बंपर वोटिंग, यादव वोटरों में सेंध और BJP का नया चेहरा... क्या मिल्कीपुर का समीकरण बदल रहा है?

मिल्कीपुर उपचुनाव के बाद अब चर्चा हो रही है कि समाजवादी पार्टी का गढ़ क्या इस चुनाव में वह ढह जाएगा. समाजवादी पार्टी ने मिल्कीपुर उपचुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है.

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मिल्कीपुर उपचुनाव मिल्कीपुर उपचुनाव

कुमार अभिषेक

  • मिल्कीपुर,
  • 06 फरवरी 2025,
  • अपडेटेड 1:03 PM IST

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की मिल्कीपुर विधानसभा में हुआ उपचुनाव चर्चा का केंद्र बना हुआ है. मिल्कीपुर में करीब 65 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई है. वोटिंग पर्सेंटेज को देखने के बाद सियासी जानकार यह सोचने को मजबूर हो गए हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया कि उपचुनाव में इतनी बंपर वोटिंग कैसे हो गई. साल 2022 के विधानसभा चुनाव में 60 फीसदी से कम ही वोटिंग हुई थी लेकिन इस बंपर वोटिंग के बाद से बीजेपी नेताओं के चेहरे खिले हुए हैं.

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समाजवादी पार्टी ने मिल्कीपुर उपचुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली, सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग और बाहर के वोटर्स को बुलाकर फर्जी वोटिंग और बुर्का हटाकर वोटर्स चेकिंग का आरोप लगाया. अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर एक के बाद एक कई पोस्ट किए. अयोध्या प्रशासन और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया.

'अधिकारी जाति देखकर...'

अखिलेश यादव ने कहा, "मैं चुनाव आयोग से नाराज नहीं हूं लेकिन चुनाव आयोग अपना काम नहीं कर रहा है. मिल्कीपुर का चुनाव विशेष था लेकिन वो चुनाव भी निष्पक्ष नहीं हुआ. अगर मुझे कहीं सफेद कपड़ा मिल गया होता तो मैं चुनाव आयोग को दे दिया होता. अधिकारी जाति देखकर मदद कर रहे थे."

उधर जमीनी हालात ये बयां कर रहे हैं कि बीजेपी ने सभी मोर्चो पर सपा को घेर लिया है, चाहे जातियों का समीकरण हो या फिर बूथ प्रबंधन, अपने रूठे नेताओं को मनाना हो या अपने वोटरों को बूथ तक ले जाना, बीजेपी यहां सपा पर भारी पड़ती दिखाई दी है. जातियों के समीकरण की बात की जाए तो समाजवादी के कोर वोट बैंक में बीजेपी सेंध लगाने में कुछ हद तक सफल दिखाई दी.

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सेंध लगाने में सफल रही बीजेपी

यादव वोटो में बीजेपी की सेंध लगती दिख रही है और इसका क्रेडिट रुदौली के भाजपा विधायक रामचंद्र यादव को जाता है, जिन्होंने यादवों में जबरदस्त मेहनत है. रुदौली के तीन बार के विधायक रामचंदर यादव की पकड़ इस इलाके में है. यही नहीं मुलायम सिंह की बहू अपर्णा यादव को लेकर भी रामचंद्र यादव, यादव बहुल इलाकों में घूमते रहे और स्थानीय स्तर के यादव नेताओं को चुनाव के पहले बीजेपी में शामिल कराए. माना जा रहा है कि उनकी मेहनत की बदौलत बीजेपी कुछ हद तक यादव वोटर्स में सेंध लगाने में सफल रही है.

इस बार दलित वोटो में भी विभाजन हुआ है. चंद्रशेखर आजाद रावण की पार्टी से उम्मीदवार सूरज चौधरी को जाटव बिरादरी का कुछ वोट मिला है जबकि अन्य दलित बिरादरियों में बीजेपी ने अपनी पकड़ बनाए रखी है.

यह भी पढ़ें: 'चुनाव आयोग मर चुका है, सफेद कपड़ा भेंट करना पड़ेगा', मिल्कीपुर उपचुनाव पर बोले अखिलेश यादव

ज्यादातर सवर्ण और बनिया बिरादरी के वोट परंपरागत तौर पर बीजेपी के साथ दिखाई दिए, जबकि समाजवादी पार्टी अपने कोर वोट बैंक को संभालने में ज्यादा जद्दोजहद करती दिखाई दी. लड़ाई समाजवादी पार्टी और बीजेपी में ही सिमट गई है लेकिन आजाद समाज पार्टी तीसरा कोण बनाने की कोशिश की. 

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पूरा मिल्कीपुर तीन ब्लॉक में बंटा है- हैरिंटिंगगंज, कुमारगंज और मिल्कीपुर ब्लॉक. इलाके का सबसे बड़ा बाजार अमानीगंज है. यादवों की संख्या यहां ज्यादा होने से बीजेपी ने यहां मेहनत की है. समाजवादी पार्टी को यकीन है कि उनका अपना वोट बैंक यादव, मुसलमान और दलित खासकर पासी समाज उनके साथ मजबूती से खड़ा है.  बीजेपी का नया पासी चेहरा देना लोगों को पसंद आया है. संसाधनों से भरपूर चंद्रभानु पासवान मिल्कीपुर के लिए नया चेहरा है और किसी भी विवाद से परे है. ऐसे में बीजेपी के लिए ये चुनाव सपा के मुकाबले ज़्यादा मुफीद नज़र आ रहा है.

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