जौनपुर का 'दशरथ मांझी' अवतार: न ठेकेदार, न सरकारी बजट... 7.80 लाख का चंदा और ग्रामीणों ने अपने दम पर खड़ा कर दिया 32 फीट का पुल

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में नेताओं और अधिकारियों की बेरुखी से तंग आकर ग्रामीणों ने खुद ही अपनी किस्मत बदलने का फैसला किया. मडियाहूं तहसील के सीरिया गांव के लोगों ने आपस में चंदा इकट्ठा कर करीब 7.80 लाख रुपये की लागत से बसुही नदी पर 32 फीट लंबा लोहे का पुल खुद तैयार कर दिया.

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जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटकर थक गए गांव वाले (Photo- ITG) जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटकर थक गए गांव वाले (Photo- ITG)

आदित्य प्रकाश भारद्वाज

  • जौनपुर ,
  • 08 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 5:23 PM IST

Uttar Pradesh News: जौनपुर जिले की मडियाहूं तहसील के सीरिया गांव में अधिकारियों और राजनेताओं द्वारा सुनवाई न किए जाने से नाराज ग्रामीणों ने चंदा जुटाकर बसुही नदी पर 32 फीट लंबा लोहे का पुल खुद ही बना लिया. बरसात के दिनों में नदी का पानी बढ़ने के कारण हजारों लोगों और स्कूली बच्चों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाती थी. इस गंभीर समस्या से निजात पाने के लिए ग्रामीणों ने आपस में कुल 7.80 लाख रुपये एकत्र किए. इसके बाद बिना किसी बाहरी ठेकेदार या कारीगर की मदद लिए, ग्रामीणों ने खुद ही वेल्डिंग मशीन से पुल का ढांचा तैयार किया और उसकी पेंटिंग भी खुद की.

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साल 2018 से जर्जर था पुराना पुल

सीरिया गांव के पास बहने वाली बसुही नदी पर ग्रामीणों ने पहले भी साल 2002 में चंदा जुटाकर एक लोहे का पुल बनाया था. इस पुल से दर्जनों गांवों के लोग और स्कूली बच्चे रोजाना आते-जाते थे. लेकिन समय के साथ साल 2018 में यह पुल बेहद जर्जर और क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे कई दुर्घटनाएं भी हुईं.

जनप्रतिनिधियों के चक्कर काटकर थक गए गांव वाले

पुल टूटने के बाद पिछले चार-पांच वर्षों से ग्रामीण लगातार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काटते रहे. गांव वालों का आरोप है कि चुनाव के समय नेता वादा करते थे, लेकिन जीतने के बाद कोई झांकने तक नहीं आया. निराश होकर ग्रामीणों ने खुद ही अपनी परेशानी दूर करने का निश्चय किया.

बिना किसी बाहरी मदद के खुद किया निर्माण

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इस पुल निर्माण की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए किसी बाहरी मजदूर को नहीं बुलाया गया. गांव के लोग खुद ही वेल्डिंग और पेंटिंग का काम संभाल रहे हैं. गांव की रहने वाली छात्रा साक्षी यादव बताती हैं कि पढ़ाई के लिए आने-जाने में बहुत दिक्कत होती थी, इसलिए सबने मिलकर यह कदम उठाया.

विकास के दावों के बीच चुनावी बहिष्कार की चेतावनी

गांव की महिलाएं और बुजुर्ग व्यवस्था से बेहद आक्रोशित हैं. ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब मुसीबत के समय उनकी कोई सुनवाई नहीं होती, तो वे आगे से वोट नहीं देंगे. विकास के बड़े-बड़े सरकारी दावों के बीच ग्रामीणों द्वारा अपने दम पर इस पुल का निर्माण करना प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

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