'My God! तुमने अजय देवगन की फिल्म नहीं देखी...', गर्लफ्रेंड के हत्यारोपी की जमानत याचिका पर SC की टिप्पणी

मेरठ में शादी से ठीक पहले युवती और उसके पिता की हत्या के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य आरोपी सागर की जमानत याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से भी इनकार किया.

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सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया

अनीषा माथुर

  • नई दिल्ली,
  • 02 जून 2026,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST

उत्तर प्रदेश के मेरठ में शादी से ठीक पहले युवती और उसके पिता की हत्या के चर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मुख्य आरोपी सागर को राहत देने से इनकार कर दिया. अदालत ने आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई करने से भी मना कर दिया. सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों की टिप्पणी भी चर्चा का विषय बन गई.

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ मामले की सुनवाई कर रही थी. सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी के खिलाफ लगे आरोपों को बताते हुए कहा कि उसने अपनी कथित प्रेमिका, उसके पिता की हत्या कर दी और उसके भाई को भी गोली मारकर घायल कर दिया.

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पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा, "हे भगवान! तुमने अपनी गर्लफ्रेंड को मार दिया, उसके पिता की भी हत्या कर दी और उसका भाई भी घायल हो गया. तुम तो बहुत बड़े दुस्साहसी निकले. क्या तुमने अजय देवगन वाली बिहार पर बनी फिल्म नहीं देखी? तुम तो गर्लफ्रेंड किलर हो. यह किसी फिल्म की कहानी जैसा मामला है."

यह मामला जून 2020 का है. अभियोजन पक्ष के अनुसार युवती के भाई ने मेरठ में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें सागर पर एकतरफा प्रेम और लगातार पीछा करने (स्टॉकिंग) के आरोप लगाए गए थे. पुलिस के मुताबिक युवती की शादी किसी अन्य युवक से तय हो गई थी. शादी से दो दिन पहले सागर अपने कुछ साथियों के साथ युवती के घर पहुंचा और वहां अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इस हमले में युवती और उसके पिता की मौत हो गई, जबकि परिवार के अन्य सदस्य घायल हो गए थे.

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घटना के बाद सागर को गिरफ्तार कर लिया गया था और तब से वह जेल में बंद है. याचिका में कहा गया कि घटना के समय उसकी उम्र केवल 18 वर्ष थी और वह पिछले छह वर्षों से जेल में है. सुप्रीम कोर्ट में आरोपी की ओर से अधिवक्ता अभिषेक राणा ने दलील दी कि अभियोजन का पूरा मामला ऐसी एफआईआर पर आधारित है, जिसमें कई तथ्य सही नहीं हैं. उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता और युवती के भाई ने ट्रायल कोर्ट में जिरह के दौरान स्वीकार किया कि वह घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था, जबकि उसी ने एफआईआर दर्ज कराई थी.

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि कथित प्रत्यक्षदर्शी का बयान साबित नहीं हो पाया है. साथ ही राज्य सरकार को अभी भी 43 गवाहों के बयान दर्ज कराने हैं. याचिका में कहा गया कि शिकायतकर्ता के अपने बयान से पीछे हटने के कारण एफआईआर की सत्यता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं.

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुआ और जमानत याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया. अदालत जब याचिका खारिज करने के संकेत देने लगी तो आरोपी के वकील ने इसे वापस लेने की अनुमति मांगी, ताकि भविष्य में उचित समय पर हाईकोर्ट का रुख किया जा सके.

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गौरतलब है कि इससे पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट भी सागर की जमानत याचिका खारिज कर चुका है. हालांकि, इस हमले में शामिल बताए गए अन्य आरोपियों को हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है.
 

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