300 तारीखें, 22 गवाह और 12 साल की कानूनी लड़ाई: मुरादाबाद का मैनाठेर कांड, जिसमें दोषियों को मिली उम्रकैद

मुरादाबाद की अदालत ने 2011 के मैनाठेर बलवा प्रकरण में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 16 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. तत्कालीन डीआईजी पर जानलेवा हमले और पुलिस टीम के साथ हिंसा के इस मामले में 15 साल बाद न्याय मिला. ठोस साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने यह कड़ा निर्णय लिया/

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मैनाठेर कांड क दोषी कोर्ट से बाहर निकलते हुए (Photo- ITG) मैनाठेर कांड क दोषी कोर्ट से बाहर निकलते हुए (Photo- ITG)

जगत गौतम

  • मुरादाबाद ,
  • 30 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 9:43 AM IST

Uttar Pradesh News: मुरादाबाद के चर्चित मैनाठेर बलवा प्रकरण में करीब 15 साल बाद अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए 16 दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है. यह फैसला एडीजे-2 कृष्ण कुमार सिंह की अदालत ने सुनाया. फैसले को लेकर कोर्ट परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे. भारी पुलिस बल और RAF की तैनाती की गई, जबकि एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह खुद मौके पर मौजूद रहकर सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी करते नजर आए. 

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आपको बता दें कि यह मामला 6 जुलाई 2011 का है, जब मैनाठेर थाना क्षेत्र के असालतनगर बघा गांव में छेड़छाड़ के एक आरोपी को पकड़ने गई पुलिस टीम पर ग्रामीणों ने हमला कर दिया था. देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और हिंसक भीड़ ने मुरादाबाद-संभल मार्ग जाम कर दिया. हालात को काबू में करने पहुंचे तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह को भीड़ ने घेर लिया और लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटा. उनकी पिस्टल छीन ली गई और फायरिंग के दौरान उन्हें गोली भी लगी. इस हिंसा में 18 पुलिसकर्मी घायल हुए थे और पुलिस चौकी व सरकारी संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचाया गया था. 

मामले में शुरुआत में 33 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, जिनमें से 25 के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई. सुनवाई के दौरान 3 आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि 6 नाबालिगों का मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है. लंबी सुनवाई के बाद 23 मार्च को अदालत ने 16 आरोपियों को दोषी करार देते हुए सजा पर फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया. 

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अदालत ने मंजूर अहमद, मोहम्मद अली, हाशिम, मोहम्मद कमरुल, मोहम्मद मुजीफ, मोहम्मद यूनुस, रिजवान, अम्बरीश, कासिम, मोबीन, मोहम्मद मुजीब, तहजीब आलम, जाने आलम, फिरोज, नाजिम और परवेज आलम को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई. इस केस की सुनवाई करीब 12 साल तक चली, जिसमें 300 से ज्यादा तारीखें पड़ीं. 

अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह अदालत में पेश किए, जिनकी गवाही से घटना की पूरी सच्चाई सामने आई. इसके अलावा 26 दस्तावेजी साक्ष्य और 18 वस्तु साक्ष्य भी कोर्ट में प्रस्तुत किए गए. 

वस्तु साक्ष्यों में बॉडी प्रोटेक्टर, जूते, सीटी की डोरी, सोल्डर फ्लैप, कॉलर बैंड, पेन, नेम प्लेट, पुलिस कलर, ईंट-रोड़े से भरी थैली, पिस्टल की डोरी और पुलिसकर्मियों के कपड़े शामिल थे. साथ ही पुलिस की क्षतिग्रस्त गाड़ियों के फोटो भी साक्ष्य के तौर पर पेश किए गए. 

मजबूत चार्जशीट, ठोस साक्ष्य, गवाहों की सटीक गवाही और प्रभावी पैरवी के आधार पर अदालत ने 47 पन्नों के विस्तृत फैसले में सभी 16 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई. इस फैसले को कानून व्यवस्था के लिए अहम माना जा रहा है, जिसमें लंबे समय बाद पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है. 

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