की हवा मिलेगी, न ट्विटर चलाने का मौका होगा और न ही वह कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पाएंगे'.
अखिलेश यादव को घेरते हुए राजभर ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई नोटबंदी की वजह से विपक्षी दल अतीक अहमद के काले धन का इस्तेमाल चुनाव में नहीं कर पाए. यही वजह रही कि गोमती रिवर फ्रंट का पूरा बजट खत्म होने के बाद भी जमीन पर सिर्फ 60 फीसदी काम ही पूरा हो सका. बाकी का 40 फीसदी पैसा, जो विकास कार्यों पर खर्च होना था, वह सैफई परिवार की तिजोरी और विधानसभा चुनाव में खर्च हुआ.
'अखिलेश बाबू को लगा था चोरी छिपा लेंगे, पर पाप का घड़ा भर गया'
राजभर ने तंज कसते हुए कहा कि अखिलेश बाबू को पूरा भरोसा था कि वह दोबारा सरकार में वापस लौट आएंगे, जिससे उनकी यह चोरी पूरी तरह छिप जाएगी. लेकिन जनता के सामने पाप का घड़ा भर चुका था, जिसके चलते घोटालेबाजों की सरकार चुनाव हार गई. सरकार बदलते ही पुराने कारनामों की हकीकत सामने आने लगी है. राजभर के मुताबिक, यह तो सिर्फ एक छोटा सा नमूना है.
वह पूरी फाइल लेकर बैठे हैं, इसलिए आने वाले दिनों में एक-एक कर सारे चिट्ठे खोलेंगे. उन्हें पूरा भरोसा है कि जांच एजेंसियां इस मामले में निष्पक्षता से काम करते हुए दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेंगी. हालांकि, राजभर के इन तीखे आरोपों पर अभी तक अखिलेश यादव की तरफ से कोई भी जवाब सामने नहीं आया है.
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